चार हजार करोड़ से 1.11 लाख करोड़ पहुंचा उत्तराखंड का बजट, जागरण विमर्श में बोले CM धामी

जागरण विमर्श में CM धामी ने कहा कि उत्तराखंड का बजट करीब 4 हजार करोड़ से बढ़कर 1.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। विकास की प्राथमिकताओं पर भी चर्चा हुई।
चार हजार करोड़ से 1.11 लाख करोड़ पहुंचा उत्तराखंड का बजट, जागरण विमर्श में बोले CM धामी
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को हल्द्वानी में आयोजित दैनिक जागरण के विशेष कार्यक्रम ‘जागरण विमर्श’ में प्रदेश के विकास, आर्थिक प्रगति, पर्यटन, उद्योग, स्वास्थ्य और भविष्य की चुनौतियों पर विस्तार से बात की। ‘उत्तराखंड : आशाएं और चुनौतियां’ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राज्य के गठन के बाद से अब तक हुए आर्थिक विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस उत्तराखंड का बजट राज्य गठन के शुरुआती दौर में करीब चार हजार करोड़ रुपये था, वह अब बढ़कर 1.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का बजट 1,11,703.23 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है।

हल्द्वानी के नैनीताल रोड स्थित होटल आइटीसी फॉर्च्यून में आयोजित जागरण विमर्श का उद्देश्य उत्तराखंड की विकास यात्रा के साथ प्रदेश के सामने मौजूद चुनौतियों पर चर्चा करना था। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के अलावा मंत्री और अधिकारी भी अलग-अलग सत्रों में शामिल हुए। स्वास्थ्य, उद्योग, पर्यटन और विकास जैसे विषयों पर विशेषज्ञों तथा जिम्मेदार लोगों ने विचार रखे। उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री धामी ने प्रदेश की प्रगति, सरकार की प्राथमिकताओं और आने वाले समय में उत्तराखंड के विकास की दिशा पर अपनी बात रखी।

मुख्यमंत्री के मुताबिक उत्तराखंड ने राज्य गठन के बाद आर्थिक स्तर पर लंबी दूरी तय की है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य गठन के समय उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का आकार करीब 14,500 करोड़ रुपये था, जो अब लगभग 3.81 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। सरकार के अनुसार प्रति व्यक्ति आय भी वर्ष 2000-01 के 15,285 रुपये से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 में अनुमानित 2,73,921 रुपये हो गई है। धामी ने इन आंकड़ों को राज्य की आर्थिक प्रगति से जोड़ते हुए कहा कि विकास की गति को आगे भी बनाए रखने के लिए बुनियादी ढांचे और रोजगार के अवसरों को मजबूत करना जरूरी है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पेश किए गए बजट का कुल आकार 1,11,703.23 करोड़ रुपये है। सरकार के मुताबिक यह पिछले बजट की तुलना में करीब 11.41 प्रतिशत अधिक है। बजट में राजस्व और पूंजीगत व्यय दोनों के लिए प्रावधान किया गया है। सरकारी सूचना के अनुसार कुल बजट में 64,989 करोड़ रुपये राजस्व व्यय और 18,153 करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय का प्रावधान है।

धामी सरकार ने बजट को गरीब, युवा, किसान और महिलाओं पर केंद्रित बताया है। मुख्यमंत्री ने इसे राज्य के समग्र विकास और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया रोडमैप बताया है। सरकार का कहना है कि बजट में विकास के साथ उत्तराखंड की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को भी महत्व दिया गया है। इसके साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यटन, रोजगार और बुनियादी ढांचे से जुड़े क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

बजट में अनुसूचित जाति के विकास से जुड़ी योजनाओं के लिए 2,400 करोड़ रुपये और अनुसूचित जनजातियों की योजनाओं के लिए 746.75 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं के लिए 98 करोड़ रुपये रखे गए हैं। अटल आयुष्मान योजना के लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार की ओर से खाद्यान्न योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए भी बजट में राशि रखी गई है।

मुख्यमंत्री ने राज्य की वित्तीय स्थिति का उल्लेख करते हुए वित्तीय अनुशासन पर भी जोर दिया। उत्तराखंड सरकार के अनुसार राज्य ने राजस्व अधिशेष बनाए रखा है और राजकोषीय घाटे को जीएसडीपी के तीन प्रतिशत के भीतर रखने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार इसे वित्तीय प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण मानती है। वहीं बजट के स्वतंत्र विश्लेषण में भी राज्य की राजकोषीय स्थिति और व्यय संरचना को अलग-अलग मानकों पर देखा गया है। PRS Legislative Research के अनुसार 2026-27 में ऋण चुकौती को छोड़कर कुल व्यय करीब 83,543 करोड़ रुपये अनुमानित है।

जागरण विमर्श में उत्तराखंड के लिए केवल बजट बढ़ने को ही विकास का पैमाना नहीं माना गया, बल्कि इस बात पर भी चर्चा हुई कि बढ़ते बजट का लाभ राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों और आबादी तक कैसे पहुंचे। पहाड़ी जिलों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की उपलब्धता लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दे रहे हैं। ऐसे में राज्य के आर्थिक विस्तार के साथ क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखना भी सरकार के सामने प्रमुख चुनौती है।

उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में पर्यटन का विशेष महत्व है। चारधाम यात्रा, धार्मिक पर्यटन, साहसिक पर्यटन और प्राकृतिक स्थलों पर बढ़ती आवाजाही से स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार के अवसर पैदा होते हैं। लेकिन बढ़ते पर्यटक दबाव के साथ सड़क सुरक्षा, पार्किंग, कचरा प्रबंधन, जल संसाधन और पर्यावरण संरक्षण जैसी चुनौतियां भी सामने आती हैं। जागरण विमर्श में प्रदेश की विकास प्राथमिकताओं पर चर्चा के दौरान पर्यटन को भी महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में शामिल किया गया।

औद्योगिक विकास भी उत्तराखंड के आर्थिक भविष्य से जुड़ा एक अहम विषय है। पहाड़ी राज्य होने के कारण यहां औद्योगिक विस्तार की अपनी भौगोलिक सीमाएं हैं, लेकिन मैदानी क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश, लॉजिस्टिक्स, सेवा क्षेत्र और नए रोजगार के अवसर बढ़ाने की संभावनाओं पर लगातार जोर दिया जा रहा है। सरकार के लिए चुनौती यह भी है कि उद्योगों के विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय हितों को कैसे बनाए रखा जाए।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी उत्तराखंड के सामने भौगोलिक परिस्थितियां बड़ी चुनौती हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में दूर-दराज के गांवों से मरीजों को अस्पताल तक पहुंचने में समय लगता है। ऐसे में जिला अस्पतालों को मजबूत करना, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाना और टेलीमेडिसिन जैसी सुविधाओं का विस्तार महत्वपूर्ण हो सकता है। जागरण विमर्श के अलग-अलग सत्रों में स्वास्थ्य को भी प्रदेश के विकास से जुड़े प्रमुख मुद्दों में शामिल किया गया।

शिक्षा और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना भी राज्य की विकास नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उत्तराखंड के कई युवा रोजगार और उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों का रुख करते हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर कौशल विकास, उद्योग आधारित प्रशिक्षण, पर्यटन, आईटी, स्टार्टअप और स्वरोजगार के अवसर पैदा करना राज्य के लिए अहम माना जाता है। बजट में युवा और रोजगार से जुड़े कार्यक्रमों को प्राथमिकता दिए जाने की बात सरकार ने कही है।

उत्तराखंड की विकास यात्रा में प्राकृतिक आपदाएं भी एक बड़ी चुनौती हैं। भूस्खलन, बादल फटना, अतिवृष्टि और सड़क संपर्क बाधित होने जैसी घटनाएं पर्वतीय जिलों में सामान्य जनजीवन और विकास कार्यों को प्रभावित करती हैं। ऐसे में सड़क और भवन निर्माण के साथ आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे पर ध्यान देना जरूरी है। विकास परियोजनाओं के साथ पर्यावरणीय संवेदनशीलता का संतुलन भी प्रदेश के लिए लगातार महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।

मुख्यमंत्री धामी ने राज्य गठन के बाद हुए बदलावों को रेखांकित करते हुए यह संदेश दिया कि उत्तराखंड अब आर्थिक रूप से पहले की तुलना में काफी बड़ा हो चुका है। चार हजार करोड़ रुपये के आसपास के शुरुआती बजट से 1.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक के बजट तक पहुंचना राज्य के वित्तीय आकार में बड़े विस्तार को दर्शाता है। हालांकि बजट का आकार बढ़ने के साथ योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, रोजगार सृजन, क्षेत्रीय संतुलन और पहाड़ी क्षेत्रों तक विकास का लाभ पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण रहेगा।

जागरण विमर्श में चर्चा का व्यापक उद्देश्य यही रहा कि उत्तराखंड की अब तक की उपलब्धियों के साथ आने वाले वर्षों की चुनौतियों पर भी गंभीरता से विचार किया जाए। मुख्यमंत्री और अन्य वक्ताओं ने प्रदेश के विकास की संभावनाओं, स्वास्थ्य, उद्योग और पर्यटन जैसे क्षेत्रों पर चर्चा की। कार्यक्रम ने सरकार, विशेषज्ञों और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद के लिए एक मंच उपलब्ध कराया।

उत्तराखंड का बजट अब एक लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है और राज्य की अर्थव्यवस्था भी गठन के समय की तुलना में कई गुना बड़ी हो गई है। ऐसे में आगे की दिशा केवल बजट बढ़ाने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि उपलब्ध संसाधनों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पर्यटन, बुनियादी ढांचे और पहाड़ी क्षेत्रों के संतुलित विकास में प्रभावी ढंग से लगाने पर निर्भर करेगी। जागरण विमर्श में मुख्यमंत्री धामी की ओर से रखी गई विकास यात्रा की तस्वीर इसी बदलाव और आने वाली चुनौतियों के बीच उत्तराखंड की अगली दिशा को सामने रखती है।

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