थम्स अप और लिम्का कभी पार्ले के लोकप्रिय भारतीय ब्रांड थे। 1993 में Coca-Cola की भारत वापसी के बाद रणनीतिक अधिग्रहण के जरिए ये ब्रांड उसके पोर्टफोलियो का हिस्सा बन गए। इसके पीछे बाजार, वितरण नेटवर्क और प्रतिस्पर्धा की अहम भूमिका रही।
hums Up और Limca की कहानी: आज Thums Up और Limca दुनिया की सबसे बड़ी बेवरेज कंपनियों में शामिल Coca-Cola के ब्रांड हैं, लेकिन एक समय ये भारतीय कंपनी Parle के स्वामित्व में थे। 1993 में Coca-Cola की भारत वापसी के बाद हुए अधिग्रहण ने भारतीय सॉफ्ट ड्रिंक बाजार की तस्वीर बदल दी। आइए जानते हैं इस पूरी कहानी के अहम पड़ाव।
कोका-कोला के जाने के बाद शुरू हुई थम्स अप की कहानी
1970 के दशक में भारत सरकार ने विदेशी कंपनियों के लिए Foreign Exchange Regulation Act (FERA) के तहत नए नियम लागू किए। इन नियमों के बाद Coca-Cola ने भारत से अपना कारोबार समेट लिया। इसके बाद भारतीय बाजार में एक बड़ा खाली स्थान बन गया, जिसे भरने के लिए पार्ले ने वर्ष 1977 में Thums Up लॉन्च किया।

अपने अलग स्वाद, मजबूत वितरण नेटवर्क और आक्रामक मार्केटिंग के दम पर Thums Up ने तेजी से लोकप्रियता हासिल की। कुछ ही वर्षों में यह भारत का सबसे बड़ा कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक ब्रांड बन गया। इसी दौरान Limca, Gold Spot, Citra और Maaza जैसे अन्य भारतीय ब्रांड भी बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना चुके थे।
1993 में Coca-Cola की भारत वापसी
आर्थिक उदारीकरण के बाद 1993 में Coca-Cola ने भारतीय बाजार में दोबारा प्रवेश किया। उस समय उसे पहले से स्थापित भारतीय ब्रांड्स और Pepsi जैसी वैश्विक कंपनी से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा था। उस दौर में Parle का सॉफ्ट ड्रिंक कारोबार भारतीय बाजार में मजबूत स्थिति में था और उसके कई लोकप्रिय ब्रांड उपभोक्ताओं की पहली पसंद बने हुए थे।
बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए Coca-Cola ने Parle के साथ समझौता किया और उसके प्रमुख सॉफ्ट ड्रिंक ब्रांड्स का अधिग्रहण कर लिया। इस सौदे में Thums Up, Limca, Gold Spot, Citra और Maaza जैसे ब्रांड शामिल थे।
बॉटलिंग नेटवर्क बना रणनीति का अहम हिस्सा
उस समय सॉफ्ट ड्रिंक कारोबार में केवल ब्रांड ही नहीं, बल्कि बॉटलिंग और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता था। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार Coca-Cola ने अपने वितरण नेटवर्क को तेजी से मजबूत किया और कई बॉटलिंग सुविधाओं पर नियंत्रण हासिल किया। इससे बाजार में उसकी मौजूदगी लगातार बढ़ती गई।
इसी रणनीति और प्रतिस्पर्धी माहौल के बीच Parle ने अपने सॉफ्ट ड्रिंक कारोबार को Coca-Cola को बेचने का फैसला किया। यह सौदा उस समय भारतीय पेय उद्योग के सबसे चर्चित अधिग्रहणों में से एक माना गया।
थम्स अप को बंद करने की बजाय बनाया मजबूत ब्रांड
अधिग्रहण के बाद यह माना जा रहा था कि Coca-Cola अपने वैश्विक ब्रांड Coca-Cola को बढ़ावा देने के लिए Thums Up को धीरे-धीरे बाजार से हटा देगी। हालांकि ऐसा नहीं हुआ।
कंपनी ने जल्द ही महसूस किया कि Thums Up का स्वाद और ब्रांड पहचान भारतीय उपभोक्ताओं के बीच बेहद मजबूत है। इसके बाद Coca-Cola ने इस ब्रांड को जारी रखा और नई मार्केटिंग रणनीति के साथ इसे और मजबूत बनाया। आज Thums Up भारत के सबसे लोकप्रिय कार्बोनेटेड पेय ब्रांड्स में शामिल है।
आज भी बरकरार है भारतीय ब्रांड्स की पहचान
आज Thums Up और Limca दोनों Coca-Cola के पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा हैं। Thums Up ने समय के साथ अरबों डॉलर के ब्रांड का दर्जा हासिल किया, जबकि Limca भी भारतीय बाजार में लगातार मजबूत प्रदर्शन कर रहा है।
यह कहानी केवल एक कारोबारी अधिग्रहण की नहीं, बल्कि भारतीय उपभोक्ताओं की पसंद, बदलती आर्थिक नीतियों और वैश्विक कंपनियों की रणनीतियों की भी मिसाल है। भारतीय बाजार में मजबूत स्थानीय ब्रांड्स किस तरह वैश्विक कंपनियों के पोर्टफोलियो का हिस्सा बने और फिर भी अपनी अलग पहचान बनाए रखने में सफल रहे, Thums Up और Limca इसका प्रमुख उदाहरण हैं।











