महिला हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय टीम रविवार को चीन के खिलाफ अभियान शुरू करेगी। पूल डी के इस मुकाबले में पेरिस ओलंपिक की रजत पदक विजेता चीन भारत के सामने होगी। गोलकीपर सविता और ड्रैग-फ्लिकर दीपिका से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।
Women's hockey world cup 2026: एफआईएच महिला हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय महिला टीम रविवार, 16 अगस्त को अपने अभियान की शुरुआत करेगी। पूल डी के मुकाबले में भारत का सामना पेरिस ओलंपिक की रजत पदक विजेता चीन से होगा। यह मुकाबला नीदरलैंड्स के एम्स्टेलवीन स्थित वैगनर हॉकी स्टेडियम में भारतीय समयानुसार शाम 4:30 बजे खेला जाएगा। भारत के लिए टूर्नामेंट की शुरुआत ही बड़ी चुनौती के साथ हो रही है। पूल डी में भारत और चीन के अलावा इंग्लैंड तथा दक्षिण अफ्रीका की टीमें शामिल हैं। ऐसे में शुरुआती मुकाबले में सकारात्मक नतीजा भारतीय टीम के लिए आगे की राह आसान कर सकता है।
दूसरी ओर, हार की स्थिति में अगले दोनों मैचों का महत्व काफी बढ़ जाएगा। महिला हॉकी वर्ल्ड कप 2026 का आयोजन 15 से 30 अगस्त तक बेल्जियम और नीदरलैंड्स में किया जा रहा है। भारतीय महिला टीम अपने पूल चरण के सभी मुकाबले एम्स्टेलवीन में खेलेगी।
चीन के खिलाफ भारत के सामने बड़ी चुनौती
भारत और चीन की टीमें अंतरराष्ट्रीय हॉकी में एक-दूसरे से अच्छी तरह परिचित हैं। चीन को इस मुकाबले में मजबूत प्रतिद्वंद्वी माना जा रहा है। विश्व रैंकिंग में भी चीन भारत से ऊपर है और हाल के बड़े टूर्नामेंटों में उसने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है।
दोनों टीमों की पिछली बड़ी भिड़ंत 2025 एशिया कप के फाइनल में हुई थी, जहां चीन ने भारत को 4-1 से हराकर खिताब अपने नाम किया था। इसके बाद चीन ने पेरिस ओलंपिक में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीता। ऐसे में भारतीय टीम के सामने सिर्फ एक मजबूत विपक्षी टीम को हराने की चुनौती नहीं है, बल्कि पिछले मुकाबलों के दबाव से बाहर निकलने की भी चुनौती है।
हालांकि, भारतीय टीम को अपने हालिया प्रदर्शन से आत्मविश्वास मिला है। टीम ने 2026 महिला नेशंस कप जीतकर वर्ल्ड कप के लिए अपनी तैयारी को मजबूत किया है। आधिकारिक हॉकी इंडिया प्रीव्यू के मुताबिक, टीम में अनुभव और युवा ऊर्जा का अच्छा मिश्रण है।
सविता पुनिया के अनुभव पर रहेंगी निगाहें
भारत की टीम में सबसे अनुभवी खिलाड़ियों में गोलकीपर सविता पुनिया का नाम प्रमुख है। वह लंबे समय से भारतीय महिला हॉकी की महत्वपूर्ण सदस्य रही हैं और बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में टीम की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं।
यह उनका तीसरा हॉकी वर्ल्ड कप है। वह दो ओलंपिक और तीन एशियन गेम्स में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। मुश्किल मुकाबलों में गोलकीपर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है और चीन जैसी आक्रामक टीम के सामने सविता के अनुभव की परीक्षा होगी।
चीन अगर शुरुआती मिनटों में दबाव बनाने में सफल होता है, तो भारतीय डिफेंस को सविता के नेतृत्व में बेहद अनुशासित रहना होगा। पेनल्टी कॉर्नर और सर्कल के अंदर चीन के हमलों को रोकना भारत की रणनीति का अहम हिस्सा होगा।

दीपिका और नवनीत से गोल की उम्मीद
भारतीय टीम की आक्रमण पंक्ति में दीपिका पर भी खास नजर रहेगी। ड्रैग-फ्लिकर दीपिका ने 2026 नेशंस कप में छह गोल किए थे और भारत को उस टूर्नामेंट का चैंपियन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
पेनल्टी कॉर्नर भारत के लिए लंबे समय से गोल का प्रमुख जरिया रहे हैं। ऐसे में चीन के खिलाफ भी दीपिका की भूमिका अहम हो सकती है। उनके अलावा नवनीत कौर का अनुभव भारतीय फॉरवर्ड लाइन को मजबूती देता है। नवनीत ने एशिया कप और वर्ल्ड कप क्वालीफायर्स में भी गोल किए हैं।
भारत को चीन के मजबूत डिफेंस के खिलाफ सिर्फ पेनल्टी कॉर्नर पर निर्भर रहने के बजाय फील्ड गोल के मौके भी बनाने होंगे। तेज पासिंग, विंग से आक्रमण और सर्कल में सही पोजिशनिंग भारत के लिए निर्णायक हो सकती है।
