तमिलनाडु में कांग्रेस और DMK के बीच गठबंधन में तनाव बढ़ गया है। प्रवीण चक्रवर्ती के कर्ज पर दिए बयान से मतभेद उभरे। सीटों और सत्ता में हिस्सेदारी पर असहमति ने राजनीतिक माहौल को और जटिल बना दिया है।
New Delhi: तमिलनाडु में कांग्रेस और डीएमके (DMK) के बीच सियासी मतभेद बढ़ते नजर आ रहे हैं। यह विवाद मुख्य रूप से कांग्रेस के एआईसीसी नेता प्रवीण चक्रवर्ती के बयानों के कारण उभरा है। चक्रवर्ती ने तमिलनाडु की कर्ज की स्थिति को लेकर बयान दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि तमिलनाडु पर सभी राज्यों में सबसे अधिक बकाया कर्ज है। उनका कहना था कि 2010 में उत्तर प्रदेश पर तमिलनाडु के कर्ज से दोगुने से भी अधिक कर्ज था, जबकि वर्तमान में तमिलनाडु का कर्ज उत्तर प्रदेश से भी अधिक हो गया है।
चक्रवर्ती के इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। कई लोग इसे 1996 की स्थिति से जोड़कर देख रहे हैं, जब राज्य में कांग्रेस पार्टी का विभाजन हुआ था। इस बयान ने कांग्रेस और DMK के बीच गठबंधन पर असहमति को बढ़ावा दिया है।
डीएमके का कड़ा रुख
डीएमके के वरिष्ठ नेता तमिलनाडु एनसीसी अध्यक्ष के. सेल्वपेरुंथोगई के समक्ष इस मुद्दे को उठाते हुए कहा गया कि चक्रवर्ती के बयान से राज्य में गठबंधन में गड़बड़ी पैदा करने की कोशिश की जा रही है। सेल्वपेरुंथोगई ने चक्रवर्ती की टिप्पणियों की कड़ी निंदा की और पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व से उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
पूर्व मंत्री एस. थिरुनावुक्करसर, सांसद ज्योतिमणि और सांसद शशिकांत सेंथिल जैसे कई कांग्रेस नेताओं ने भी चक्रवर्ती की टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि इस तरह के बयान गठबंधन के माहौल को बिगाड़ सकते हैं और राजनीतिक रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं।
प्रवीण चक्रवर्ती और टीवीके मुलाकात
चक्रवर्ती ने विवाद और बढ़ाते हुए तमिलगा वेत्री कज़गम (TVK) के प्रमुख अभिनेता विजय से मुलाकात की। उन्होंने लंबे समय तक उनसे बातचीत की और यह कदम कांग्रेस और DMK के बीच तनाव को और गहरा कर गया। सूत्रों के अनुसार, चेन्नई में मौजूद कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने टीवीके के कुछ नेताओं से मुलाकात की, जिससे यह संकेत मिलता है कि दिल्ली में कांग्रेस और TVK के बीच एक समानांतर संचार चैनल खुल गया है।
हालांकि, डीएमके नेता इस प्रक्रिया से असहमत हैं और तमिलनाडु परिषद (TNCC) के समक्ष अपनी आपत्तियां दर्ज कर रहे हैं। इसके बावजूद, सेल्वपेरुंथोगई ने 2026 के विधानसभा चुनावों में DMK के साथ गठबंधन की पुष्टि की है।
सीटों और सत्ता में हिस्सेदारी पर विवाद
कांग्रेस ने गठबंधन में सीटों और सत्ता में हिस्सेदारी की मांग की थी। हालांकि, DMK ने सत्ता में हिस्सेदारी और सीटों में भारी बढ़ोतरी की मांग को मानने से इनकार कर दिया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, गठबंधन जीतने पर कांग्रेस को अधिकतम तीन सीटें ही मिल सकती हैं। सत्ता में हिस्सेदारी की संभावना पूरी तरह से खारिज कर दी गई है।
सूत्रों ने यह भी कहा कि यदि कांग्रेस सीटों के बंटवारे से संतुष्ट नहीं है, तो वह गठबंधन से बाहर निकल सकती है। इस मसले पर पार्टी के अंदर भी मतभेद हैं। चोडंकर और चक्रवर्ती जैसे नेता गठबंधन के विरोध में हैं, जबकि अधिकांश स्थानीय कांग्रेस नेता फिलहाल गठबंधन में बने रहने के पक्ष में हैं।
स्थानीय कांग्रेस नेताओं का रुख
अधिकांश स्थानीय कांग्रेस नेताओं का मानना है कि TVK को चुनाव में वैकल्पिक सहयोगी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनका तर्क है कि गठबंधन में बने रहना ही राज्य में कांग्रेस की राजनीतिक मजबूती और DMK के साथ सहयोग सुनिश्चित करता है। स्थानीय नेताओं का कहना है कि चक्रवर्ती और चोडंकर जैसे नेताओं का क्षेत्रीय समर्थन या राजनीतिक आधार बहुत कमजोर है, इसलिए उनका दृष्टिकोण पार्टी हित में नहीं है।
इसलिए TNCC और स्थानीय कांग्रेस नेताओं का रुख स्पष्ट है कि वे DMK के साथ गठबंधन बनाए रखना चाहते हैं और टीवीके को विकल्प के रूप में नहीं देख रहे हैं।
चक्रवर्ती के बयान में उन्होंने उत्तर प्रदेश का भी जिक्र किया और कहा कि तमिलनाडु की कर्ज की स्थिति उत्तर प्रदेश से भी अधिक गंभीर है। उनके अनुसार, यह स्थिति 1996 की स्थिति जैसी हो सकती है, जब कांग्रेस पार्टी राज्य में विभाजित हुई थी। डीएमके नेताओं ने इस तुलना को अनुचित बताया और इसे गठबंधन में खटास डालने वाला कदम बताया। उनका कहना था कि इस तरह के बयान से राज्य में कांग्रेस और DMK के बीच भरोसे का संकट पैदा हो सकता है।












