रांची में जन्मीं एयरफोर्स मेडिकल ऑफिसर स्क्वाड्रन लीडर पल्लाक्षी प्रसाद ने 24 सितंबर को घोषित NEET PG 2026 परिणाम में AIR-2 हासिल की। कानपुर में तैनात पल्लाक्षी ने सैन्य सेवा के साथ परीक्षा की तैयारी की।
रांची: एयरफोर्स स्टेशन कानपुर में तैनात 28 वर्षीय मेडिकल ऑफिसर स्क्वाड्रन लीडर पल्लाक्षी प्रसाद ने NEET PG 2026 में ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल की है। 24 सितंबर को घोषित परिणाम में उनकी उपलब्धि सामने आई। पल्लाक्षी ने सैन्य सेवा, मरीजों की जिम्मेदारियों और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाते हुए परीक्षा की तैयारी की। उनकी इस सफलता को आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल सर्विसेज के लिए भी गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया गया।
सैन्य सेवा के साथ NEET PG की तैयारी
पल्लाक्षी प्रसाद के लिए NEET PG की तैयारी सामान्य परिस्थितियों में नहीं हुई। मेडिकल ऑफिसर के तौर पर जिम्मेदारियां निभाते हुए उन्होंने मरीजों को देखने, ड्यूटी पूरी करने और उपलब्ध समय के बीच अपनी पढ़ाई जारी रखी। उनका कहना है कि तैयारी में रोजाना लंबे समय तक पढ़ने से ज्यादा जरूरी लगातार पढ़ते रहना था।
डायरेक्टर जनरल आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल सर्विसेज (DGAFMS) एयर मार्शल संदीप थरेजा ने AFMC के C3 बैच की पूर्व छात्रा पल्लाक्षी को उनकी उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने इसे आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल सर्विसेज के लिए गर्व की उपलब्धि बताया।
पल्लाक्षी ने बताया कि वह बचपन से डॉक्टर बनना चाहती थीं। उनके माता-पिता दोनों इंजीनियर हैं, लेकिन उन्होंने उनके डॉक्टर बनने के सपने का विरोध नहीं किया और हमेशा उनका समर्थन किया।
NEET UG से AFMC तक का सफर
रांची में जन्मीं और हैदराबाद में पली-बढ़ीं पल्लाक्षी ने दिल्ली पब्लिक स्कूल से पढ़ाई की। बिना किसी ड्रॉप ईयर के उन्होंने NEET UG 2016 में 1312वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल की थी। गृह राज्य में दाखिले के नियमों के कारण उनके विकल्प सीमित थे। इसी दौरान मां की सलाह पर उन्होंने आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल कॉलेज (AFMC) में आवेदन किया।
सिलेक्शन प्रक्रिया में पल्लाक्षी ने लड़कियों की मेरिट लिस्ट में तीसरा स्थान हासिल किया और AFMC में दाखिला लिया। अपने बैच में वह ओवरऑल मेरिट में छठे स्थान पर रहीं। पढ़ाई के दौरान उनका AFMC और सैन्य जीवन से जुड़ाव बढ़ता गया। ग्रेजुएशन पूरा होने तक यूनिफॉर्म उनके लिए पूरी तरह सहज हो चुकी थी। इसी वजह से उन्होंने परमानेंट कमीशन लेने का फैसला किया।
नेवी से एयरफोर्स तक का मेडिकल करियर
15 मई 2021 को पल्लाक्षी को इंडियन नेवी में कमीशन मिला। इसके बाद उन्होंने करीब ढाई साल तक एक वॉरशिप पर मेडिकल ऑफिसर के तौर पर काम किया। वर्ष 2025 में वह इंडियन एयरफोर्स में चली गईं और वर्तमान में एयरफोर्स स्टेशन कानपुर में तैनात हैं।
उनके अनुसार, वॉरशिप पर बिताए समय ने उनके व्यक्तित्व और काम को देखने के नजरिए को बेहतर बनाया। सैन्य सेवा के दौरान मेडिकल जिम्मेदारियों के साथ पोस्ट-ग्रेजुएट मेडिकल एंट्रेंस परीक्षा की तैयारी के लिए अनुशासन और निरंतरता जरूरी थी।
अपने मेंटर और मिलिट्री डॉक्टर डॉ. विनीत बेहरा की देखरेख में पल्लाक्षी ने इंटर्नशिप के दौरान बॉम्बे मेडिकल कांग्रेस में क्रॉनिक किडनी डिजीज पर एक रिसर्च पेपर भी पेश किया।
परिवार में अलग राह चुनी
NEET PG 2026 में AIR-2 हासिल करने के बाद पल्लाक्षी अब रेडियोलॉजी, इंटरनल मेडिसिन और डर्मेटोलॉजी में स्पेशलाइजेशन के विकल्पों पर विचार कर रही हैं।
उनके पिता चंद्र किशोर प्रसाद सेंट्रल रेलवे में प्रिंसिपल चीफ सेफ्टी ऑफिसर (PCSO) हैं और 'KAVACH' किताब के सह-लेखक हैं। उनकी मां इंफोसिस में प्रैक्टिस हेड हैं। पल्लाक्षी की शादी IAF के एक डॉक्टर से हुई है और वह 2025 से कानपुर में पोस्टेड हैं।
उनके माता-पिता और छोटे भाई क्षितिज प्रसाद ने इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी का क्षेत्र चुना। उनके भाई हैदराबाद से कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट हैं। वहीं पल्लाक्षी ने डॉक्टर बनने के अपने बचपन के सपने को पूरा किया और आर्म्ड फोर्सेज में सेवा करने वाली परिवार की पहली सदस्य बनीं।










