ब्रिटेन में हिल्सबरो कानून को संसद की मंजूरी, सरकारी संस्थाओं पर बढ़ेगी जवाबदेही

ब्रिटेन की संसद ने हिल्सबरो कानून को मंजूरी दी। नया कानून सरकारी अधिकारियो को जांच में सच बताने और सहयोग करने मे मदद करेगा, तथा पीड़ित परिवारों को कानूनी सहायता

ब्रिटेन की संसद ने हिल्सबरो कानून (Hillsborough Law) को मंजूरी दे दी है। इस कानून का उद्देश्य सरकारी संस्थाओं और अधिकारियों को जांच के दौरान सच बताने और सहयोग करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य करना है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह के सरकारी पर्दादारी को रोका जा सके।

लंदन: ब्रिटेन की संसद ने लंबे समय से चर्चा में रहे हिल्सबरो कानून (Hillsborough Law) को मंजूरी दे दी है। इस कानून का उद्देश्य किसी भी सरकारी विफलता, सार्वजनिक त्रासदी या राज्य से जुड़े मामलों की जांच के दौरान सरकारी संस्थाओं और अधिकारियों को पूरी ईमानदारी से सच बताने और जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य करना है।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस कानून को देश के न्यायिक और प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव बताते हुए कहा कि यह कानून भविष्य में सरकारी संस्थाओं द्वारा तथ्यों को छिपाने या जांच को प्रभावित करने जैसी घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

1989 की हिल्सबरो त्रासदी से जुड़ा है कानून का नाम

इस कानून का नाम 1989 में हुई हिल्सबरो स्टेडियम त्रासदी के नाम पर रखा गया है। इंग्लैंड में खेले गए एफए कप सेमीफाइनल के दौरान स्टेडियम में हुई भगदड़ में 97 लोगों की मौत हो गई थी। उस घटना के बाद पीड़ित परिवारों ने वर्षों तक न्याय के लिए संघर्ष किया और सरकारी एजेंसियों पर तथ्यों को छिपाने के आरोप लगाए। इसी पृष्ठभूमि में यह कानून तैयार किया गया, ताकि भविष्य में किसी भी राष्ट्रीय त्रासदी के बाद सरकारी संस्थाएं जांच में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ सहयोग करें।

क्या है हिल्सबरो कानून?

हिल्सबरो कानून के तहत सभी सार्वजनिक संस्थाओं, सरकारी अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों पर 'ड्यूटी ऑफ कैंडर' (Duty of Candour) लागू होगी। इसका अर्थ है कि किसी भी आधिकारिक जांच, आयोग या न्यायिक प्रक्रिया के दौरान संबंधित अधिकारियों को पूरी सच्चाई बतानी होगी और किसी भी तथ्य को छिपाने या भ्रामक जानकारी देने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा, कानून में यह भी प्रावधान किया गया है कि राज्य से जुड़ी किसी त्रासदी या मौत के मामलों में पीड़ित परिवारों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे न्यायिक प्रक्रिया में प्रभावी ढंग से अपनी बात रख सकें।

कीर स्टार्मर ने कहा- बदलाव की दहलीज पर है देश

प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने संसद में कहा कि ब्रिटेन अब ऐसे दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां न्याय व्यवस्था अधिक पारदर्शी और जवाबदेह होगी। उन्होंने कहा कि उन्होंने हिल्सबरो पीड़ित परिवारों से किया गया वादा पूरा किया है और यह कानून आम लोगों के अधिकारों को मजबूत करेगा। स्टार्मर ने कहा कि पीड़ित परिवारों ने न्याय पाने के लिए वर्षों तक इंतजार किया और अब यह कानून सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में किसी भी नागरिक को ऐसी लंबी लड़ाई न लड़नी पड़े।

एंडी बर्नहैम ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि

ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहैम, जो वर्षों से हिल्सबरो अभियान से जुड़े रहे हैं, ने इस कानून को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक नया कानून नहीं, बल्कि पूरे सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव है। बर्नहैम के अनुसार, इस कानून से सत्ता और सरकारी संस्थाओं की जवाबदेही बढ़ेगी तथा आम नागरिकों को न्याय पाने की प्रक्रिया अधिक मजबूत और निष्पक्ष बनेगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की बड़ी राजनीतिक विरासत साबित हो सकती है।

विवाद के बाद हुए महत्वपूर्ण संशोधन

हालांकि इस कानून को संसद में मंजूरी मिलने से पहले कई विवाद भी सामने आए। शुरुआती मसौदे में खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों को कुछ मामलों में विशेष छूट देने का प्रस्ताव था। इस पर मानवाधिकार संगठनों, पीड़ित परिवारों और कई सांसदों ने आपत्ति जताई।

आलोचकों का कहना था कि यदि खुफिया एजेंसियों के अधिकारी इस कानून के दायरे से बाहर रहेंगे तो पारदर्शिता का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। इसके बाद सरकार ने संशोधन करते हुए स्पष्ट किया कि खुफिया अधिकारियों पर भी 'ड्यूटी ऑफ कैंडर' लागू होगी, हालांकि संवेदनशील राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए विशेष कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

विपक्ष ने सरकार की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

कंजर्वेटिव पार्टी ने कानून के उद्देश्य का समर्थन किया, लेकिन इसे संसद में पेश करने की प्रक्रिया की आलोचना की। विपक्षी नेताओं का कहना था कि अंतिम समय में संशोधन लाने से विधायी प्रक्रिया प्रभावित हुई और सरकार ने पहले अलग-अलग पक्षों से विरोधाभासी वादे किए। उनका आरोप था कि सरकार ने राजनीतिक श्रेय लेने की जल्दबाजी में इस विधेयक को अंतिम रूप दिया। हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि संशोधन केवल कानून को अधिक प्रभावी और संतुलित बनाने के लिए किए गए हैं।

पीड़ित परिवारों को मिलेगी कानूनी सहायता

इस कानून का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि भविष्य में किसी भी सार्वजनिक त्रासदी या राज्य से जुड़ी मौत के मामलों में पीड़ित परिवारों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इससे वे जांच आयोगों और अदालतों में बेहतर तरीके से अपनी बात रख सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रावधान न्यायिक प्रक्रिया में संतुलन स्थापित करेगा और सरकारी संस्थाओं तथा आम नागरिकों के बीच संसाधनों की असमानता को कम करेगा।

अगले वर्ष से लागू करने की तैयारी

ब्रिटिश सरकार का लक्ष्य है कि हिल्सबरो कानून अगले वर्ष अप्रैल तक पूरी तरह लागू हो जाए। यदि ऐसा होता है तो हिल्सबरो त्रासदी की अगली बरसी तक यह कानून प्रभावी रूप से लागू हो जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानून केवल ब्रिटेन ही नहीं, बल्कि दुनिया के अन्य लोकतांत्रिक देशों के लिए भी पारदर्शिता, जवाबदेही और पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा का एक महत्वपूर्ण मॉडल बन सकता है।

Leave a comment