देहरादून में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जहां हर साल करीब तीन लाख नए वाहन पंजीकृत हो रहे हैं। बढ़ते पर्यटन, शहरीकरण और चारधाम यात्रा के कारण राज्य में पेट्रोल-डीजल की खपत 1800 मिलियन लीटर सालाना पहुंच गई है।
देहरादून :पर्वतीय राज्य उत्तराखंड में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे पेट्रोल और डीजल की खपत भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही है। पर्यटन, चारधाम यात्रा और शहरीकरण के चलते राज्य में हर साल करीब तीन लाख नए वाहन सड़कों पर उतर रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड में सालाना करीब 1800 मिलियन लीटर ईंधन की खपत हो रही है, जो अन्य हिमालयी राज्यों की तुलना में काफी ज्यादा है।
हर महीने बढ़ रही पेट्रोल-डीजल की खपत
उत्तराखंड में इस समय हर महीने करीब 60 हजार किलोलीटर पेट्रोल और 90 हजार किलोलीटर डीजल की खपत हो रही है। सालभर में यह आंकड़ा लगभग 1800 मिलियन लीटर तक पहुंच जाता है।
बीते एक साल के मुकाबले पेट्रोल की खपत में दो प्रतिशत और डीजल की खपत में छह प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे साफ है कि राज्य में ईंधन पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है।
25 साल में कई गुना बढ़े वाहन
राज्य गठन के बाद उत्तराखंड में वाहनों की बिक्री में तेजी आई है। वर्ष 2000-01 में जहां पूरे साल में करीब 11 हजार वाहन बिकते थे, वहीं अब हर साल लगभग तीन लाख नए वाहन पंजीकृत हो रहे हैं।
वर्ष 2000 से 2025 के बीच राज्य में करीब 40 लाख वाहनों का पंजीकरण हुआ है। देहरादून में सबसे ज्यादा वाहन खरीदे गए हैं, जबकि हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, हल्द्वानी और काशीपुर जैसे शहरों में भी वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
पर्यटन और चारधाम यात्रा का असर
राज्य में पर्यटन गतिविधियों और चारधाम यात्रा के दौरान बाहर से आने वाले वाहनों की संख्या भी काफी अधिक रहती है। इसी वजह से पेट्रोल और डीजल की मांग लगातार बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती ईंधन खपत पर्यावरण और ट्रैफिक दोनों के लिए चुनौती बन सकती है। ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहनों और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की जरूरत महसूस की जा रही है।
राज्य में 978 पेट्रोल पंप सक्रिय
उत्तराखंड में इस समय कुल 978 पेट्रोल पंपों के माध्यम से ईंधन की बिक्री हो रही है। इनमें इंडियन ऑयल के 431, भारत पेट्रोलियम के 214 और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के 254 पेट्रोल पंप शामिल हैं।
सरकार की ओर से लोगों को ईंधन की बचत और वैकल्पिक परिवहन अपनाने के लिए जागरूक भी किया जा रहा है।









