VitalID लॉगिन सिस्टम: सिर की मूवमेंट और वाइब्रेशन से होगा यूज़र वेरिफिकेशन

Rutgers University की VitalID तकनीक VR/AR हेडसेट्स में सिर की हल्की वाइब्रेशन से यूजर पहचान करती है, 95% से अधिक सटीकता के साथ सुरक्षित लॉगिन।

VitalID टेक्नोलॉजी एक नई बायोमेट्रिक प्रणाली है, जो यूजर की पहचान सिर में पैदा होने वाली हल्की वाइब्रेशन से करती है। Rutgers University के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित यह सिस्टम पासवर्ड, PIN या फिंगरप्रिंट की जरूरत को खत्म करता है। VR और AR हेडसेट्स में मौजूद सेंसर की मदद से यह सुरक्षित और तेज लॉगिन अनुभव प्रदान करता है। परीक्षणों में इसकी पहचान दर 95% से अधिक रही।

VitalID Technology: साइबर सुरक्षा और लॉगिन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए Rutgers University ने VitalID नामक नई बायोमेट्रिक तकनीक विकसित की है। यह सिस्टम किसी भी पासवर्ड या फिंगरप्रिंट की जरूरत के बिना सिर की हल्की वाइब्रेशन से यूजर की पहचान करता है। तकनीक VR और AR हेडसेट्स में मौजूद सेंसर के जरिए बायोलॉजिकल सिग्नल को पढ़ती है, जिससे यूजर सुरक्षित और सहज तरीके से लॉगिन कर सकता है। परीक्षणों में इस तकनीक ने 95% से अधिक सटीक पहचान दर्ज की है।

सिर की वाइब्रेशन से होती है पहचान

VitalID टेक्नोलॉजी Rutgers University के शोधकर्ताओं ने विकसित की है, जो यूजर की पहचान उनके सिर में पैदा होने वाली वाइब्रेशन से करती है। शरीर कभी स्थिर नहीं रहता, हर सांस और दिल की धड़कन से हल्की कंपन पैदा होती है। यह कंपन सिर तक पहुंचते हुए एक यूनिक पैटर्न बनाती है, जो हर व्यक्ति के लिए अलग होता है। यही पैटर्न सिस्टम को आपके पहचानने में मदद करता है।

इस तकनीक में पासवर्ड, PIN या फिंगरप्रिंट की जरूरत नहीं होती। यूजर बस VR या AR हेडसेट पहनता है और सिस्टम खुद ही बायोलॉजिकल सिग्नल को पहचानकर लॉगिन कर देता है।

VitalID लॉगिन सिस्टम: सिर की मूवमेंट और वाइब्रेशन से होगा यूज़र वेरिफिकेशन

सिस्टम कैसे काम करता है

VitalID के लिए कोई खास हार्डवेयर जरूरी नहीं है। आधुनिक VR और AR हेडसेट्स में पहले से मौजूद मोशन सेंसर सिर की हल्की वाइब्रेशन पकड़ते हैं। सिस्टम सामान्य मूवमेंट जैसे सिर घुमाना या चलना अलग कर देता है और केवल बायोलॉजिकल सिग्नल को प्रोसेस करता है। इसके बाद सिग्नल को प्रोफाइल से मिलाकर यूजर की पहचान की पुष्टि होती है।

यह तरीका पारंपरिक बायोमेट्रिक सिस्टम जैसे फेस, फिंगरप्रिंट या आई स्कैन की तुलना में अधिक सुरक्षित माना जाता है। सिर की बनावट और अंदरूनी संरचना को कॉपी करना लगभग असंभव है, जिससे फर्जी लॉगिन का खतरा कम होता है।

परफॉर्मेंस और सुरक्षा

52 लोगों पर 10 महीने तक परीक्षण में VitalID ने 95% से अधिक सही पहचान दर्ज की और गलत यूजर को 98% मामलों में अलग किया। इस तकनीक को 2025 में एक प्रमुख साइबर सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में सम्मानित किया गया।

जैसे-जैसे VR और AR डिवाइस बैंकिंग, हेल्थ रिकॉर्ड्स और ऑफिस सिस्टम्स तक पहुंच का जरिया बन रहे हैं, सुरक्षित और सहज लॉगिन तकनीक की मांग बढ़ रही है। VitalID इस दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।

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