अमेरिका-ईरान तनाव: चाबहार पोर्ट के कंट्रोल टावर को नुकसान, भारत के रणनीतिक हितों पर बढ़ी चिंता

अमेरिका - ईरान तनाव के बीच भारत के निवेश वाले चाबहार पोर्ट के कंट्रोल टावर को नुकसान पहुंचने की खबर। एयरस्ट्राइक, होर्मुज संकट और तेल बाजार पर असर जारी।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारतीय निवेश वाले ईरान के चाबहार पोर्ट को नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई है। अमेरिकी हमलों में पोर्ट के कंट्रोल टावर के प्रभावित होने का दावा किया गया है। मामले पर वैश्विक नजर बनी हुई है।

ईरान/अमेरिका वॉर: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव ने एक नया मोड़ ले लिया है। लगातार छठी रात ईरान पर अमेरिकी एयरस्ट्राइक के दौरान भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार पोर्ट को नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, हमले में बंदरगाह के कंट्रोल टावर को नुकसान पहुंचा है। चाबहार पोर्ट भारत के लिए बेहद अहम परियोजना है, क्योंकि इसके माध्यम से भारत पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक व्यापारिक पहुंच बनाता है। इस घटना के बाद भारत के रणनीतिक और आर्थिक हितों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।

अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों को बनाया निशाना

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। इन अभियानों में फाइटर जेट, ड्रोन और युद्धपोतों का इस्तेमाल किया गया।

अमेरिकी सेना ने दावा किया कि हमलों में ईरान के तटीय निगरानी केंद्रों, एयर डिफेंस सिस्टम, सैन्य लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और समुद्री सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चाबहार के कंट्रोल टावर की क्षतिग्रस्त तस्वीर साझा की। इसके बाद ईरानी मीडिया ने भी पोर्ट पर हमले की पुष्टि की।

चाबहार पोर्ट क्यों है भारत के लिए महत्वपूर्ण?

ईरान का चाबहार बंदरगाह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक परियोजना है। भारत ने इसके विकास में निवेश किया है और इसके संचालन की जिम्मेदारी भारतीय कंपनी इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) संभाल रही है।

यह बंदरगाह भारत को पाकिस्तान के रास्ते का इस्तेमाल किए बिना अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों तक पहुंच प्रदान करता है। इसके अलावा चाबहार को क्षेत्रीय व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और भू-राजनीतिक रणनीति के लिहाज से भी अहम माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी सैन्य संघर्ष में चाबहार जैसी परियोजनाओं को नुकसान पहुंचना क्षेत्रीय व्यापार और कनेक्टिविटी पर असर डाल सकता है।

चाबहार कंट्रोल टावर पर तीसरे हमले का दावा

रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह में चाबहार पोर्ट के कंट्रोल टावर पर यह तीसरा हमला बताया जा रहा है। ईरानी मीडिया एजेंसी मेहर ने पोर्ट पर हमले की जानकारी दी है। हालांकि ईरानी अधिकारियों ने कंट्रोल टावर को हुए नुकसान पर विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है। बताया जा रहा है कि यह टावर बंदरगाह पर आने-जाने वाले व्यावसायिक जहाजों की निगरानी और संचालन व्यवस्था से जुड़ा हुआ था।

ईरान की अमेरिका को चेतावनी

अमेरिकी हमलों के बीच ईरान की ओर से भी कड़े बयान सामने आए हैं। ईरानी सांसद बेहनाम सईदी ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने ईरान में जमीनी सैन्य कार्रवाई शुरू की, तो अमेरिकी सैनिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। ईरान ने क्षेत्रीय सहयोगियों को भी सक्रिय रहने का संकेत दिया है। ईरानी अधिकारियों ने कथित तौर पर यमन के हूती विद्रोहियों से कहा है कि यदि अमेरिका ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमला करता है तो बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को लेकर कदम उठाए जा सकते हैं।

होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा तनाव

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट पर भी दिखाई दे रहा है।समुद्री डेटा कंपनी केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को केवल नौ जहाजों ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया, जबकि इससे पहले यह संख्या 13 थी। होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है।

अमेरिका-ईरान तनाव: चाबहार पोर्ट के कंट्रोल टावर को नुकसान, भारत के रणनीतिक हितों पर बढ़ी चिंता

भारत ने होर्मुज को लेकर उठाया कदम

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच भारत सरकार ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कुछ जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती फिलहाल रोकने के निर्देश दिए हैं। यह कदम क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए उठाया गया है। भारत लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और अपने नागरिकों तथा व्यापारिक हितों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है।

कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमले का दावा

ईरान ने दावा किया है कि उसने कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए ड्रोन हमले किए हैं। ईरानी सेना ने इसे अपने सैन्य अभियान का हिस्सा बताया है। हालांकि अमेरिकी पक्ष की ओर से इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

ईरान-ट्रंप वार्ता को लेकर नया विवाद

इस बीच ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ईरान का दावा है कि दोनों ने अमेरिका-ईरान वार्ता से जुड़ी कथित गोपनीय जानकारी का इस्तेमाल कर शेयर बाजार में भारी लाभ कमाया। ईरान ने इस कथित मुनाफे का आधा हिस्सा वापस करने की मांग की है। हालांकि ट्रंप प्रशासन ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ये आरोप निराधार हैं।

कच्चे तेल की कीमतों पर असर

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। ब्रेंट क्रूड ऑयल 85 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड भी 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। निवेशकों को आशंका है कि यदि संघर्ष और बढ़ता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

ट्रंप का दावा- अमेरिका बड़ी बढ़त पर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान में अमेरिका बड़ी सफलता की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका और उसके सहयोगी अपनी रणनीति में आगे हैं। हालांकि ईरान की ओर से लगातार जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी जा रही है।

 

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