हरिद्वार अर्द्धकुंभ की तैयारियों के लिए आया 40 लाख का ड्रोन उड़ान भरते ही लापता, भूपतवाला में मिली आखिरी लोकेशन

हरिद्वार में अर्द्धकुंभ की मैपिंग के लिए आईआईटी रुड़की से मंगाया गया 40 लाख का ड्रोन उड़ान के बाद लापता हो गया। आखिरी लोकेशन भूपतवाला में मिली, पुलिस ने केस दर्ज किया।
हरिद्वार अर्द्धकुंभ की तैयारियों के लिए आया 40 लाख का ड्रोन उड़ान भरते ही लापता, भूपतवाला में मिली आखिरी लोकेशन
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हरिद्वार में वर्ष 2027 में होने वाले अर्द्धकुंभ मेले की तैयारियों के बीच करीब 40 लाख रुपये कीमत का एक हाईटेक ड्रोन लापता हो गया है। अर्द्धकुंभ से जुड़े मैपिंग और अन्य तकनीकी कार्यों के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की से यह ड्रोन हरिद्वार मंगाया गया था। लेकिन उड़ान भरने के बाद अचानक इसका पता नहीं चल पाया। काफी तलाश किए जाने के बावजूद जब ड्रोन नहीं मिला, तो मामले में हरिद्वार की शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया। पुलिस ने अब ड्रोन की तलाश शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, हरिद्वार में अर्द्धकुंभ की तैयारियों को व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न तकनीकी साधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। मेले के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए क्षेत्र की मैपिंग, व्यवस्थाओं की योजना बनाने और संबंधित कार्यों में आधुनिक तकनीक की मदद ली जा रही है। इसी सिलसिले में आईआईटी रुड़की से करीब 40 लाख रुपये कीमत का ड्रोन मंगाया गया था। यह उपकरण अर्द्धकुंभ से जुड़े कार्यों में इस्तेमाल किया जाना था, लेकिन उड़ान के बाद इसके लापता होने से संबंधित टीम के सामने परेशानी खड़ी हो गई।

बताया जा रहा है कि ड्रोन की आखिरी लोकेशन हरिद्वार के उत्तरी हिस्से में स्थित भूपतवाला क्षेत्र में मिली थी। इसके बाद ड्रोन की स्थिति का पता नहीं चल सका। संबंधित लोगों ने आसपास के संभावित इलाकों में उसकी तलाश की, लेकिन कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा। काफी प्रयासों के बाद भी ड्रोन नहीं मिलने पर पुलिस को सूचना दी गई और शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया।

ड्रोन के लापता होने के पीछे फिलहाल कोई निश्चित कारण सामने नहीं आया है। शुरुआती तौर पर आशंका जताई जा रही है कि ड्रोन उड़ान के दौरान जंगल में कहीं गिर गया हो सकता है। एक दूसरी संभावना यह भी है कि वह जंगल से सटे किसी रिहायशी इलाके में गिरा हो और वहां से किसी व्यक्ति ने उसे उठा लिया हो। हालांकि, ये केवल संभावनाएं हैं। ड्रोन के साथ वास्तव में क्या हुआ, इसकी पुष्टि जांच और बरामदगी के बाद ही हो सकेगी।

करीब 40 लाख रुपये कीमत वाले इस उपकरण की तलाश इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसे अर्द्धकुंभ की तैयारियों से जुड़े तकनीकी कामों के लिए मंगाया गया था। ऐसे महंगे उपकरण के लापता होने से न केवल आर्थिक नुकसान की आशंका है, बल्कि इससे जुड़े कार्यों पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ड्रोन के लापता रहने से मैपिंग या अर्द्धकुंभ की तैयारियों की समयसीमा पर कितना प्रभाव पड़ेगा।

पुलिस अब ड्रोन की आखिरी लोकेशन और आसपास के संभावित स्थानों के आधार पर मामले की जांच कर रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि उड़ान भरने के बाद ड्रोन किस दिशा में गया, उसका संपर्क कैसे टूटा और वह कहां गया। यदि ड्रोन किसी स्थान पर गिरा है, तो उसकी बरामदगी से घटना की परिस्थितियां स्पष्ट हो सकती हैं। वहीं, यदि वह किसी के कब्जे में है, तो जांच के जरिए उसके बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास किया जाएगा।

हरिद्वार में अर्द्धकुंभ 2027 को देखते हुए सड़क, घाट, यातायात, सुरक्षा और अन्य बुनियादी व्यवस्थाओं पर काम चल रहा है। मेले में श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुचारु बनाए रखने और विभिन्न क्षेत्रों की बेहतर योजना तैयार करने के लिए तकनीकी संसाधनों की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। ऐसे समय में मैपिंग के लिए लाया गया ड्रोन लापता होना संबंधित अधिकारियों और पुलिस के लिए एक नई चुनौती बन गया है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि करीब 40 लाख रुपये कीमत का यह ड्रोन कहां गया और उसकी गुमशुदगी के पीछे असल वजह क्या है।

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