होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ते तनाव के बीच UAE ने इसे सुरक्षित रखने के लिए युद्ध स्तर की तैयारी शुरू की है। संभावित सैन्य कार्रवाई से वैश्विक तेल सप्लाई और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है।
World News: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने बड़ा कदम उठाने के संकेत दिए हैं। UAE ने अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों को साफ कर दिया है कि वह Strait of Hormuz को दोबारा खोलने के लिए हर संभव मदद करेगा। इसके लिए UAE ने तैयारी भी शुरू कर दी है, जिससे यह साफ हो गया है कि क्षेत्र में हालात तेजी से युद्ध की ओर बढ़ सकते हैं।
यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां तनाव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
होर्मुज सुरक्षा बल बनाने की योजना
UAE ने सिर्फ बयान ही नहीं दिया बल्कि एक बड़ा रणनीतिक कदम भी उठाया है। जानकारी के अनुसार UAE कई देशों को मिलाकर एक Hormuz Security Force बनाने की कोशिश कर रहा है। इसका उद्देश्य इस अहम समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखना और जहाजों को ईरानी हमलों से बचाना है।
इस प्रस्ताव के तहत दर्जनों देशों को शामिल करने की कोशिश की जा रही है ताकि एक संयुक्त टास्कफोर्स बनाई जा सके। यह फोर्स समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करेगी और किसी भी हमले की स्थिति में तुरंत कार्रवाई कर सकेगी।
ईरानी हमलों से UAE सबसे ज्यादा प्रभावित
रिपोर्ट्स के अनुसार UAE इस समय क्षेत्र में ईरान के हमलों से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल है। यहां तक कि कुछ विश्लेषणों में यह भी कहा गया है कि UAE को इजरायल से भी ज्यादा हमलों का सामना करना पड़ा है।
इसी वजह से UAE अब रक्षात्मक रणनीति से आगे बढ़कर सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी में है। उसका मानना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बंद हो सकता है, जिससे वैश्विक व्यापार पर गंभीर असर पड़ेगा।

अमेरिका और सहयोगियों का रुख
अमेरिका लंबे समय से इस जलमार्ग को खुला रखने की कोशिश कर रहा है। उसने अपने सहयोगी देशों से भी इसमें भागीदारी की अपील की है। हालांकि कई देशों ने फिलहाल इसमें सीधे शामिल होने से इनकार कर दिया है।
कुछ सहयोगी देशों का कहना है कि वे अभी अपने जहाज भेजने की योजना नहीं बना रहे हैं। इससे यह साफ होता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे पर एकजुटता की कमी है। इसके बावजूद UAE ने पहल करते हुए खुद आगे आने का फैसला किया है और अमेरिका के साथ मिलकर रणनीति बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
फ्रांस की शर्त, युद्ध खत्म होने के बाद मदद
इस पूरे घटनाक्रम में France का रुख भी सामने आया है। फ्रांस ने कहा है कि उसने लगभग 35 देशों के साथ इस मुद्दे पर बातचीत की है। लेकिन फ्रांस ने साफ किया है कि वह किसी भी मिशन में तभी शामिल होगा जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष खत्म हो जाएगा। इसका मतलब है कि अभी तत्काल कोई बड़ा संयुक्त सैन्य अभियान शुरू होने की संभावना कम है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से करीब 20 प्रतिशत वैश्विक तेल और LNG (Liquefied Natural Gas) की सप्लाई होती है। ईरान द्वारा इस मार्ग को प्रभावी रूप से बंद किए जाने के कारण तेल की कीमतों में तेजी आई है। इससे दुनियाभर में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी आम लोगों की जेब पर सीधा असर डालेगी।
इस बढ़ते संकट को देखते हुए UAE अब इस मुद्दे को United Nations Security Council (UNSC) में उठाने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार UAE, बहरीन के साथ मिलकर एक प्रस्ताव लाने पर काम कर रहा है।











