उत्तराखंड में अक्टूबर के पहले सप्ताह में ही मौसम ने सर्दियों का एहसास कराना शुरू कर दिया है। मानसून की विदाई के बाद भी प्रदेश के पर्वतीय इलाकों में रुक-रुककर बारिश हो रही है, जबकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी से ठंड बढ़ गई है। चमोली जिले में स्थित सिखों के पवित्र तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब और पिथौरागढ़ की ऊंची चोटियों पर ताजा बर्फबारी हुई है। मौसम में अचानक आए बदलाव का असर तीर्थयात्रियों की आवाजाही पर भी पड़ा है। हेमकुंड साहिब जाने वाले करीब 400 यात्रियों को सुरक्षा के मद्देनजर घांघरिया में रोक दिया गया। वहीं, बारिश के कारण बदरीनाथ हाईवे पागलनाला के पास बाधित हो गया, जिससे दोनों ओर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।
प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद आमतौर पर मौसम साफ होने की उम्मीद रहती है, लेकिन इस बार अक्टूबर की शुरुआत में ही बारिश और बर्फबारी के दौर देखने को मिल रहे हैं। उच्च और मध्य हिमालयी क्षेत्रों में महीने के पहले सप्ताह के दौरान दो बार वर्षा हो चुकी है। इसके चलते पहाड़ों में तापमान गिरने लगा है और सुबह-शाम ठंड का असर बढ़ गया है। मैदानी और तराई वाले इलाकों में भी तापमान सामान्य से नीचे दर्ज किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, तराई क्षेत्र में तापमान सामान्य से करीब दो डिग्री कम होकर 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है।
हेमकुंड साहिब में बर्फबारी के बाद यात्रा मार्ग पर आवाजाही को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। ऊंचाई पर स्थित इस तीर्थस्थल तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को कठिन पहाड़ी रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। ऐसे में बर्फ जमने, रास्ते पर फिसलन बढ़ने और मौसम के तेजी से बदलने से यात्रियों के लिए जोखिम पैदा हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन और संबंधित व्यवस्थाओं ने यात्रियों को आगे बढ़ने से रोकने का निर्णय लिया। करीब 400 श्रद्धालु घांघरिया में रुके हुए हैं, जो हेमकुंड साहिब यात्रा का प्रमुख पड़ाव और बेस कैंप है।
जानकारी के अनुसार, कालाकोटी से हेमकुंड साहिब तक के रास्ते में बर्फबारी हो रही है। इस वजह से घांघरिया से आगे यात्रियों की आवाजाही रोक दी गई। मौसम की स्थिति में सुधार और मार्ग सुरक्षित होने के बाद ही आगे जाने की अनुमति दिए जाने की संभावना है। पहाड़ी इलाकों में मौसम का मिजाज तेजी से बदल सकता है, इसलिए श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन के निर्देशों का पालन करना महत्वपूर्ण है। यात्रा पर निकले लोगों को बिना जानकारी लिए आगे बढ़ने से बचना चाहिए और स्थानीय अधिकारियों की ओर से जारी अपडेट पर ध्यान देना चाहिए।
हेमकुंड साहिब में यात्रा सीजन के समापन का समय भी नजदीक है। ऐसे में बर्फबारी से श्रद्धालुओं की आवाजाही और व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। तीर्थस्थल तक जाने वाला मार्ग ऊंचाई वाला और पैदल यात्रा पर आधारित है, इसलिए यहां मौसम का असर सामान्य सड़क यात्राओं की तुलना में अधिक गंभीर हो सकता है। बर्फबारी के दौरान रास्ते पर दृश्यता कम होने और फिसलन बढ़ने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इस कारण यात्रियों को रोकने का फैसला सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
उधर, बारिश के कारण बदरीनाथ हाईवे भी पागलनाला के पास बंद हो गया। हाईवे पर आवाजाही बाधित होने से दोनों तरफ वाहनों में सवार यात्रियों को रास्ता खुलने का इंतजार करना पड़ा। सड़क को फिर से खोलने का काम जारी बताया गया। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के दौरान भूस्खलन और मलबा आने की आशंका बनी रहती है, जिससे सड़क यातायात प्रभावित हो सकता है। बदरीनाथ धाम जाने वाले यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए हाईवे का सुचारु रहना बेहद जरूरी है, क्योंकि यही मार्ग क्षेत्र की प्रमुख आवाजाही का माध्यम है।
मौसम विभाग ने भी प्रदेश के कुछ जिलों के लिए बारिश को लेकर चेतावनी जारी की। शुक्रवार को देहरादून, नैनीताल और पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं भारी वर्षा की संभावना जताते हुए येलो अलर्ट जारी किया गया। इन जिलों के अनेक स्थानों पर और राज्य के अन्य क्षेत्रों में कुछ जगह हल्की से मध्यम बारिश होने की आशंका बताई गई। मौसम विभाग के अनुसार, 4200 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना भी बनी हुई है। इसके साथ ही कुछ स्थानों पर गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई गई।
अचानक बदले मौसम के कारण चारधाम और अन्य पर्वतीय तीर्थस्थलों की यात्रा करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। पहाड़ों में बारिश के बाद सड़क पर मलबा आने, रास्ते फिसलन भरे होने और तापमान तेजी से गिरने जैसी स्थितियां बन सकती हैं। यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले मार्ग की स्थिति और मौसम का ताजा अपडेट लेना चाहिए। खासकर हेमकुंड साहिब जाने वाले श्रद्धालुओं को घांघरिया से आगे बढ़ने से पहले प्रशासन की अनुमति और मार्ग की सुरक्षा संबंधी जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।
अक्टूबर के पहले सप्ताह में ही बर्फबारी और बारिश के कारण उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में ठंड बढ़ने लगी है। हेमकुंड साहिब में करीब 400 यात्रियों को रोके जाने और बदरीनाथ हाईवे बाधित होने से मौसम के असर का अंदाजा लगाया जा सकता है। फिलहाल यात्रियों की सुरक्षा, सड़क को दोबारा खोलने और मौसम में सुधार पर नजर रखी जा रही है।












