भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) ने विनेश फोगाट पर अनुशासनहीनता और डोपिंग नियम उल्लंघन के आरोप में 26 जून तक घरेलू प्रतियोगिताओं से प्रतिबंध लगा दिया है। WFI ने 15 पन्नों के नोटिस में कई गंभीर आरोपों का उल्लेख किया है।
स्पोर्ट्स: भारतीय कुश्ती में एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। भारतीय कुश्ती महासंघ (Wrestling Federation of India – WFI) ने ओलिंपियन पहलवान और कांग्रेस विधायक विनेश फोगाट पर 26 जून 2026 तक घरेलू प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह कार्रवाई अनुशासनहीनता और एंटी-डोपिंग नियमों के कथित उल्लंघन के आधार पर की गई है।
WFI के अनुसार, यह फैसला एक 15 पन्नों के कारण बताओ नोटिस के बाद लिया गया, जिसमें फोगाट से चार गंभीर आरोपों पर जवाब मांगा गया है।
WFI का आरोप: नियमों और अनुशासन का उल्लंघन
कुश्ती महासंघ ने दावा किया है कि विनेश फोगाट ने रिटायरमेंट से वापसी के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया। नियमों के मुताबिक, किसी भी खिलाड़ी को वापसी से पहले छह महीने की पूर्व सूचना देना आवश्यक होता है, जिसका पालन नहीं किया गया।
इसके अलावा WFI ने कहा कि फोगाट ने यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (UWW) और एंटी-डोपिंग नियमों का उल्लंघन किया है। महासंघ ने यह भी आरोप लगाया कि उनके व्यवहार से भारतीय कुश्ती की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचा है और राष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है।
डोपिंग टेस्ट विवाद और इंटरनेशनल एजेंसी की कार्रवाई
डोपिंग से जुड़े एक अलग मामले में इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी (ITA) ने भी विनेश फोगाट को नोटिस जारी किया है। रिपोर्ट के अनुसार, 18 दिसंबर 2025 को बेंगलुरु में हुए डोप टेस्ट में शामिल न होने के कारण यह कार्रवाई हुई।

WFI का कहना है कि यह मामला नियमों के गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में आता है, जिस पर आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई भी संभव है।
पेरिस ओलिंपिक और करियर में उतार-चढ़ाव
पेरिस ओलिंपिक 2024 के दौरान विनेश फोगाट को वजन सीमा से अधिक पाए जाने के कारण अयोग्य घोषित कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने कुश्ती से संन्यास लेने की घोषणा की थी, हालांकि बाद में उन्होंने अपना फैसला वापस ले लिया और वापसी की तैयारी शुरू की।
उनका करियर पिछले कुछ वर्षों से लगातार विवादों, चोटों और प्रशासनिक संघर्षों के बीच रहा है, जिससे भारतीय खेल जगत में कई बार बहस भी हुई है।
पूर्व WFI अध्यक्ष पर आरोप और विवाद की पृष्ठभूमि
हाल के दिनों में विनेश फोगाट ने पूर्व कुश्ती महासंघ अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि महिला खिलाड़ियों के साथ अनुचित व्यवहार हुआ और कई मामलों में निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिली।
इस मुद्दे को लेकर 2023 में जंतर-मंतर पर बड़ा धरना भी हुआ था, जिसमें कई शीर्ष पहलवान शामिल थे। यह मामला अभी अदालत में विचाराधीन है।
WFI की चेतावनी: जवाब नहीं मिला तो और कार्रवाई संभव
महासंघ ने साफ किया है कि यदि निर्धारित समय में जवाब संतोषजनक नहीं मिला, तो आगे और सख्त कार्रवाई की जा सकती है। WFI ने यह भी कहा कि खेल की गरिमा और अनुशासन बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है।
समर्थन और आलोचना दोनों तेज
इस फैसले के बाद खेल जगत में दो तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक पक्ष इसे अनुशासन बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बता रहा है, जबकि दूसरा इसे एक खिलाड़ी के करियर पर दबाव और विवादों से जुड़ा निर्णय मान रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक खिलाड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय कुश्ती प्रशासन और खिलाड़ियों के बीच चल रहे लंबे तनाव को भी दर्शाता है।









