UPSC Success: वाराणसी की रिया सैनी ने तीसरे प्रयास में IAS का सफर पूरा किया

मुजफ्फरनगर की रिया सैनी ने UPSC 2024 में 22वीं रैंक हासिल कर IAS बनीं। समाजशास्त्र ऑप्शनल, मॉक टेस्ट और मेहनत से सफलता मिली।

रिया सैनी ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2024 में तीसरे प्रयास में 22वीं रैंक हासिल कर IAS बनने का सपना पूरा किया। शुरुआती असफलताओं के बावजूद उनकी मेहनत, सही रणनीति और निरंतर अभ्यास ने सफलता दिलाई। समाजशास्त्र ऑप्शनल, मॉक टेस्ट और स्पष्ट उत्तर लेखन उनकी तैयारी की प्रमुख रणनीतियां रहीं।

UPSC Success Story: मुजफ्फरनगर की रिया सैनी ने तीसरे प्रयास में UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2024 में 22वीं रैंक हासिल कर IAS बनने का सपना साकार किया। शुरुआती प्रीलिम्स में असफल होने के बाद उन्होंने परिवार और खुद की मेहनत के बल पर तैयारी जारी रखी। सीमित संसाधनों, समाजशास्त्र ऑप्शनल और मॉक टेस्ट अभ्यास के साथ उन्होंने लगातार सुधार किया, जिससे सफलता मिली। उनकी कहानी नए उम्मीदवारों के लिए प्रेरणास्रोत है।

शिक्षा और परिवार का आधार

रिया का परिवार शिक्षा और अनुशासन से जुड़ा रहा है। उनके पिता मुकेश सैनी मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस में डायरेक्टर हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। रिया ने 10वीं और 12वीं में उत्कृष्ट अंक प्राप्त किए और जेपी इंस्टीट्यूट, नोएडा से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में बीटेक किया। फाइनल ईयर में ही उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की और इसके लिए रणनीति तैयार की।

उनकी मजबूत शिक्षा और परिवार का समर्थन उनके आत्मविश्वास और निरंतर मेहनत का आधार बना। यह दिखाता है कि सही शिक्षा और पारिवारिक सहयोग किसी भी छात्र की सफलता में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

तैयारी की रणनीति और ऑप्शनल सब्जेक्ट

रिया ने समाजशास्त्र को अपना ऑप्शनल सब्जेक्ट चुना। वह रोजाना 7-8 घंटे पढ़ाई करती थीं और सीमित संसाधनों पर ध्यान देती थीं। उन्होंने बेसिक किताबों जैसे लक्ष्मीकांत, एनसीईआरटी और स्पेक्ट्रम को बार-बार पढ़ने पर जोर दिया।

प्रैक्टिकल रणनीति में रिया ने मॉक टेस्ट की अहमियत समझी। शुरुआती डर के बाद उन्होंने इसे नियमित अभ्यास का हिस्सा बनाया, जिससे उनकी कमजोरियों का पता चला और सुधार संभव हुआ।

प्रीलिम्स और मेन्स की तैयारी के टिप्स

रिया के अनुसार प्रीलिम्स पास करने के लिए अधिक मॉक टेस्ट जरूरी हैं। मेन्स के लिए उन्होंने सलाह दी कि सिलेबस पूरा करने के बाद ही आंसर राइटिंग शुरू करें और पिछले वर्षों के प्रश्नों की प्रैक्टिस करें।

इसके अलावा, उन्होंने सरल और स्पष्ट भाषा में उत्तर लिखने की अहमियत बताई। जटिल थ्योरी और जरूरत से ज्यादा लिखने से बचने का संदेश दिया। रिया की ये रणनीति अन्य उम्मीदवारों के लिए भी मार्गदर्शन साबित हो सकती है।

सफलता का संदेश

रिया सैनी की कहानी यह सिखाती है कि असफलता अंत नहीं, बल्कि सुधार का अवसर है। सही रणनीति, निरंतर प्रैक्टिस और सीमित संसाधनों में भी लगातार मेहनत से कोई भी उम्मीदवार अपने लक्ष्य तक पहुंच सकता है।

उनकी उपलब्धि नए उम्मीदवारों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, विशेषकर उन छात्रों के लिए जो प्रारंभिक असफलताओं से निराश हो जाते हैं।

Leave a comment