ग्रीनलैंड मुद्दे पर यूरोपीय देशों को टैरिफ की धमकी देने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक यू-टर्न ले लिया। NATO प्रमुख के समर्थन और आर्कटिक सुरक्षा फ्रेमवर्क पर सहमति के बाद आठ देशों पर प्रस्तावित टैरिफ रद्द कर दिए गए।
Trump Tariff: दुनिया की राजनीति में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने फैसले को लेकर चर्चा में हैं। ग्रीनलैंड (Greenland) को लेकर यूरोपीय देशों पर टैरिफ (tariff) लगाने की धमकी देने वाले ट्रंप ने अचानक यू-टर्न लेते हुए आठ यूरोपीय देशों पर प्रस्तावित आयात शुल्क रद्द कर दिया है। इस फैसले ने वैश्विक कूटनीति में नई बहस छेड़ दी है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सिर्फ रणनीतिक बदलाव है या फिर NATO के साथ कोई सीक्रेट डील (secret deal) हो चुकी है।
ट्रंप का यह फैसला ऐसे वक्त आया है, जब कुछ दिन पहले ही वह खुले मंच से ग्रीनलैंड को अमेरिका के राइट, टाइटल और ओनरशिप में लेने की बात कर चुके थे। ऐसे में टैरिफ वापस लेने की घोषणा ने सबको हैरान कर दिया है।
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप का सख्त रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से ग्रीनलैंड को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा (national security) के लिए अहम बताते रहे हैं। उनका मानना है कि आर्कटिक (Arctic) क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती गतिविधियां अमेरिका के लिए चुनौती बन सकती हैं। इसी वजह से ट्रंप ग्रीनलैंड को रणनीतिक नजरिए से बेहद जरूरी मानते हैं।
ट्रंप पहले भी यह कह चुके हैं कि अमेरिका को ग्रीनलैंड पर ज्यादा कंट्रोल चाहिए। हालांकि, उनके इस बयान पर डेनमार्क और यूरोपीय देशों ने कड़ा विरोध जताया था और साफ कहा था कि ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं है।
टैरिफ की धमकी से बढ़ा था तनाव
ग्रीनलैंड मुद्दे पर सहयोग न मिलने से नाराज ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर आर्थिक दबाव बनाने का रास्ता चुना। उन्होंने आठ यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। प्रस्तावित योजना के तहत अगले महीने से 10 प्रतिशत और जून तक 25 प्रतिशत तक आयात शुल्क बढ़ाने की तैयारी थी।
इस ऐलान के बाद यूरोप में चिंता का माहौल बन गया था। माना जा रहा था कि अगर ये टैरिफ लागू हो जाते, तो अमेरिका और यूरोप के व्यापारिक रिश्तों में बड़ी दरार आ सकती थी।
अचानक आया ट्रंप का यू-टर्न

जब सभी को लग रहा था कि टैरिफ तय समय पर लागू होंगे, तभी ट्रंप ने अचानक घोषणा कर दी कि आठ यूरोपीय देशों पर प्रस्तावित टैरिफ रद्द किए जा रहे हैं। इस फैसले ने पूरी दुनिया को चौंका दिया।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि NATO प्रमुख के साथ आर्कटिक सुरक्षा को लेकर भविष्य के एक “फ्रेमवर्क” पर सहमति बनी है। उन्होंने इसे फॉरएवर डील बताया और कहा कि इससे अमेरिका पहले से ज्यादा सुरक्षित होगा।
क्या NATO के साथ हुई कोई सीक्रेट डील
ट्रंप के बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या अमेरिका और NATO के बीच कोई गोपनीय समझौता हुआ है। हालांकि, इस कथित डील का पूरा ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन संकेत दिए गए हैं कि इसमें ग्रीनलैंड और आर्कटिक क्षेत्र से जुड़ी रणनीतिक चिंताएं शामिल हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप ने टैरिफ को एक दबाव बनाने के हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया और जब NATO से समर्थन के संकेत मिले, तो उन्होंने इसे वापस ले लिया।
NATO में क्यों मची थी खलबली
ट्रंप के ग्रीनलैंड संबंधी बयानों और टैरिफ की धमकी से NATO के भीतर भी तनाव बढ़ गया था। यूरोपीय देशों ने साफ तौर पर कहा कि ग्रीनलैंड डेनमार्क की संप्रभुता (sovereignty) का हिस्सा है और इस पर कोई समझौता नहीं होगा।
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि ट्रंप के बयान अगर आगे बढ़ते, तो NATO गठबंधन की एकता पर असर पड़ सकता था। इसी बीच NATO महासचिव मार्क रूटे (Mark Rutte) ने सार्वजनिक रूप से बयान दिया कि अगर अमेरिका पर हमला होता है, तो पूरा गठबंधन उसके साथ खड़ा रहेगा।
मार्क रूटे के बयान के बाद बदली तस्वीर
NATO महासचिव के इस समर्थन के कुछ ही समय बाद ट्रंप ने टैरिफ रद्द करने का ऐलान कर दिया। इससे यह संकेत मिला कि अमेरिका और NATO के बीच बातचीत का रास्ता खुल गया है।
हालांकि, ट्रंप ने यह साफ नहीं किया कि टैरिफ हटाने के बदले अमेरिका ने क्या हासिल किया है, लेकिन उनका बयान यह जरूर दिखाता है कि आर्कटिक सुरक्षा को लेकर दोनों पक्ष किसी साझा रणनीति पर सहमत हुए हैं।









