यूरोप को फिर तेल और गैस देने को तैयार रूस, व्लादिमीर पुतिन बोले– पॉलिटिकल प्रेशर न हो तो शुरू हो सकता है सहयोग

यूरोप को फिर तेल और गैस देने को तैयार रूस, व्लादिमीर पुतिन बोले– पॉलिटिकल प्रेशर न हो तो शुरू हो सकता है सहयोग

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि अगर राजनीतिक दबाव न हो तो रूस यूरोप को फिर तेल और गैस सप्लाई करने के लिए तैयार है। मिडिल ईस्ट तनाव के बीच यह बयान वैश्विक ऊर्जा बाजार में अहम माना जा रहा है।

World News: मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उछाल के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बड़ा बयान दिया है। पुतिन ने कहा है कि अगर यूरोप चाहे तो रूस एक बार फिर उसे तेल और गैस की सप्लाई करने के लिए तैयार है।

रूस के राष्ट्रपति का कहना है कि मॉस्को ने कभी भी यूरोप को ऊर्जा (Energy) सप्लाई करने से इनकार नहीं किया है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि दोनों पक्षों के बीच लंबे समय तक स्थिर और भरोसेमंद सहयोग हो तथा रूस पर किसी तरह का पॉलिटिकल प्रेशर न डाला जाए।

पुतिन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान पर हमलों के कारण वैश्विक तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ रहा है।

तेल की कीमतों में तेज उछाल

हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार ऐसा हुआ है जब कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। ईरान से जुड़े घटनाक्रम और क्षेत्र में संभावित युद्ध की आशंका के कारण निवेशकों और तेल कंपनियों के बीच चिंता बढ़ी है।

इस स्थिति में दुनिया के कई देश ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नए विकल्प तलाश रहे हैं। ऐसे समय में रूस की ओर से आया यह बयान वैश्विक ऊर्जा राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पुतिन बोले– रूस ने कभी मना नहीं किया

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्पष्ट किया कि रूस ने यूरोप को तेल और गैस सप्लाई करने से कभी इनकार नहीं किया है। उन्होंने कहा कि रूस हमेशा से ऊर्जा बाजार में एक भरोसेमंद सप्लायर रहा है।

पुतिन के अनुसार अगर यूरोप की कंपनियां और खरीदार भविष्य में रूस के साथ लंबे समय तक स्थिर सहयोग के लिए तैयार होते हैं तो मॉस्को भी इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा कि यह सहयोग तभी संभव होगा जब इसे राजनीतिक दबाव से दूर रखा जाए। पुतिन के अनुसार ऊर्जा आपूर्ति को राजनीतिक विवादों से अलग रखना जरूरी है ताकि दोनों पक्षों को स्थिरता मिल सके।

यूरोप के साथ काम करने की इच्छा

पुतिन ने अपने बयान में यह भी कहा कि रूस यूरोप के साथ काम करने के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसके लिए यूरोपीय देशों की ओर से सकारात्मक संकेत मिलना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि रूस को यह भरोसा चाहिए कि भविष्य में सहयोग स्थिर और टिकाऊ होगा। उनके अनुसार ऊर्जा क्षेत्र में लंबी अवधि का सहयोग दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद हो सकता है। पुतिन का कहना है कि रूस केवल एशियाई बाजारों तक सीमित नहीं रहना चाहता बल्कि यूरोप के साथ भी संतुलित ऊर्जा व्यापार बनाए रखना चाहता है।

एशिया और यूरोप दोनों में सप्लाई जारी

रूसी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि रूस एशिया के कई भरोसेमंद देशों को पहले से ही तेल और गैस की सप्लाई कर रहा है और यह जारी रहेगी। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि यूरोपियन यूनियन के सदस्य देशों में हंगरी और स्लोवाकिया को भी रूस ऊर्जा आपूर्ति करता रहा है।

हालांकि हाल के महीनों में पाइपलाइन से जुड़े कुछ तकनीकी और राजनीतिक कारणों के चलते आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसके बावजूद रूस ने इन देशों के साथ सहयोग बनाए रखने की इच्छा जताई है।

यूरोपियन यूनियन ने लगाया था बैन

रूस और यूरोप के बीच ऊर्जा संबंधों में बदलाव 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद आया। उस समय यूरोपियन यूनियन ने रूस से आने वाले कच्चे तेल के समुद्री आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था।

इस फैसले के बाद यूरोप ने ऊर्जा के अन्य स्रोतों की तलाश शुरू कर दी। कई देशों ने अमेरिका, मध्य पूर्व और अन्य क्षेत्रों से तेल और गैस खरीदना शुरू किया। इसके अलावा यूक्रेन के रास्ते आने वाली Druzhba तेल पाइपलाइन को हुए नुकसान के कारण भी कुछ यूरोपीय देशों को रूसी तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक जनवरी से हंगरी और स्लोवाकिया को रूस से तेल निर्यात लगभग रुक गया था।

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