रूस-यूक्रेन युद्ध के चार वर्ष पूरे होने पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में युद्धविराम प्रस्ताव पेश हुआ। 107 देशों ने समर्थन किया, 12 विरोध में रहे और भारत समेत 51 देशों ने मतदान से दूरी बनाई। प्रस्ताव में स्थायी शांति की मांग की गई।
New Delhi: रूस-यूक्रेन युद्ध को चार वर्ष पूरे होने के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया गया। इस प्रस्ताव में तत्काल और बिना शर्त युद्धविराम की मांग की गई थी। साथ ही यूक्रेन में व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति स्थापित करने का आह्वान किया गया। प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप समाधान की बात दोहराई गई।
मतदान में बंटा वैश्विक समुदाय
यूक्रेन द्वारा पेश इस प्रस्ताव पर वैश्विक स्तर पर एकमत राय नहीं बन सकी। कुल 107 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि 12 देशों ने विरोध किया। वहीं 51 देशों ने मतदान से दूरी बनाई, जिनमें भारत भी शामिल रहा। इस नतीजे ने साफ कर दिया कि रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय विभाजित है।
प्रस्ताव में क्या-क्या मांगें शामिल

प्रस्ताव में युद्धबंदियों के पूर्ण आदान-प्रदान, गैरकानूनी रूप से हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई और जबरन निर्वासित नागरिकों की वापसी की मांग की गई। इसमें बच्चों सहित सभी नजरबंद नागरिकों की सुरक्षित वापसी पर जोर दिया गया। साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर यूक्रेन की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता की पुष्टि की गई।
भारत ने क्यों बनाई दूरी
भारत ने एक बार फिर अपनी न्यूट्रल नीति को बरकरार रखते हुए मतदान में हिस्सा नहीं लिया। भारत ने न तो प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया और न ही विरोध में। युद्ध की शुरुआत से ही भारत का स्पष्ट रुख रहा है कि किसी भी समस्या का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं बल्कि Dialogue और Diplomacy से संभव है।
भारत के रूस और यूक्रेन दोनों के साथ संबंध रहे हैं। ऐसे में भारत ने संतुलित रुख अपनाते हुए यह संकेत दिया कि वह किसी एक पक्ष के साथ खड़े होने के बजाय शांति के प्रयासों को प्राथमिकता देता है।
शांति के लिए संवाद पर जोर
भारत लगातार कहता रहा है कि स्थायी शांति केवल बातचीत से संभव है। संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर भी भारत ने युद्ध समाप्त करने और संवाद शुरू करने की अपील की है। मतदान से दूरी बनाकर भारत ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और रणनीतिक संतुलन को दोहराया है।











