भारत समुद्री बीमा पूल ने वैश्विक अस्थिरता के बीच भारतीय समुद्री व्यापार को युद्ध-जोखिम बीमा उपलब्ध कराया है। 7 सितंबर 2026 तक 3000 से अधिक माल और 92 जलपोत बीमा पॉलिसी जारी हुईं।
Business: वैश्विक अस्थिरता और युद्ध के बढ़ते जोखिमों के बीच भारत समुद्री बीमा पूल (BMIP) भारतीय समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था के रूप में उभरा है। सरकारी फैक्टशीट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में टकराव के बाद युद्ध-जोखिम बीमा प्रीमियम में करीब 35 से 40 प्रतिशत की कमी आई है। 7 सितंबर 2026 तक पूल ने 3000 से अधिक माल युद्ध-जोखिम और 92 जलपोत बीमा पॉलिसी जारी की हैं।
भारतीय समुद्री व्यापार के लिए बीमा कवरेज
बीएमआईपी भारतीय ध्वज वाले जहाजों के साथ-साथ उन पोतों को समुद्री बीमा उपलब्ध कराता है जिनका स्वामित्व, प्रबंधन या नियंत्रण भारतीय संस्थाओं के पास है। इसके दायरे में भारत से आने वाले या भारत से शुरू होने वाले मालवाहक पोत भी शामिल हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 7 सितंबर 2026 तक पूल ने 3000 माल युद्ध-जोखिम, 92 जलपोत ढांचा युद्ध-जोखिम और 3 संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति यानी पीएंडआई बीमा पॉलिसियां जारी की हैं। इसके जरिए भारतीय समुद्री कारोबार से जुड़े पक्षकारों को युद्ध और अन्य जोखिमों के दौरान निर्बाध बीमा कवरेज उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है।
बीएमआईपी की शुरुआत मई 2026 में 13,906.50 करोड़ रुपये यानी 1.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक के कवरेज के साथ हुई थी। इसके तहत जहाज के ढांचे, माल, संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति और युद्ध जोखिमों के लिए घरेलू बीमा कवरेज उपलब्ध कराया जाता है।
विदेशी बीमाकर्ताओं पर निर्भरता कम करने की कोशिश
बीएमआईपी के तहत बीमा पॉलिसियां घरेलू बीमा कंपनियों द्वारा जारी की जाती हैं। जोखिमों का पुनर्बीमाकरण सदस्यों की प्रतिबद्धताओं के आधार पर सामूहिक रूप से किया जाता है। 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक के दावों का निपटान आरक्षित निधियों के माध्यम से किया जाता है, जबकि इससे बड़े दावों के लिए संप्रभु गारंटी का इस्तेमाल किया जाता है।
अपनी शुरुआत के बाद से पूल ने तटीय जहाजों के लिए युद्ध-जोखिम और पीएंडआई पॉलिसियां जारी की हैं। इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर पैदा होने वाले व्यवधानों के दौरान भारतीय समुद्री कारोबार को किफायती और लगातार बीमा कवरेज उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही विदेशी बीमाकर्ताओं पर निर्भरता कम करने पर भी जोर दिया गया है।
सरकार के मुताबिक, बीएमआईपी जहाज के हल स्ट्रक्चर यानी मुख्य ढांचे, प्रोपल्शन सिस्टम और उससे जुड़े उपकरणों को होने वाले नुकसान से सुरक्षा देता है। इससे भारतीय व्यापारिक जहाजों के बेड़े में लगी पूंजी को सुरक्षित रखने और उसका बीमा देश के भीतर करने में मदद मिलती है।
लाल सागर और होर्मुज जैसे संवेदनशील रास्तों पर सुरक्षा
बीएमआईपी के तहत अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से भेजे जाने वाले सामान को शिपमेंट के दौरान नुकसान या खराबी से सुरक्षा मिलती है। इसका महत्व उन समुद्री मार्गों पर और बढ़ जाता है जहां जोखिम या टकराव की स्थिति अधिक है। इससे भारतीय निर्यातकों और आयातकों को ऐसे रास्तों से कारोबार जारी रखने में मदद मिल सकती है।
युद्ध-जोखिम कवरेज सशस्त्र संघर्ष, समुद्री डकैती, आतंकवाद और दुश्मन के जहाज द्वारा कब्जा किए जाने से होने वाले नुकसान के खिलाफ बीमा सुरक्षा देता है। लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों से गुजरने वाले भारतीय व्यापार मार्गों के लिए इस तरह का कवरेज विशेष महत्व रखता है।
सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, बीएमआईपी भारत की समुद्री वित्तीय स्वतंत्रता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य भारतीय समुद्री पक्षकारों के लिए विश्वसनीय संचालन, प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण और भरोसेमंद दावा निपटान सुनिश्चित करना है।












