तिरुपति बालाजी मंदिर में नए साल के अवसर पर वैकुंठ द्वार दर्शन 30 दिसंबर 2025 से 8 जनवरी 2026 तक आयोजित होंगे। टीटीडी ने पहले तीन दिनों के लिए ई-डीआईपी टिकट जारी किए हैं और दर्शन के लिए तीन मुख्य क्षेत्रों में प्रवेश मार्ग तय किए हैं। पुलिस और टीटीडी की सुरक्षा और गाइडलाइंस भक्तों की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी।
Vaikuntha Dwara Darshan 2026: तिरुपति बालाजी मंदिर में 30 दिसंबर 2025 से 8 जनवरी 2026 तक वैकुंठ द्वार दर्शन आयोजित होंगे। आंध्र प्रदेश के तिरुमला में भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के दर्शन के लिए यह विशेष अवसर 10 दिनों तक चलेगा। पहले तीन दिनों के लिए 1.76 लाख श्रद्धालुओं को ई-डीआईपी सिस्टम के जरिए टिकट जारी किए गए हैं। टीटीडी और पुलिस ने दर्शन के दौरान सुरक्षा, मार्गदर्शन और भीड़ प्रबंधन के लिए पूरी तैयारी की है, ताकि भक्त सुरक्षित और सुव्यवस्थित तरीके से दर्शन कर सकें।
दर्शन की तारीखें और स्लॉट्स
टीटीडी के अनुसार, वैकुंठ द्वार दर्शन की शुरुआत 30 दिसंबर से होगी और यह 8 जनवरी तक जारी रहेगा। पहले तीन दिनों के लिए, यानी 30 दिसंबर, 31 दिसंबर और 1 जनवरी को, कुल 1.76 लाख श्रद्धालुओं को ई-डीआईपी सिस्टम के माध्यम से अग्रिम सर्व दर्शन टिकट जारी किए गए हैं। इस वर्ष भी श्रद्धालुओं के लिए VIP दर्शन का विकल्प रखा गया है, जिसमें निर्धारित दर्शन टोकन रखने वाले भक्त पहले दिन 5 घंटे तक विशेष दर्शन कर सकेंगे।
प्रतिदिन लगभग 60,000 श्रद्धालुओं को 14 स्लॉट में प्रवेश मिलेगा। टीटीडी ने प्रवेश मार्गों को तीन मुख्य क्षेत्रों में बांटा है। सुबह के स्लॉट में कृष्णा तेजा सर्कल से प्रवेश होगा, दोपहर के स्लॉट में एटीजीएच से प्रवेश मिलेगा और रात के स्लॉट में सिलातोरणम सर्कल से श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जाएगा। टीटीडी ने साफ कहा है कि पहले तीन दिनों तक बिना टोकन वाले श्रद्धालु दर्शन के लिए प्रवेश नहीं पा सकेंगे।
टीटीडी की तैयारियां और व्यवस्था
टीटीडी ने वैकुंठ द्वार दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं के लिए पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की है। मंदिर परिसर में पर्याप्त संख्या में सुरक्षा और व्यवस्थापकों को तैनात किया जाएगा ताकि दर्शन प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके। प्रवेश मार्गों पर संकेत और गाइडलाइन बोर्ड लगाए जाएंगे ताकि भक्त आसानी से अपने निर्धारित स्लॉट के अनुसार प्रवेश कर सकें।
टीटीडी अधिकारियों ने बताया कि दर्शन के दौरान हर क्षेत्र में सुरक्षा और मार्गदर्शन के लिए पर्याप्त संख्या में कर्मी तैनात किए गए हैं। इसके अलावा, स्वास्थ्य सुविधाओं और आपातकालीन चिकित्सा सहायता के लिए भी टीम तैयार रहेगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पानी, शौचालय और बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
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पुलिस ने जारी की महत्वपूर्ण गाइडलाइंस
भक्तों की सुरक्षा और सुविधा के लिए तिरुपति पुलिस ने भी गाइडलाइंस जारी की हैं। पुलिस ने कहा है कि श्रद्धालु टीटीडी द्वारा निर्धारित समय और मार्ग का ही पालन करें। टोकन और पहचान दस्तावेज जैसे आधार कार्ड साथ लाना अनिवार्य है।
पुलिस ने यह भी कहा कि श्रद्धालु समूह में इकट्ठा होकर शांति भंग करने या अनियमितता पैदा करने से बचें। यदि किसी श्रद्धालु को कोई संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति दिखाई दे, तो तुरंत निकटतम पुलिस कर्मी को सूचित करें। पुलिस और टीटीडी कर्मियों द्वारा दिए गए आदेशों का पालन करना सभी श्रद्धालुओं के लिए जरूरी है।
भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा उपाय
टीटीडी और पुलिस ने मिलकर दर्शन के दौरान भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के लिए विस्तृत योजना बनाई है। मंदिर परिसर में प्रवेश और निकासी के लिए अलग-अलग मार्ग तय किए गए हैं। हर क्षेत्र में सुरक्षा कर्मी तैनात रहेंगे, जो श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन करेंगे और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
टीटीडी ने इसके साथ ही COVID-19 जैसे स्वास्थ्य निर्देशों का पालन करने की भी अपील की है। मास्क पहनना, सामाजिक दूरी बनाए रखना और सैनिटाइजेशन का ध्यान रखना श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
श्री वेंकटेश्वर स्वामी का महत्व
भगवान विष्णु के अवतार श्री वेंकटेश्वर स्वामी के वैकुंठ द्वार दर्शन को लेकर श्रद्धालु विशेष श्रद्धा रखते हैं। वैकुंठ द्वार का दर्शन आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और इसे वर्ष में कुछ ही अवसरों पर खोला जाता है। यह अवसर भक्तों को आध्यात्मिक शांति और आशीर्वाद पाने का मौका देता है।
विशेष अवसर पर टीटीडी की ओर से दर्शन प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए तकनीकी और मानव संसाधनों का पूर्ण उपयोग किया जाता है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि सभी श्रद्धालु सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से दर्शन कर सकें।
दर्शन के लिए ऑनलाइन और ई-डीआईपी व्यवस्था
टीटीडी ने पहले तीन दिनों के लिए अग्रिम ई-डीआईपी टिकट जारी किए हैं। यह प्रणाली ऑनलाइन है और श्रद्धालु अपने निर्धारित स्लॉट के अनुसार मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं। इससे लंबी कतारों और भीड़भाड़ की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
ई-डीआईपी प्रणाली का उद्देश्य श्रद्धालुओं को अधिक सुविधा और कम इंतजार समय के साथ दर्शन का अवसर देना है। भक्त अपनी सुविधा अनुसार सुबह, दोपहर या रात के स्लॉट का चयन कर सकते हैं।
भक्तों के लिए विशेष सावधानियां
भक्तों को सलाह दी गई है कि वे अपने टोकन और पहचान दस्तावेज सुरक्षित रखें। दर्शन के दौरान किसी भी तरह की अनियमितता, धक्का-मुक्की या अव्यवस्था से बचें। पुलिस और टीटीडी कर्मियों द्वारा बताए गए निर्देशों का पालन करें।
टीटीडी ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी श्रद्धालु को निर्धारित स्लॉट से पहले या बाद में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। यह नियम दर्शन की सुरक्षा और सुव्यवस्था बनाए रखने के लिए बनाया गया है।








