उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय में रविवार को प्रदेश अध्यक्ष के पदभार ग्रहण समारोह से पहले हुए हंगामे ने पार्टी की अंदरूनी राजनीति को चर्चा में ला दिया है। नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ के कार्यभार संभालने के कार्यक्रम के दौरान पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और कांग्रेस की महिला नेता ममता चौधरी से जुड़े दो पक्षों के बीच तीखी कहासुनी हुई। विवाद बढ़ने पर धक्का-मुक्की हुई और कुछ लोगों के हाथों में जूते-चप्पल दिखाई दिए। इस घटनाक्रम के बाद ममता चौधरी का नाम प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। सवाल उठ रहा है कि आखिर ममता चौधरी कौन हैं, कांग्रेस में उनकी क्या भूमिका है और अजय राय के साथ उनका विवाद किस वजह से सामने आया?
ममता चौधरी लखनऊ की स्थानीय राजनीति में सक्रिय कांग्रेस नेता हैं। वह लखनऊ नगर निगम के मालवीय नगर वार्ड से पार्षद हैं और नगर निगम में कांग्रेस पार्षद दल की नेता के रूप में भी काम करती रही हैं। इसके साथ ही उनकी पहचान उत्तर प्रदेश महिला कांग्रेस के मध्य जोन की अध्यक्ष के रूप में रही है। स्थानीय निकाय की राजनीति से लेकर पार्टी के महिला संगठन तक उनकी सक्रियता के कारण वह कांग्रेस के संगठनात्मक मामलों में भूमिका निभाती रही हैं। लखनऊ में पार्टी कार्यालय पर हुए विवाद के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका और प्रदेश कांग्रेस के नेताओं के साथ उनके संबंधों पर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है।
ममता चौधरी का राजनीतिक सफर केवल नगर निगम तक सीमित नहीं रहा है। कांग्रेस ने उन्हें वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मोहनलालगंज की सुरक्षित सीट से उम्मीदवार बनाया था। उस चुनाव में उन्हें 2,990 वोट मिले थे। विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाए जाने से स्पष्ट है कि पार्टी ने उन्हें स्थानीय निकाय की राजनीति से आगे विधानसभा स्तर पर भी प्रतिनिधित्व का अवसर दिया था। हालांकि, चुनाव में उन्हें कितने वोट मिले, यह एक चुनावी तथ्य है और इससे उनकी मौजूदा संगठनात्मक स्थिति या भविष्य की राजनीतिक भूमिका का अपने आप निर्धारण नहीं होता।
ममता चौधरी का नाम प्रदेश कांग्रेस की महिला इकाई से भी जुड़ा रहा है। महिला संगठन में उनकी जिम्मेदारी के कारण पार्टी की महिला कार्यकर्ताओं के बीच उनका संपर्क और स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियों में भागीदारी रही है। हालिया घटनाक्रम में भी वह महिला कांग्रेस की कार्यकर्ताओं के साथ प्रदेश मुख्यालय में मौजूद थीं। मीडिया रिपोर्टों में उन्हें नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा के करीबी नेताओं में गिना गया है। हालांकि, किसी नेता के साथ निकटता की राजनीतिक चर्चा और औपचारिक संगठनात्मक पद अलग-अलग बातें हैं।
पूरा विवाद 11 अक्टूबर 2026 को लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय में हुआ। उस दिन आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का कार्यभार संभालना था। पार्टी कार्यालय में इस कार्यक्रम की तैयारियां चल रही थीं और बड़ी संख्या में नेता तथा कार्यकर्ता मौजूद थे। आराधना मिश्रा के औपचारिक रूप से कार्यभार ग्रहण करने से पहले ही कार्यालय में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और ममता चौधरी से जुड़े समर्थकों के बीच तनाव पैदा हो गया। कुछ ही देर में मामला कहासुनी से बढ़कर धक्का-मुक्की और हंगामे तक पहुंच गया।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, विवाद की शुरुआत रास्ता देने और अजय राय के लिए जगह बनाने को लेकर हुई बातचीत से जुड़ी थी। अजय राय अपने समर्थकों के साथ पार्टी कार्यालय पहुंचे थे। वहां पहले से मौजूद कार्यकर्ताओं के बीच से निकलने के लिए रास्ता बनाने की बात कही गई। इसी दौरान ममता चौधरी की ओर से अजय राय की मौजूदगी पर कथित टिप्पणी किए जाने का दावा सामने आया। कुछ रिपोर्टों में ‘कौन अध्यक्ष’ कहे जाने की बात लिखी गई, जबकि अन्य रिपोर्टों में बताया गया कि अजय राय के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने के आरोप के बाद विवाद बढ़ा। घटनाक्रम के इस हिस्से को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावे सामने आए हैं, इसलिए इसे जांच और संबंधित लोगों के बयानों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
कहासुनी बढ़ने के बाद दोनों पक्षों के समर्थक आमने-सामने आ गए। रिपोर्टों के अनुसार, कार्यालय में गाली-गलौज और धक्का-मुक्की हुई तथा कुछ कार्यकर्ताओं ने जूते-चप्पल हाथों में उठा लिए। इस घटना के वीडियो और तस्वीरें भी चर्चा में आए। कांग्रेस कार्यालय जैसे राजनीतिक संगठन के प्रमुख केंद्र में इस तरह का हंगामा होने से कार्यक्रम का माहौल प्रभावित हुआ। वरिष्ठ नेताओं को हस्तक्षेप करना पड़ा और स्थिति शांत कराने की कोशिश की गई।
