इलाहाबाद हाईकोर्ट में यूपी पंचायत चुनाव समय पर कराने की मांग वाली याचिका पर आज सुनवाई होगी। कोर्ट पहले ही कार्यकाल सीमा पर टिप्पणी कर चुका है, और अब चुनाव प्रक्रिया समयबद्ध कराने की संभावना पर विचार होगा।
Lucknow: यूपी पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में आज अहम सुनवाई होगी, जिसमें समय पर चुनाव कराने की मांग पर विचार किया जाएगा। इससे पहले कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 243E के तहत पंचायतों के तय पांच साल के कार्यकाल का हवाला देते हुए राज्य निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा था। अब कोर्ट यह तय करेगा कि मौजूदा परिस्थितियों में निर्धारित समयसीमा के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी कराना संभव है या नहीं।
पंचायत चुनाव पर आज अहम सुनवाई, हाईकोर्ट में मामला सूचीबद्ध

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर कराए जाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर आज इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। इस मामले में अब तक तीन बार सुनवाई टल चुकी है, जिससे इसकी अहमियत और बढ़ गई है। पिछली सुनवाई 13 मार्च को हुई थी, जिसमें कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा था।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि संविधान के अनुच्छेद 243(ई) के तहत पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता। ऐसे में समय पर चुनाव कराना संवैधानिक आवश्यकता है, जिस पर आज की सुनवाई में महत्वपूर्ण निर्णय की उम्मीद जताई जा रही है।
निर्वाचन आयोग से मांगा गया हलफनामा
कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया था कि वह हलफनामा दाखिल कर बताए कि मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद निर्धारित समयसीमा में चुनाव प्रक्रिया पूरी कराना संभव है या नहीं। विशेष रूप से 15 अप्रैल से 26 मई के बीच चुनाव संपन्न कराने की व्यवहारिकता पर जवाब मांगा गया है।
इस मामले की सुनवाई जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस गरिमा प्रसाद की डिवीजन बेंच कर रही है। कोर्ट यह भी देखेगा कि मौजूदा परिस्थितियों में चुनाव कराना प्रशासनिक रूप से कितना संभव है।
समय पर चुनाव न होने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर असर
याचिका अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन की ओर से दायर की गई है, जिसमें त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव समय पर कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही चुनाव कराए जाने चाहिए।
याचिका में यह भी कहा गया है कि चुनाव में देरी होने से स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होगी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया कमजोर पड़ सकती है। इसी आधार पर कोर्ट से हस्तक्षेप कर समयबद्ध चुनाव सुनिश्चित कराने की मांग की गई है।









