अमेरिका ने भारत से आयातित सोलर पैनलों पर 126 प्रतिशत प्रारंभिक टैरिफ लगाया है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने सब्सिडी आधारित अनुचित प्रतिस्पर्धा का हवाला दिया। अंतिम निर्णय 6 जुलाई को होगा, जिससे भारतीय निर्यात पर बड़ा असर पड़ सकता है।
US Tariff: अमेरिका ने भारत से आयात किए जाने वाले सोलर पैनलों पर 126 प्रतिशत का प्रारंभिक आयात शुल्क लगा दिया है। इस फैसले से भारत के सोलर कारोबार में हलचल मच गई है और व्यापारिक तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग का कहना है कि भारत सरकार की ओर से सोलर निर्माताओं को दी जा रही सब्सिडी के कारण अमेरिकी बाजार में अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा हो रही थी। इसी आधार पर यह प्रारंभिक शुल्क लगाया गया है।
यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत का सोलर निर्यात तेजी से बढ़ रहा था और अमेरिका उसके प्रमुख बाजारों में शामिल था। 126 प्रतिशत का टैरिफ भारतीय कंपनियों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
अन्य देशों पर भी सख्त रुख
अमेरिका ने केवल भारत पर ही नहीं बल्कि इंडोनेशिया और लाओस पर भी भारी शुल्क लगाया है। इंडोनेशिया से आने वाले सोलर पैनलों पर 86 से 143 प्रतिशत तक का शुल्क लगाया गया है, जबकि लाओस से आयातित पैनलों पर 81 प्रतिशत का शुल्क तय किया गया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन देशों के निर्यातकों को सरकारी मदद मिल रही थी, जिससे उन्हें अमेरिकी उत्पादकों के मुकाबले अनुचित लाभ मिल रहा था।
इस फैसले से साफ संकेत मिलता है कि अमेरिका अपने घरेलू सोलर उद्योग की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है और वह सब्सिडी आधारित आयात को सीमित करना चाहता है।
घरेलू उद्योग को राहत, उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा दबाव
इन टैरिफ का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी सोलर पैनल निर्माताओं को सुरक्षा देना है। अमेरिकी उद्योग समूहों का कहना है कि सस्ते आयात के कारण घरेलू कंपनियों को नुकसान हो रहा था। अब ऊंचे शुल्क से उन्हें प्रतिस्पर्धा में राहत मिल सकती है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अमेरिकी उपभोक्ताओं और डेवलपर्स के लिए सोलर प्रोजेक्ट की लागत बढ़ सकती है। सोलर पैनल महंगे होने से इंस्टॉलेशन खर्च बढ़ेगा, जिसका असर रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की गति पर भी पड़ सकता है।
ट्रंप की व्यापार नीति से जुड़ा कदम

यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की व्यापार नीति के तहत उठाया गया कदम माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम उन व्यापक वैश्विक टैरिफ से अलग है, जिन्हें पहले लागू किया गया था और जिन्हें बाद में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुराने वैश्विक टैरिफ निरस्त किए जाने के बाद प्रशासन ने 10 प्रतिशत का नया टैरिफ लागू किया था और संकेत दिया था कि इसे 15 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। अब सोलर पैनलों पर लगाया गया यह विशेष शुल्क व्यापार नीति को और सख्त दिशा में ले जाता दिख रहा है।
अमेरिका में भारत की बढ़ती हिस्सेदारी
भारत, इंडोनेशिया और लाओस मिलकर अमेरिका के कुल सोलर पैनल आयात का लगभग 57 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। भारत का निर्यात विशेष रूप से तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2024 में भारत से अमेरिका को सोलर पैनलों का निर्यात 79.26 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया, जो 2022 के मुकाबले लगभग नौ गुना अधिक है।
पिछले कुछ वर्षों में अमेरिकी टैरिफों के कारण कई डेवलपर्स ने चीन की जगह भारत और अन्य दक्षिण एशियाई देशों से पैनल मंगवाना शुरू कर दिया था। इससे भारतीय कंपनियों को बड़ा बाजार मिला। अब नए टैरिफ से यह बढ़त प्रभावित हो सकती है।
अमेरिकी उद्योग समूह का समर्थन
अमेरिकी सोलर उद्योग समूह Alliance for American Solar Manufacturing and Trade ने वाणिज्य विभाग से इस मामले की जांच का अनुरोध किया था। इस समूह का कहना है कि घरेलू निर्माताओं की सुरक्षा और रोजगार बचाने के लिए यह कदम जरूरी था।
समूह से जुड़े वकील टिम ब्राइटबिल ने कहा कि यह निर्णय अमेरिकी सोलर बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार अमेरिकी कंपनियां अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं और उनके निवेश की सुरक्षा के लिए सब्सिडी वाले आयात पर नियंत्रण जरूरी है।
अंतिम निर्णय और एंटी डंपिंग जांच
अमेरिकी वाणिज्य विभाग 6 जुलाई को इस मामले में अंतिम निर्णय जारी करेगा। फिलहाल लगाया गया 126 प्रतिशत शुल्क प्रारंभिक है। इसके साथ ही भारत, इंडोनेशिया और लाओस से आयातित सोलर पैनलों पर एंटी डंपिंग जांच भी चल रही है।
अगर अंतिम निर्णय में भी ऊंचा शुल्क बरकरार रहता है, तो भारतीय सोलर कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करना कठिन हो सकता है। इससे निर्यात में गिरावट और मुनाफे पर दबाव पड़ने की संभावना है।










