लोकप्रिय धारावाहिक Jhansi Ki Rani में मनु (रानी लक्ष्मीबाई के बचपन का नाम) की भूमिका निभाकर पहचान बनाने वाली अभिनेत्री उल्का गुप्ता ने बाद में फिल्मों में भी अपनी अलग पहचान स्थापित की।
एंटरटेनमेंट न्यूज़: भारतीय मनोरंजन उद्योग में प्रतिभा और अवसर के बीच संतुलन को लेकर बहस लंबे समय से जारी है। इसी बीच अभिनेत्री उल्का गुप्ता ने फिल्म इंडस्ट्री में अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कई बार प्रतिभा होने के बावजूद उन्हें बड़े प्रोजेक्ट्स से बाहर कर दिया गया और उनकी जगह स्टार किड्स को चुन लिया गया। उनके इस बयान ने एक बार फिर बॉलीवुड में नेपोटिज्म (भाई-भतीजावाद) और अवसरों की समानता पर चर्चा को तेज कर दिया है।
टीवी से फिल्मों तक का सफर
उल्का गुप्ता ने बेहद कम उम्र में लोकप्रिय ऐतिहासिक टीवी शो झांसी की रानी में मनु यानी रानी लक्ष्मीबाई के बचपन का किरदार निभाकर पहचान बनाई थी। इस भूमिका ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया। इसके बाद उन्होंने फिल्मों और दक्षिण भारतीय सिनेमा में भी अपनी पहचान बनाने का प्रयास किया। हाल ही में चर्चा में रही फिल्म The Kerala Story 2 के बाद उल्का एक बार फिर सुर्खियों में हैं।
उनकी आगामी फिल्म रजनी की बारात में वह मुख्य भूमिका निभाती नजर आएंगी। अभिनेत्री का कहना है कि यह फिल्म उन्होंने काफी पहले पूरी कर ली थी, लेकिन एक स्वतंत्र फिल्म होने के कारण इसकी रिलीज में समय लगा।
‘रजनी की बारात’ से नई उम्मीदें
उल्का के अनुसार, फिल्म के निर्माताओं ने उनकी पिछली फिल्म की चर्चा और बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए अब रिलीज का समय उपयुक्त समझा। इस फिल्म में वह एक मजबूत और आत्मनिर्भर महिला का किरदार निभा रही हैं। अभिनेत्री मानती हैं कि उनके करियर में अक्सर ऐसे किरदार आए हैं जो साहसी और निडर महिलाओं को दर्शाते हैं।
उनका कहना है कि शायद उनके व्यक्तित्व में कुछ ऐसा है जो निर्देशकों को मजबूत महिला पात्रों के लिए आकर्षित करता है। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे किरदार निभाने में विशेष आनंद आता है क्योंकि ये भूमिकाएं महिलाओं की शक्ति और आत्मविश्वास को सामने लाती हैं।

नेपोटिज्म पर खुलकर बोलीं उल्का
अपने करियर के संघर्षों पर बात करते हुए उल्का ने स्वीकार किया कि इंडस्ट्री में किसी बड़े गॉडफादर या प्रभावशाली एजेंसी का समर्थन न होना कई बार मुश्किलें पैदा करता है। उन्होंने बताया कि The Kerala Story 2 के बाद उन्हें दो बड़े प्रोडक्शन हाउस से संपर्क किया गया था। उन्होंने ऑडिशन दिए, वर्कशॉप्स में हिस्सा लिया और निर्देशक की अपेक्षाओं पर खरी भी उतरीं। इसके बावजूद अंतिम समय में उन्हें प्रोजेक्ट से हटाकर एक स्टार किड को कास्ट कर लिया गया।
उल्का ने कहा कि यह अनुभव उनके लिए निराशाजनक था क्योंकि उन्होंने उन भूमिकाओं के लिए पूरी तैयारी की थी। उनके अनुसार, कई बार प्रतिभा और मेहनत के बावजूद उद्योग में पारिवारिक पृष्ठभूमि या बड़े नेटवर्क का प्रभाव निर्णायक साबित होता है।
प्रतिभा बनाम पहचान की बहस
उल्का का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारतीय फिल्म उद्योग में नेपोटिज्म को लेकर बहस लगातार जारी है। कई कलाकार पहले भी यह कह चुके हैं कि बिना फिल्मी परिवार या मजबूत इंडस्ट्री कनेक्शन के अवसर प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालांकि, दूसरी ओर कई निर्माता और निर्देशक यह तर्क देते हैं कि अंतिम चयन व्यावसायिक आवश्यकताओं, दर्शकों की अपेक्षाओं और बाजार की मांग के आधार पर किया जाता है।
उल्का का अनुभव इस बहस को एक नया दृष्टिकोण देता है, क्योंकि वह उन कलाकारों का प्रतिनिधित्व करती हैं जिन्होंने अपने दम पर पहचान बनाई है और फिर भी प्रतिस्पर्धा में अतिरिक्त चुनौतियों का सामना किया है। अपनी आगामी फिल्म के संदर्भ में उल्का ने अपनी निजी पसंद के बारे में भी खुलकर बात की। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि यदि मौका मिला तो वह भी फिल्म की नायिका रजनी की तरह अपनी बारात लेकर जाना पसंद करेंगी।










