यूक्रेन में Starlink पर पाबंदियों से सैन्य ऑपरेशन प्रभावित, भारत की सिक्योरिटी को लेकर बढ़ी चिंता

यूक्रेन में Starlink पर पाबंदियों से सैन्य और ड्रोन मिशन प्रभावित हुए। जानें, भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशी सैटेलाइट इंटरनेट पर निर्भरता के जोखिम।

यूक्रेन ने बुधवार को बताया कि Starlink टर्मिनल्स पर अचानक लगी पाबंदियों से उसकी सैन्य यूनिट्स के कॉम्बैट और ड्रोन मिशन प्रभावित हुए। इस घटनाक्रम ने भारत में विदेशी सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की सुरक्षा और निर्भरता को लेकर नई चिंताएं पैदा की हैं।

Tech: यूक्रेन में सैन्य संचार के लिए इस्तेमाल होने वाली Starlink सर्विस पर पाबंदियों की खबर ने भारत में भी सुरक्षा से जुड़ी बहस तेज कर दी है। यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, टर्मिनल्स पर प्रतिबंधों के कारण सैन्य अभियानों और ड्रोन मिशनों में रुकावट आई। इस घटनाक्रम ने सवाल उठाए हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से अहम कम्युनिकेशन सिस्टम के लिए किसी विदेशी निजी कंपनी पर निर्भर रहना कितना सुरक्षित हो सकता है।

यूक्रेन में Starlink पर पाबंदियों से सैन्य मिशनों पर असर

यूक्रेन में Starlink टर्मिनल्स पर अचानक लगाई गई पाबंदियों के बाद सैन्य संचार व्यवस्था प्रभावित होने की खबर सामने आई है। यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, इस वजह से मिलिट्री यूनिट्स को कॉम्बैट ऑपरेशन और ड्रोन मिशन चलाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस घटनाक्रम ने विदेशी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस पर निर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को लेकर भारत में भी सवाल खड़े किए हैं।

पाबंदियों के पीछे राजनीतिक दबाव की आशंका

The Times of India की रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेनी अधिकारियों और विश्लेषकों ने इन प्रतिबंधों को अमेरिका के कथित दबाव से जोड़कर देखा है। उनका मानना है कि यह घटनाक्रम यूक्रेन को रूसी तेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले रोकने के लिए प्रभावित करने की कोशिश से जुड़ा हो सकता है।

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को वेपन टेक्नोलॉजी से जुड़े मामलों में सलाह देने वाले मिलिट्री एक्सपर्ट सेरही बेस्क्रेस्टनोव ने सोशल मीडिया पर कहा कि इस कार्रवाई को मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से अलग करके नहीं देखा जा सकता।

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि पाबंदियां किस स्तर पर और किन सेवाओं पर लागू हुईं। मस्क का समर्थन करने वाले लोगों का तर्क है कि इनका असर मुख्य रूप से अमेरिकी सरकार द्वारा संचालित मिलिट्री-ग्रेड Starshield सिस्टम पर हो सकता है, जो सामान्य Starlink सेवा से अलग है। खबर लिखे जाने तक ट्रंप प्रशासन और Starlink की ओर से आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी।

यूक्रेन में Starlink की भूमिका और निर्भरता

SpaceX द्वारा संचालित Starlink सैटेलाइट नेटवर्क दूरदराज के क्षेत्रों में हाई-स्पीड और लो-लेटेंसी इंटरनेट उपलब्ध कराता है। यह उन इलाकों में उपयोगी है जहां पारंपरिक केबल या फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क उपलब्ध नहीं हैं अथवा भरोसेमंद नहीं हैं।

रूस के हमले शुरू होने के कुछ ही दिनों के भीतर यूक्रेन में Starlink सेवा सक्रिय की गई थी। इससे अस्पतालों, इमरजेंसी सेवाओं और सरकारी कार्यालयों को कनेक्टिविटी बनाए रखने में मदद मिली। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, यूक्रेन में 50,000 से अधिक Starlink टर्मिनल्स मौजूद हैं।

हालिया घटनाक्रम ने इस निर्भरता के जोखिम को उजागर किया है। यदि किसी संकट के दौरान सेवा सीमित होती है, तकनीकी खराबी आती है या ऑपरेटर बाहरी दबाव में कोई फैसला लेता है, तो जरूरी संचार व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। हालांकि, मौजूदा मामले में पाबंदियों के पूरे दायरे और उनके कारणों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

भारत के लिए क्या हैं सुरक्षा से जुड़े सवाल?

भारत में Starlink की एंट्री को लेकर पहले से ही नियामकीय और कारोबारी बहस जारी है। एलन मस्क ने भारतीय बाजार में प्रवेश को लेकर कथित बाधाओं पर सवाल उठाए थे और घरेलू कंपनियों के हितों को लेकर चर्चा हुई थी। भारत ने अपने नियामकीय ढांचे को भेदभावपूर्ण बताए जाने की बात खारिज की है।

Starlink ने जरूरी लाइसेंस और मंजूरियां हासिल कर ली हैं, लेकिन व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने से पहले सिक्योरिटी क्लीयरेंस और स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़ी प्रक्रियाओं का इंतजार होने की खबरें हैं।

तक्षशिला इंस्टीट्यूशन की अप्रैल में जारी रिपोर्ट Starlink and Risks for India में विदेशी निजी ऑपरेटर पर निर्भरता, कनेक्टिविटी पर नियंत्रण और डेटा सुरक्षा से जुड़े जोखिमों पर चर्चा की गई थी। रिपोर्ट में यह चिंता भी जताई गई थी कि संघर्ष या नागरिक अशांति के दौरान सेवा की उपलब्धता में बदलाव और सरकारी प्रतिबंधों को दरकिनार करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल चुनौती पैदा कर सकता है।

यूक्रेन में यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब रूस के मिसाइल और ड्रोन हमलों से ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचने और करीब 6,00,000 लोगों के बिजली से वंचित होने की खबर है। ऐसे हालात में संचार नेटवर्क की उपलब्धता सैन्य और नागरिक सेवाओं, दोनों के लिए अहम हो जाती है।

भारत के लिए मुख्य सवाल केवल सैटेलाइट इंटरनेट की उपलब्धता का नहीं, बल्कि संकट के समय उस पर नियंत्रण, सेवा की निरंतरता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संचार की विश्वसनीयता का भी है

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