ममता चौधरी ने घटना के बाद आरोप लगाया कि अजय राय ने उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया और उनके समर्थकों की ओर से महिला कार्यकर्ताओं के साथ बदसलूकी की गई। उन्होंने इस मामले को केवल दो राजनीतिक गुटों के बीच का विवाद मानने के बजाय महिलाओं के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि वह इस मामले को कांग्रेस के वरिष्ठ नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी के सामने उठाने की बात कह रही हैं। ये ममता चौधरी के आरोप हैं; घटना के सभी पहलुओं पर निष्कर्ष निकालने के लिए दूसरे पक्ष का बयान और उपलब्ध साक्ष्य भी महत्वपूर्ण हैं।
दूसरी ओर, अजय राय ने भी पार्टी कार्यालय में हुई घटना पर नाराजगी जताई और अनुशासनहीनता करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने संबंधित नेताओं से शिकायत की और कहा कि पार्टी के भीतर इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। इस तरह विवाद के बाद दोनों पक्षों की ओर से आरोप-प्रत्यारोप सामने आए। फिलहाल सार्वजनिक रिपोर्टों में सामने आए बयानों को संबंधित पक्षों के दावों के रूप में देखना जरूरी है; किसी आरोप को जांच के बिना अंतिम सच नहीं माना जा सकता।
ममता चौधरी और अजय राय के बीच खींचतान को लेकर यह भी बताया गया है कि दोनों के बीच तनाव हाल की घटना से पहले से चला आ रहा था। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अजय राय के प्रदेश अध्यक्ष रहने के दौरान ममता चौधरी के कांग्रेस मुख्यालय में प्रवेश को लेकर भी विवाद रहा था। हालांकि, इस पुराने विवाद के सभी विवरण स्वतंत्र रूप से स्पष्ट नहीं हैं। इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को किसी एक पुराने फैसले का परिणाम बताने के बजाय पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रहे मतभेदों के संदर्भ में समझना अधिक उचित होगा।
इस विवाद के राजनीतिक मायने इसलिए भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, क्योंकि यह घटना उत्तर प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन के समय हुई। आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने अजय राय के बाद प्रदेश अध्यक्ष का कार्यभार संभाला। नेतृत्व परिवर्तन के ऐसे दौर में संगठन के अलग-अलग नेताओं और उनके समर्थकों के बीच तालमेल बनाए रखना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण होता है। नए अध्यक्ष के पदभार ग्रहण समारोह में ही विवाद सामने आने से संगठनात्मक अनुशासन और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय को लेकर सवाल उठे हैं। हालांकि, एक घटना के आधार पर पूरे संगठन के बारे में व्यापक निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
आराधना मिश्रा के कार्यभार ग्रहण कार्यक्रम में वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी और अन्य कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी भी रिपोर्टों में दर्ज की गई है। हंगामे के दौरान वरिष्ठ नेताओं ने स्थिति को शांत कराने का प्रयास किया। इसके बाद औपचारिक कार्यक्रम आगे बढ़ा और प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कार्यभार हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी हुई। इस घटनाक्रम ने नए नेतृत्व के सामने संगठन के भीतर मतभेदों को संभालने और कार्यकर्ताओं के बीच संवाद बनाए रखने की चुनौती को सामने रखा है।
ममता चौधरी की राजनीतिक पहचान को समझने के लिए उनके तीन प्रमुख पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है। पहला, वह लखनऊ नगर निगम में पार्षद और कांग्रेस पार्षद दल की नेता रही हैं। दूसरा, वह उत्तर प्रदेश महिला कांग्रेस के मध्य जोन की अध्यक्ष के रूप में संगठनात्मक जिम्मेदारी निभाती रही हैं। तीसरा, कांग्रेस ने उन्हें 2022 के विधानसभा चुनाव में मोहनलालगंज सीट से उम्मीदवार बनाया था। इन भूमिकाओं के कारण वह स्थानीय राजनीति और प्रदेश कांग्रेस संगठन, दोनों स्तरों पर सक्रिय रही हैं। मौजूदा विवाद ने उन्हें एक बार फिर प्रदेश की राजनीतिक सुर्खियों में ला दिया है।
अब इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी। पार्टी नेतृत्व विवाद में शामिल नेताओं और कार्यकर्ताओं से बातचीत कर सकता है तथा घटना के संबंध में उपलब्ध वीडियो, बयानों और अन्य तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की जा सकती है। मीडिया रिपोर्टों में जांच समिति बनाए जाने की चर्चा भी सामने आई है, लेकिन किसी अंतिम निर्णय या कार्रवाई की पुष्टि होने तक इसे संभावित कदम के रूप में ही देखना चाहिए। पार्टी के लिए यह जरूरी होगा कि वह दोनों पक्षों की बात सुने और संगठनात्मक नियमों के अनुसार निर्णय ले।
लखनऊ कांग्रेस कार्यालय में हुआ यह विवाद ममता चौधरी की राजनीतिक भूमिका, अजय राय के साथ उनके मतभेद और प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन के दौरान बने माहौल को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। ममता चौधरी स्थानीय निकाय और महिला कांग्रेस संगठन से जुड़ी नेता हैं, जबकि अजय राय प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं। दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच हुई झड़प ने पार्टी के भीतर अनुशासन और आपसी संवाद की जरूरत को सामने रखा है। अब आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि कांग्रेस नेतृत्व इस मामले को किस तरह सुलझाता है और संबंधित आरोपों पर क्या कार्रवाई होती है।