कप्तान सलीमा टेटे के सामने बड़ी जिम्मेदारी
भारतीय टीम की कप्तानी सलीमा टेटे कर रही हैं। युवा कप्तान के सामने टीम को बड़े मंच पर शांत और आक्रामक दोनों बनाए रखने की जिम्मेदारी होगी।
सलीमा की गति और गेंद पर नियंत्रण भारतीय आक्रमण को गति देने में अहम भूमिका निभा सकता है। चीन के खिलाफ भारत को मिडफील्ड में नियंत्रण बनाए रखना होगा, क्योंकि गेंद पर पकड़ कमजोर पड़ने की स्थिति में चीन तेजी से काउंटर अटैक कर सकता है।
टीम के मुख्य कोच डच कोच शोर्ड मारिने हैं। उन्होंने भारतीय महिला टीम के साथ काम करते हुए खिलाड़ियों की फिटनेस, संरचना और निरंतरता पर जोर दिया है। उनका लक्ष्य टीम को विश्व स्तर पर शीर्ष आठ में पहुंचाना बताया गया है।
11 खिलाड़ी पहली बार खेलेंगी वर्ल्ड कप
भारतीय टीम की सबसे दिलचस्प विशेषताओं में से एक उसका अनुभव और युवाओं का संतुलन है। 20 सदस्यीय स्क्वाड में 11 खिलाड़ी ऐसी हैं जो पहली बार महिला हॉकी वर्ल्ड कप में हिस्सा लेंगी।
युवा खिलाड़ियों के लिए यह विश्व हॉकी के सबसे बड़े मंचों में से एक पर खुद को साबित करने का मौका है। वहीं सविता, नवनीत, निक्की प्रधान, सलीमा टेटे और अन्य अनुभवी खिलाड़ियों की जिम्मेदारी नए खिलाड़ियों को दबाव से बाहर रखने की भी होगी।
भारत के लिए यह बदलाव भविष्य की टीम तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। युवा खिलाड़ियों को चीन जैसी मजबूत टीम के खिलाफ खेलने का अनुभव आगे के अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में काफी काम आ सकता है।
भारत के लिए हर मैच महत्वपूर्ण
पूल डी में भारत के तीनों मुकाबले महत्वपूर्ण हैं। चीन के बाद भारत का सामना दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड से होगा। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार भारत 18 अगस्त को दक्षिण अफ्रीका और 20 अगस्त को इंग्लैंड के खिलाफ खेलेगा।
ऐसे में चीन के खिलाफ जीत भारत को पूल में मजबूत स्थिति दिला सकती है। अगर भारत अंक हासिल करता है, तो अगले दोनों मुकाबलों में टीम कम दबाव के साथ अपनी रणनीति लागू कर सकेगी। लेकिन हार की स्थिति में इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मुकाबले बेहद महत्वपूर्ण हो जाएंगे।
विश्व कप में बेहतर प्रदर्शन पर भारत की नजर
भारतीय महिला टीम का वर्ल्ड कप इतिहास बहुत लंबा है, लेकिन टूर्नामेंट में उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1974 में चौथे स्थान के रूप में आया था। 2018 में भारत आठवें और 2022 में नौवें स्थान पर रहा था। इस बार टीम का लक्ष्य पिछले प्रदर्शन में सुधार करना है।
टोक्यो ओलंपिक में ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद भारतीय महिला हॉकी से उम्मीदें काफी बढ़ी हैं। अब वर्ल्ड कप में टीम के सामने उन उम्मीदों को प्रदर्शन में बदलने की चुनौती है। चीन के खिलाफ पहला मैच इस अभियान की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकता है।
चीन के खिलाफ भारत को किन क्षेत्रों में सुधार करना होगा?
भारत को सबसे पहले डिफेंस में अनुशासन बनाए रखना होगा। चीन के तेज हमलों के सामने गेंद गंवाने से बचना जरूरी होगा। इसके अलावा पेनल्टी कॉर्नर हासिल करने के साथ उन्हें गोल में बदलना भी महत्वपूर्ण रहेगा।
मिडफील्ड में गेंद पर नियंत्रण और फॉरवर्ड खिलाड़ियों के बीच बेहतर तालमेल भारत के लिए मैच का रुख बदल सकता है। सविता की गोलकीपिंग, दीपिका की ड्रैग-फ्लिक और सलीमा टेटे की कप्तानी भारत के प्रमुख हथियार होंगे।
दूसरी ओर चीन की ओलंपिक रजत पदक वाली टीम के खिलाफ मानसिक मजबूती भी उतनी ही जरूरी होगी। भारतीय टीम अगर शुरुआती दबाव को संभाल लेती है और अपने मौकों का फायदा उठाती है, तो वह चीन को कड़ी चुनौती दे सकती है।
महिला हॉकी वर्ल्ड कप में भारत का पहला मुकाबला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह टीम को तुरंत अपनी तैयारियों की असली परीक्षा देने का मौका देगा। अब नजरें इस बात पर होंगी कि सलीमा टेटे की अगुआई वाली भारतीय टीम चीन की चुनौती का किस तरह सामना करती है और विश्व कप अभियान की शुरुआत किस नतीजे के साथ करती है।











