व्हाइटओक कैपिटल का सुझाव! भू-राजनीतिक तनाव में भावनाओं में आकर निवेश न करें, एसेट एलोकेशन पर दें ध्यान

व्हाइटओक कैपिटल का सुझाव! भू-राजनीतिक तनाव में भावनाओं में आकर निवेश न करें, एसेट एलोकेशन पर दें ध्यान

भू-राजनीतिक संकट और बाजार अस्थिरता के बीच, निवेशकों को पैनिक सेलिंग से बचना चाहिए। विशेषज्ञ कहते हैं कि तय एसेट एलोकेशन और अनुशासन में टिके रहने से लंबी अवधि में नुकसान कम और रिटर्न बेहतर रहता है।

बिज़नेस न्यूज़: भू-राजनीतिक संकट के बीच निवेशकों के लिए सबसे बड़ा खतरा सिर्फ बाजार की गिरावट नहीं बल्कि अपनी भावनाओं में आकर पैनिक सेलिंग करना है। व्हाइटओक कैपिटल म्युचुअल फंड की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे समय में सबसे सुरक्षित तरीका यह है कि निवेशक अपनी पहले से तय की हुई एसेट एलोकेशन स्ट्रैटेजी पर टिके रहें। 

रिपोर्ट का नाम है “जब दुनिया खतरनाक महसूस होती है: क्यों आपका पोर्टफोलियो घबराए नहीं”। इसमें बताया गया है कि बाजार में तेज उतार-चढ़ाव और डराने वाली खबरों के बावजूद लंबी अवधि में रिटर्न पर इसका असर सामान्यतः कम होता है। फंड हाउस का कहना है कि संकट के समय भावनाओं में आकर लिए गए निर्णय अक्सर निवेशकों के लिए वास्तविक आर्थिक संकट से ज्यादा नुकसानदेह साबित होते हैं।

एसेट एलोकेशन क्यों बनता है ढाल

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एसेट एलोकेशन बाजार के झटकों को झेलने के लिए एक ढाल की तरह काम करता है। अच्छी तरह से डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो में अनिश्चितता के समय सुरक्षा पहले से ही शामिल होती है। जब संकट आता है और बाजार गिरते हैं, तो आपके पोर्टफोलियो में इक्विटी का हिस्सा अपने आप प्रतिशत के हिसाब से कम हो जाता है, जबकि डेट और गोल्ड का हिस्सा बढ़ जाता है। इससे पोर्टफोलियो में संतुलन बना रहता है और लंबी अवधि में नुकसान कम होता है।

व्हाइटओक कैपिटल ने बताया कि भू-राजनीतिक झटके लंबे समय के निवेश रिटर्न को समाप्त नहीं करते। इसका असर सिर्फ अस्थायी होता है, लेकिन जो निवेशक अपने पोर्टफोलियो में अनुशासन बनाए रखते हैं, उनका प्रदर्शन अक्सर बेहतर रहता है।

एसेट एलोकेशन कैसे तय करें

रिपोर्ट में बताया गया है कि निवेशक अपना एसेट एलोकेशन अपने वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर तय करें, न कि भू-राजनीतिक हालात को देखकर। उदाहरण के लिए, एक मध्यम जोखिम उठाने वाले निवेशक के लिए 65% इक्विटी, 25% डेट और 10% गोल्ड का पोर्टफोलियो उपयुक्त माना गया है। इसके साथ रीबैलेंसिंग की सीमा तय करनी चाहिए, आमतौर पर ±5% तक। यदि बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण इक्विटी का हिस्सा 60% से नीचे गिर जाए या 70% से ऊपर चला जाए, तो पोर्टफोलियो को फिर से 65% के स्तर पर रीबैलेंस कर लेना चाहिए। इस तरह की रणनीति लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न देती है और जोखिम को कम करती है।

पैनिक सेलिंग से होता है वास्तविक नुकसान

रिपोर्ट के अनुसार, भू-राजनीतिक संकट के दौरान भावनाओं में आकर पैनिक सेलिंग करने वाले निवेशकों का प्रदर्शन अक्सर कमजोर रहता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वे असमय बाजार से बाहर निकल जाते हैं और फिर उच्च स्तर पर दोबारा निवेश करने में देर कर देते हैं। कई बार ऐसा होता है कि वे बाजार में लौट ही नहीं पाते। असल में, नुकसान खुद संकट से नहीं बल्कि उससे घबराकर दी गई प्रतिक्रिया से होता है।

पैनिक सेलिंग के तीन चरण

रिपोर्ट में तीन प्रमुख चरण बताए गए हैं जो निवेशक पैनिक सेलिंग के दौरान अनुभव करते हैं।

स्टेज 1: पैनिक सेल क्राइसिस

बाजार गिरने के तुरंत बाद निवेशक सोचते हैं कि हालात और खराब होंगे और इसलिए वे तुरंत इक्विटी बेच देते हैं। इसके बाद वे खुद को सुरक्षित महसूस करते हुए पैसा कैश या गोल्ड में लगाते हैं।

स्टेज 2: फ्रोजन वेट

बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहता है। कुछ दिन तेजी आती है तो कुछ दिन गिरावट। ऐसे समय में निवेशक दोबारा निवेश करने से पहले “स्पष्टता” का इंतजार करते हैं। हालांकि छोटी अवधि में स्पष्टता शायद ही कभी मिलती है। मीडिया और सुर्खियां डर पैदा करती रहती हैं।

स्टेज 3: पेनफुल मिस

जब बाजार निचले स्तर से 20%, 30% या 40% तक उछाल मारता है, तब भी निवेशक कैश में बैठे रहते हैं। अब बाजार में दोबारा निवेश करना महंगा लगता है। इस तरह वे न केवल नुकसान को लॉक कर लेते हैं बल्कि रिकवरी का मौका भी गंवा देते हैं।

वास्तविक उदाहरण: कोविड-19 महामारी

मार्च 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान कई निवेशकों ने घबराकर अपने सारे निवेश बेच दिए थे। उस समय कहा जा रहा था कि महामारी कई साल तक चलेगी और निफ्टी 50 5,000 तक गिर सकता है। लेकिन जनवरी 2021 में जब हालात अपेक्षाकृत सुरक्षित हुए और निवेशक दोबारा निवेश करना चाहते थे, तब निफ्टी 14,000 के करीब पहुंच चुका था। ऐसे में 2020 के निचले स्तर से लगभग 84% उछाल का अवसर केवल इसलिए खो गया क्योंकि निवेशक स्पष्टता का इंतजार करते रहे।

भू-राजनीतिक झटके अक्सर निवेशकों के मनोवैज्ञानिक झटकों के रूप में आते हैं। ये डर, अस्थिरता और नाटकीय सुर्खियां पैदा करते हैं। टीवी न्यूज और सोशल मीडिया पर लगातार खबरें देखकर निवेशक प्रभावित होते हैं और जल्दबाजी में फैसला लेते हैं। लेकिन ज्यादातर मामलों में ये संकट अर्थव्यवस्था की बुनियादी संरचना को नहीं तोड़ते।

लंबी अवधि में अनुशासन ही सबसे बड़ी ताकत

रिपोर्ट में जोर दिया गया है कि लंबी अवधि में निवेश में अनुशासन और धैर्य सबसे बड़ी ताकत है। पैनिक सेलिंग से बचने वाले निवेशक अक्सर अच्छे रिटर्न हासिल करते हैं। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशक बाजार की अस्थिरता को अवसर समझें, अपनी एसेट एलोकेशन बनाए रखें और भावनाओं में आकर जल्दबाजी से फैसले न लें।

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