पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से अपीलों के निपटारे की जानकारी मांगी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए ECI को अब तक निपटाई गई और लंबित अपीलों का पूरा ब्योरा देने का निर्देश दिया।
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने चुनाव आयोग (ECI) से उन मामलों का विस्तृत ब्योरा मांगा है, जिनमें SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद लोगों ने अपील दायर की थी। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा है कि अब तक कितनी अपीलों का वास्तविक रूप से निपटारा किया जा चुका है।
यह मामला कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की याचिका से जुड़ा है। याचिका में पश्चिम बंगाल के प्रत्येक ब्लॉक में SIR से संबंधित मामलों की सुनवाई के लिए ट्रिब्यूनल गठित करने और अपीलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने ECI से मांगा जवाब
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर मामले में जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान अदालत ने SIR से जुड़े अपीलीय मामलों की प्रगति पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल अपील दाखिल होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि उन अपीलों का कितनी संख्या में निपटारा हुआ है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट की ओर से यह टिप्पणी भी सामने आई कि यदि इसी गति से मामलों की सुनवाई चलती रही, तो इनके निपटारे में बहुत लंबा समय लग सकता है। अदालत ने ट्रिब्यूनलों के कामकाज और उनकी मौजूदा स्थिति की विस्तृत जानकारी मांगी है।
ट्रिब्यूनल के प्रदर्शन पर भी नजर
SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद प्रभावित लोगों के लिए अपील की व्यवस्था की गई है। सुप्रीम कोर्ट अब यह देखना चाहता है कि इन अपीलीय ट्रिब्यूनलों ने कितने मामलों पर फैसला किया है और कितने मामले अभी लंबित हैं। अदालत ने संकेत दिया कि यदि ट्रिब्यूनलों का कामकाज अपेक्षित गति से नहीं हो रहा है, तो उनकी कार्यप्रणाली में बदलाव पर विचार किया जा सकता है।
कोर्ट का जोर इस बात पर है कि मतदाता सूची से जुड़े विवादों का समय रहते समाधान हो, ताकि पात्र नागरिक अपने मतदान के अधिकार से वंचित न रहें।पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को संबंधित आंकड़े उपलब्ध कराने की बात कही। मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को निर्धारित की गई है।

मतदाता अधिकारों पर अहम सवाल
पश्चिम बंगाल SIR विवाद का सीधा संबंध मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र नागरिकों के मतदान अधिकार से है। चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य सूची को अपडेट करना और उसमें मौजूद गलत या अपात्र प्रविष्टियों को हटाना होता है। हालांकि, ऐसी प्रक्रिया में किसी योग्य मतदाता का नाम गलती से हट जाने की स्थिति में उसे प्रभावी अपील और सुधार का अवसर मिलना महत्वपूर्ण है।
इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट अब अपीलों के निपटारे की गति और प्रक्रिया की निगरानी कर रहा है। अदालत के सामने यह सुनिश्चित करने की चुनौती है कि मतदाता सूची को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया और नागरिकों के मतदान अधिकार के बीच संतुलन बना रहे।
जजों की मौखिक टिप्पणियों के इस्तेमाल पर भी नोटिस
इसी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक अलग जनहित याचिका (PIL) पर भी नोटिस जारी किया। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि अदालतों में सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों की मौखिक टिप्पणियों और टिप्पणीनुमा संकेतों का कई बार गलत तरीके से इस्तेमाल किया जाता है। याचिका में देश में कथित तौर पर फर्जी वकीलों और नकली कानून की डिग्रियों से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस PIL पर केंद्र सरकार, MeitY, Bar Council of India और CBI को नोटिस जारी किया है। इस मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी।










