Sanchita Basu: मां के सूट पहनकर बनाती थीं रील्स, आज ‘सान्विका’ बनकर जीत रहीं दर्शकों का दिल

Sanchita Basu Success Story: कभी मां के सूट पहनकर रील्स बनाने वाली संचित बसु आज ‘सान्विका’ के नाम से दर्शकों का दिल जीत रही हैं। जानें उनकी सफलता की कहानी

बिहार के भागलपुर की एक लड़की, जो कभी अपनी मां के सूट पहनकर 90 के दशक के गानों पर वीडियो बनाया करती थी, शायद उसने तब सोचा भी नहीं होगा कि एक दिन उसकी पहचान उसके असली नाम से ज्यादा उसके किरदार ‘सान्विका’ के नाम से होगी।

एंटरटेनमेंट न्यूज़: सोशल मीडिया पर छोटे-छोटे वीडियो बनाकर पहचान हासिल करने वाली संचिता बसु आज अभिनय की दुनिया में अपनी अलग जगह बनाने की कोशिश कर रही हैं। बिहार के भागलपुर से आने वाली संचिता को वेब सीरीज ‘ठुकरा के मेरा प्यार’ के सीजन 2 में सान्विका के किरदार के लिए दर्शकों का खूब प्यार मिल रहा है। हालांकि, अभिनय तक पहुंचने का उनका सफर अचानक शुरू हुआ था। 

कभी वह अपनी मां के सूट पहनकर 90 के दशक के गानों पर वीडियो बनाया करती थीं, लेकिन अब वह कैमरे के सामने अभिनय की बारीकियां सीख रही हैं। हाल ही में एक बातचीत के दौरान संचिता ने अपने शुरुआती दिनों, परिवार के सहयोग, संघर्ष और सान्विका के किरदार से मिले आत्मविश्वास के बारे में खुलकर बात की।

मां के कपड़े पहनकर बनाती थीं वीडियो

संचिता बसु ने बताया कि सोशल मीडिया के शुरुआती दिनों में उनकी मां उनके वीडियो शूट करने में मदद करती थीं। वह मां के पारंपरिक कपड़े पहनकर पुराने हिंदी गानों पर वीडियो बनाती थीं। लोगों को उनका यह अंदाज पसंद आने लगा और धीरे-धीरे ऐसे वीडियो बनाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया।संचिता के मुताबिक, जब वह नौवीं कक्षा में पढ़ती थीं, तब उनकी मां स्कूल से लौटने से पहले ही उनके लिए 1990 के दशक के गाने चुनकर रख देती थीं। घर पहुंचने के बाद वह मां के सूट पहनतीं और एक साथ 10 से 12 वीडियो तक शूट कर लेती थीं। उनके कमरे की खिड़की से आने वाली हवा और उड़ते बाल वीडियो का हिस्सा बन जाते थे।

उन्होंने बताया कि स्कूल में दिन कितना भी उबाऊ क्यों न रहा हो, घर लौटकर वीडियो बनाने का उत्साह हमेशा बना रहता था। उस समय उन्हें अंदाजा नहीं था कि यही शौक आगे चलकर उन्हें अभिनय की दुनिया तक पहुंचा देगा।

सोशल मीडिया से अभिनय तक का सफर

संचिता के करियर को आगे बढ़ाने में सोशल मीडिया की अहम भूमिका रही। उनके अनुसार, उन्हें पहला अभिनय प्रोजेक्ट ‘फिल्म फर्स्ट डे फर्स्ट शो’ भी सोशल मीडिया के जरिए मिला। हालांकि, वह मानती हैं कि गानों पर लिप-सिंक करना और किसी किरदार को पर्दे पर जीवंत करना दो अलग-अलग चीजें हैं। एक अभिनेत्री के तौर पर वह अपनी आवाज, भावनाओं और संवादों के जरिए दर्शकों तक किरदार की अनुभूति पहुंचाना सीख रही हैं। 

अपने अभिनय को बेहतर बनाने के लिए वह फिल्में देखती हैं, अखबार पढ़ती हैं और अनुभवी कलाकारों से सीखने की कोशिश करती हैं। थिएटर से जुड़े लोगों के साथ काम करने से भी उन्हें काफी कुछ सीखने का अवसर मिला है। संचिता का कहना है कि उनकी इच्छा है कि लोग उन्हें सिर्फ सोशल मीडिया स्टार के रूप में नहीं, बल्कि एक अच्छी अभिनेत्री के तौर पर भी पहचानें।

‘सान्विका’ के किरदार ने दिया नया आत्मविश्वास

‘ठुकरा के मेरा प्यार’ में सान्विका का किरदार संचिता के लिए खास साबित हुआ है। उन्होंने बताया कि वास्तविक जीवन में वह अपने किरदार से काफी अलग हैं। संचिता स्वभाव से शांत हैं और कई बार अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त करने के बजाय अकेले में उन्हें संभालना पसंद करती हैं। इसके विपरीत, सान्विका बेबाक, आत्मविश्वासी और जिद्दी स्वभाव की है।

संचिता के अनुसार, इस किरदार ने उन्हें खुद के भीतर एक नई ताकत पहचानने में मदद की। अब कई लोग उन्हें उनके वास्तविक नाम के बजाय सान्विका कहकर बुलाते हैं। उनके लिए यह इस बात का संकेत है कि दर्शकों ने उनके किरदार को अपनाया है। इस सीरीज की शूटिंग के दौरान उन्हें कॉलेज लाइफ का अनुभव करने का मौका भी मिला। 12वीं तक गर्ल्स कॉलेज में पढ़ाई करने के बाद अभिनय के काम में व्यस्तता के कारण उनका नियमित कॉलेज जाना प्रभावित हुआ। उन्होंने बताया कि वह अपनी ग्रेजुएशन की अंतिम वर्ष की परीक्षा देने की तैयारी भी कर रही हैं।

बाइक चलाना सीखा, कई बार गिरीं भी

सान्विका के किरदार को निभाने के लिए संचिता को बाइक चलाना भी सीखना पड़ा। उन्होंने बताया कि शूटिंग के दौरान बाइक चलाते समय कई बार गिरने के कारण उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा। एक खास दृश्य की शूटिंग में उन्हें ढलान पर बाइक चढ़ानी थी। इस सीन के लिए लगातार चार टेक देने के बावजूद वह शॉट पूरा नहीं कर पाईं और काफी घबरा गईं। 

आखिरकार पांचवें टेक में दृश्य सही तरीके से शूट हो सका। यह अनुभव उनके लिए चुनौतीपूर्ण था, लेकिन इससे उन्हें अपने किरदार के लिए मेहनत करने का महत्व भी समझ आया।

परिवार का सपना और पिता को गर्व महसूस कराने की चाह

संचिता अपने परिवार को अपनी सफलता का अहम हिस्सा मानती हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता सुरेंद्र चाहते थे कि वह सिविल सेवा में जाएं, जबकि उनकी मां बीना की इच्छा थी कि वह डॉक्टर बनें। लेकिन सोशल मीडिया पर मिलने वाली लोकप्रियता और अभिनय के अवसरों ने उन्हें एक अलग रास्ते पर आगे बढ़ाया।

उन्होंने अपने नाम के साथ ‘बसु’ जोड़ने के पीछे भी माता-पिता के प्रति अपने प्यार को वजह बताया। संचिता के लिए सबसे भावुक पल वह था, जब पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने पिता की आंखों में खुशी के आंसू देखे। वह चाहती हैं कि उनका काम हमेशा उनके परिवार को गर्व महसूस कराए।

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