Vaibhav Suryavanshi: एक शॉट को निखारने के लिए खेलते है हजारों गेंदें, IPL 2026 के बाद बना उभरता क्रिकेट स्टार

Vaibhav Suryavanshi ने अपनी मेहनत और समर्पण से क्रिकेट जगत में खास पहचान बनाई है। एक शॉट को परफेक्ट करने के लिए हजारों गेंदें खेलने वाले इस युवा खिलाड़ी

Vaibhav Suryavanshi के लिए समस्तीपुर से पटना तक का सफर उनके क्रिकेट करियर के शुरुआती दौर में बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। कोविड काल के दौरान उनके पिता संजीव सूर्यवंशी उन्हें सप्ताह में चार दिन समस्तीपुर से पटना लेकर जाते थे, जहां वे कोच Manish Ojha से प्रशिक्षण लेते थे।

स्पोर्ट्स न्यूज़: भारतीय क्रिकेट में तेजी से उभरते युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी आज देश के सबसे चर्चित टैलेंट में शामिल हो चुके हैं। आईपीएल 2026 में अपने दमदार प्रदर्शन के बाद उन्होंने सीनियर भारतीय टीम में भी जगह बना ली है। लेकिन इस सफलता के पीछे वर्षों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और परिवार का बड़ा त्याग छिपा हुआ है, जिसने उन्हें इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया।

समस्तीपुर से शुरू हुआ उनका क्रिकेट सफर आज वैश्विक मंच तक पहुंच चुका है, लेकिन इसकी नींव पटना की एक छोटी सी अकादमी में रखी गई थी, जहां एक-एक शॉट को परफेक्ट बनाने के लिए हजारों गेंदें खेली गईं।

समस्तीपुर से पटना तक का सफर बना टर्निंग पॉइंट

कोविड-19 महामारी के दौरान जब देशभर में खेल गतिविधियां सीमित थीं, तब भी वैभव का प्रशिक्षण लगातार जारी रहा। उनके पिता संजीव सूर्यवंशी हर हफ्ते चार दिन उन्हें समस्तीपुर से पटना लेकर जाते थे, जहां वह कोच मनीष ओझा के मार्गदर्शन में अभ्यास करते थे। इस दौरान सिर्फ वैभव ही नहीं, बल्कि समस्तीपुर से आए पांच अन्य गेंदबाज भी उनके अभ्यास का हिस्सा होते थे। 

हालांकि, प्राथमिक फोकस हमेशा वैभव की बल्लेबाजी पर ही रहता था। उनके पिता अक्सर मैदान के एक कोने में बैठकर पूरे अभ्यास को ध्यान से देखते थे, ताकि बेटे की प्रगति पर नजर रखी जा सके।

एक शॉट को बनाने के लिए हजारों गेंदों का अभ्यास

कोच मनीष ओझा ने जल्दी ही पहचान लिया कि वैभव को पुल, हुक और विशेष रूप से एरियल शॉट खेलने में असाधारण क्षमता है। इसी को मजबूत बनाने के लिए उन्होंने एक अनोखी ट्रेनिंग तकनीक अपनाई। अभ्यास सत्रों में गेंदबाजों को निर्देश दिया गया कि वैभव को लगातार एक ही शॉट के लिए 600 से लेकर 1000 गेंदें डाली जाएं। यह प्रक्रिया लंबे समय तक चलती रही।

इस अत्यधिक दोहराव वाले अभ्यास ने वैभव की तकनीक को इतना मजबूत कर दिया कि उनके शॉट्स उनकी मांसपेशियों की स्मृति (muscle memory) का हिस्सा बन गए। यही कारण है कि आज वह किसी भी गेंदबाज के खिलाफ आत्मविश्वास के साथ पुल और हुक शॉट खेल सकते हैं।

पिता का त्याग और आर्थिक संघर्ष

कोच मनीष ओझा के अनुसार, वैभव की सफलता में उनके पिता का योगदान सबसे अहम रहा है। कोविड के दौरान परिवार आर्थिक रूप से कठिन दौर से गुजर रहा था। संजीव सूर्यवंशी ने अपने बेटे के क्रिकेट प्रशिक्षण के लिए कई जगहों से कर्ज लिया, जो समय के साथ बढ़कर लगभग 25 से 50 लाख रुपये तक पहुंच गया। बावजूद इसके उन्होंने कभी भी अपने बेटे को इस आर्थिक दबाव का एहसास नहीं होने दिया।

उनकी प्राथमिकता सिर्फ एक ही थी—वैभव को बेहतर खिलाड़ी बनाना। बाद में जब वैभव का आईपीएल में चयन हुआ, तो परिवार ने इस कमाई से अपना अधिकांश कर्ज चुका दिया।

10 साल की उम्र में मैच-विनिंग पारी ने बदला भविष्य

कोच मनीष ओझा ने बताया कि कोविड के दौरान एक अभ्यास मैच में 10 साल के वैभव को बिना किसी तैयारी के सीधे मैदान पर उतारा गया था। उस मैच में विपक्षी टीम में रणजी और अंडर-23 स्तर के खिलाड़ी शामिल थे। इस चुनौतीपूर्ण मुकाबले में वैभव ने 93 गेंदों पर 118 रनों की शानदार पारी खेली, जिसमें 8 छक्के शामिल थे। सभी छक्के 75 मीटर से अधिक दूरी के थे, जिसने सभी को हैरान कर दिया।

इसी प्रदर्शन के बाद कोच ने कहा था कि यह बच्चा एक दिन भारत के लिए जरूर खेलेगा। आज वही भविष्यवाणी हकीकत बन चुकी है। आईपीएल 2026 में वैभव सूर्यवंशी के प्रदर्शन ने उन्हें भारतीय क्रिकेट चयनकर्ताओं की नजर में ला दिया। उनके आक्रामक लेकिन नियंत्रित बल्लेबाजी अंदाज ने उन्हें सीनियर भारतीय टीम में जगह दिलाई।

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