उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने बुधवार को दिल्ली के भारत मंडपम से हर घर तिरंगा बाइक रैली को हरी झंडी दिखाई। कई सांसदों ने इसमें हिस्सा लिया। इस वर्ष अभियान स्वतंत्रता दिवस और राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर केंद्रित है।
नई दिल्ली: नई दिल्ली में बुधवार को ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत विशेष बाइक रैली का आयोजन किया गया। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने भारत मंडपम से इस रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस कार्यक्रम में कई सांसदों ने भी हिस्सा लिया और लोगों से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने घरों पर तिरंगा फहराने की अपील की।
इस वर्ष ‘हर घर तिरंगा 2026’ अभियान का आयोजन स्वतंत्रता दिवस के साथ राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर किया जा रहा है। संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित इस अभियान का उद्देश्य देशभर के नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज के साथ भावनात्मक रूप से जोड़ना और स्वतंत्रता आंदोलन के मूल्यों को याद करना है।
भारत मंडपम से निकली बाइक रैली
दिल्ली के भारत मंडपम से शुरू हुई बाइक रैली में सांसदों और अन्य प्रतिभागियों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। रैली के दौरान तिरंगा लहराते हुए प्रतिभागियों ने देश की एकता, अखंडता और राष्ट्र निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की।
कार्यक्रम में मौजूद नेताओं ने कहा कि तिरंगा केवल एक राष्ट्रीय ध्वज नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों नागरिकों की आकांक्षाओं, त्याग और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। स्वतंत्रता दिवस से पहले आयोजित इस कार्यक्रम के जरिए नागरिकों को ‘हर घर तिरंगा’ अभियान से जुड़ने का संदेश दिया गया।
उपराष्ट्रपति ने याद किया ‘वंदे मातरम्’ का इतिहास
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने को ऐतिहासिक अवसर बताया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम्’ ने लोगों के भीतर देशभक्ति की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम को भारतीय समाज के भीतर चेतना और जागरूकता का दौर बताया। उनके अनुसार, आजादी की लड़ाई ने अलग-अलग क्षेत्रों, भाषाओं, सामाजिक पृष्ठभूमियों और समुदायों के लोगों को एक साझा उद्देश्य के लिए एकजुट किया था।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन केवल औपनिवेशिक शासन से मुक्ति की लड़ाई नहीं था, बल्कि भारतीय समाज के भीतर राष्ट्रीय चेतना के जागरण का भी महत्वपूर्ण दौर था। ‘वंदे मातरम्’ ने उस भावना को अभिव्यक्ति देने में विशेष भूमिका निभाई।
अंडमान दौरे का भी किया जिक्र
उपराष्ट्रपति ने अपने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के दौरे को भी याद किया। उन्होंने बताया कि वहां श्री विजय पुरम के फ्लैग पॉइंट पर तिरंगा फहराकर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की शुरुआत से जुड़ी गतिविधियों में हिस्सा लिया था। श्री विजय पुरम का फ्लैग पॉइंट ऐतिहासिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी स्थान पर 30 दिसंबर 1943 को स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया था।
उस समय उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को ब्रिटिश शासन से मुक्त क्षेत्र के रूप में घोषित किया था। इस ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए कार्यक्रम में स्वतंत्रता आंदोलन के नायकों और उनके योगदान को याद किया गया। बाइक रैली के जरिए वर्तमान पीढ़ी को देश के स्वतंत्रता संघर्ष और राष्ट्रीय ध्वज के महत्व से जोड़ने का संदेश दिया गया।

सांसदों ने नागरिकों से अभियान में शामिल होने की अपील की
बाइक रैली में शामिल कई सांसदों ने नागरिकों से ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की। भाजपा सांसद योगेंद्र चंदोलिया ने कहा कि दिल्ली में केंद्रीय मंत्री, सांसद और युवा इस बाइक रैली में हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने इसे देशभर में एकता और राष्ट्रभक्ति का संदेश पहुंचाने वाला कार्यक्रम बताया। भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने भी तिरंगे को देश के नागरिकों की आकांक्षाओं और संकल्प का प्रतीक बताया।
उन्होंने कहा कि तिरंगा उन स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान की याद दिलाता है, जिनके प्रयासों के कारण आज देश स्वतंत्र रूप से अपना राष्ट्रीय ध्वज फहरा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान पीढ़ी के साथ आने वाली पीढ़ी देश का भविष्य और नेतृत्व संभालने वाली ताकत है। इसलिए राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।
क्या है ‘हर घर तिरंगा’ अभियान?
‘हर घर तिरंगा’ अभियान की शुरुआत आजादी का अमृत महोत्सव के तहत की गई थी। इसका मूल उद्देश्य लोगों को अपने घरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने और स्वतंत्रता दिवस समारोह में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने के लिए प्रेरित करना है। इस पहल के पीछे यह विचार था कि राष्ट्रीय ध्वज के साथ नागरिकों का संबंध लंबे समय तक मुख्य रूप से सरकारी संस्थानों और औपचारिक आयोजनों तक सीमित रहा है। अभियान के माध्यम से तिरंगे को लोगों के घरों और निजी जीवन से जोड़ने की कोशिश की गई।
इसका उद्देश्य राष्ट्रीय ध्वज को केवल सरकारी कार्यक्रमों का हिस्सा बनाने के बजाय प्रत्येक नागरिक के गर्व और राष्ट्र के साथ व्यक्तिगत जुड़ाव का प्रतीक बनाना है। घरों पर तिरंगा फहराने से स्वतंत्रता दिवस का उत्सव व्यापक जनभागीदारी वाला आयोजन बनता है।
2026 में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पर विशेष फोकस
इस साल ‘हर घर तिरंगा 2026’ अभियान को ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर से जोड़ा गया है। राष्ट्रीय गीत के डेढ़ शतक पूरे होने के अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
‘वंदे मातरम्’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इस गीत ने औपनिवेशिक शासन के खिलाफ संघर्ष के दौरान लोगों के बीच राष्ट्रीय भावना को मजबूत करने में भूमिका निभाई थी। 2026 के अभियान के माध्यम से स्वतंत्रता दिवस, तिरंगे के प्रति सम्मान और ‘वंदे मातरम्’ से जुड़ी ऐतिहासिक विरासत को एक साथ सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है।
युवाओं की भागीदारी पर जोर
दिल्ली की बाइक रैली में युवाओं की भागीदारी को भी विशेष महत्व दिया गया। कार्यक्रम के आयोजकों और नेताओं ने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
बाइक रैली जैसे आयोजनों के जरिए युवा वर्ग को स्वतंत्रता दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और राष्ट्रीय प्रतीकों के महत्व से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। तिरंगा यात्रा और अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से देशभर में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति का संदेश
भारत मंडपम से निकली बाइक रैली ने स्वतंत्रता दिवस से पहले राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति का संदेश दिया। प्रतिभागियों ने तिरंगे के साथ रैली में हिस्सा लेकर देश के स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी और राष्ट्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की। ‘हर घर तिरंगा 2026’ के तहत देशभर के नागरिकों से अपने घरों पर तिरंगा फहराने और स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग लेने की अपील की जा रही है। इस वर्ष अभियान में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा को भी प्रमुखता दी गई है।
भारत मंडपम से शुरू हुई यह बाइक रैली इसी व्यापक अभियान का हिस्सा रही, जिसमें राष्ट्रीय ध्वज को देश की एकता, स्वतंत्रता संघर्ष की विरासत और भविष्य के लिए साझा संकल्प के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया।











