नौकरीपेशा लोगों के लिए रिटायरमेंट ऐसा पड़ाव है, जब वे आर्थिक चिंता से मुक्त होकर सुकून की जिंदगी जीना चाहते हैं। लेकिन रिटायरमेंट के बाद नियमित आय का स्रोत सीमित हो सकता है और महंगाई के कारण रोजमर्रा के खर्च भी लगातार बढ़ते हैं। ऐसे में नौकरी के दौरान ही रिटायरमेंट प्लानिंग शुरू करना जरूरी है।
बिजनेस न्यूज़: अगर आपका लक्ष्य रिटायरमेंट के बाद हर महीने ₹50,000 की नियमित आय हासिल करना है, तो आपको आज से ही रिटायरमेंट कॉर्पस तैयार करने की जरूरत होगी। 4% रूल, निवेश अवधि और महंगाई को ध्यान में रखकर जानिए कितना फंड और कितनी SIP जरूरी हो सकती है। रिटायरमेंट के बाद नियमित आय का खत्म होना कई लोगों के लिए सबसे बड़ी वित्तीय चिंता होती है।
नौकरी के दौरान मिलने वाली सैलरी जहां रोजमर्रा के खर्च संभालती है, वहीं रिटायरमेंट के बाद निवेश और बचत से मिलने वाली आय महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए अगर किसी व्यक्ति का लक्ष्य रिटायरमेंट के बाद हर महीने ₹50,000 की आय बनाए रखना है, तो इसके लिए पर्याप्त रिटायरमेंट कॉर्पस तैयार करना जरूरी है।
इसके लिए निवेशक अक्सर 4% रूल का इस्तेमाल शुरुआती अनुमान लगाने के लिए करते हैं। हालांकि, यह कोई गारंटीड पेंशन फॉर्मूला नहीं है और वास्तविक जरूरत व्यक्ति के खर्च, महंगाई, निवेश रिटर्न, टैक्स और रिटायरमेंट की अवधि पर निर्भर करेगी।
क्या है 4% रूल?
4% रूल रिटायरमेंट प्लानिंग का एक लोकप्रिय thumb rule है। इसके तहत माना जाता है कि रिटायरमेंट के बाद शुरुआती वर्ष में कुल निवेशित कॉर्पस का करीब 4% निकाला जा सकता है और शेष रकम निवेश में बनी रह सकती है। अगर किसी व्यक्ति को वर्तमान मूल्य के हिसाब से हर साल ₹6 लाख की जरूरत है, तो 4% नियम के आधार पर आवश्यक कॉर्पस का अनुमान इस तरह लगाया जा सकता है:
₹6,00,000 ÷ 4% = ₹1.50 करोड़
यानी मौजूदा खर्च के आधार पर ₹50,000 प्रति माह की आय के लिए करीब ₹1.5 करोड़ का शुरुआती कॉर्पस एक अनुमानित लक्ष्य बन सकता है।

₹1.5 करोड़ का फंड कैसे तैयार करें?
अब सवाल है कि इतना बड़ा रिटायरमेंट फंड बनाया कैसे जाए? इसके लिए लंबे समय तक नियमित निवेश एक महत्वपूर्ण तरीका हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई व्यक्ति म्यूचुअल फंड SIP में औसतन 12% सालाना रिटर्न की धारणा के साथ निवेश करता है, तो अलग-अलग अवधि में अनुमानित मासिक निवेश इस प्रकार हो सकता है:
- 10 साल - करीब ₹65,000
- 15 साल - करीब ₹30,000
- 20 साल - करीब ₹15,000
- 25 साल - करीब ₹8,000
ये आंकड़े केवल उदाहरण के लिए हैं। इक्विटी म्यूचुअल फंड में रिटर्न बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करता है और 12% रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती।
महंगाई बदल देगी पूरा गणित
रिटायरमेंट प्लानिंग में सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक महंगाई (Inflation) है। आज ₹50,000 प्रति माह में जो खर्च पूरे हो रहे हैं, जरूरी नहीं कि 15 या 20 साल बाद भी उतनी ही रकम में वही जीवनशैली बरकरार रहे। अगर महंगाई औसतन 6% सालाना रहती है, तो 20 साल बाद आज के ₹50,000 की क्रय शक्ति बनाए रखने के लिए करीब ₹1.60 लाख प्रति माह की जरूरत पड़ सकती है। इसका मतलब है कि केवल आज की जरूरत के हिसाब से ₹1.5 करोड़ का लक्ष्य तय करना लंबी अवधि के रिटायरमेंट के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता।
महंगाई और बढ़ती आय को देखते हुए निवेशक Step-Up SIP पर विचार कर सकते हैं। इसमें हर साल SIP की रकम एक निश्चित प्रतिशत बढ़ाई जाती है। उदाहरण के लिए, शुरुआत में ₹15,000 की SIP करने वाला निवेशक अपनी आय बढ़ने के साथ हर साल निवेश राशि में 10% तक बढ़ोतरी कर सकता है।
इससे लंबी अवधि में निवेश का आकार तेजी से बढ़ सकता है और महंगाई से पैदा होने वाली अतिरिक्त जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।










