ठाणे सिटी पुलिस ने महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के प्रश्नपत्र लीक मामले में 18 आरोपियों के खिलाफ करीब 3,500 पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की है। पुलिस की जांच के अनुसार पेपर लीक की शुरुआत आगरा स्थित महिम पैटर्न प्राइवेट लिमिटेड की प्रिंटिंग प्रेस से हुई, जहां महाराष्ट्र TET के गोपनीय प्रश्नपत्रों की छपाई की जा रही थी।
महाराष्ट्र TET की परीक्षा 28 जून 2026 को प्रस्तावित थी। महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद ने प्रश्नपत्रों की छपाई की जिम्मेदारी आगरा के हरीपर्वत क्षेत्र स्थित महिम पैटर्न प्राइवेट लिमिटेड को दी थी। जांच के मुताबिक 15 से 17 जून के बीच प्रेस में प्रश्नपत्रों की छपाई चल रही थी। इसी दौरान प्रेस के कुछ कर्मचारियों ने कथित तौर पर प्रश्नपत्र बाहर निकालने की योजना बनाई।
चार्जशीट के अनुसार, छपाई के दौरान स्याही हल्की होने या प्रिंटिंग में छोटी-मोटी गड़बड़ी वाले कुछ पन्नों को अलग करके डिस्पोजल बॉक्स में डाल दिया जाता था। इन खराब या रिजेक्ट किए गए पन्नों का नियमित हिसाब नहीं रखा जाता था। पुलिस का आरोप है कि कर्मचारियों ने इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर प्रश्नपत्रों के सेट हासिल किए और उन्हें प्रेस से बाहर निकालने का तरीका खोजा।
पुलिस के मुताबिक प्रश्नपत्रों को छोटे आकार में मोड़कर जूतों के इनसोल के नीचे छिपाया गया था। प्रेस से बाहर निकलते समय सुरक्षा गार्ड कर्मचारियों के कपड़ों और दूसरे सामान की तलाशी लेते थे, लेकिन जूतों के इनसोल की जांच नहीं होती थी। आरोप है कि इसी सुरक्षा कमी का फायदा उठाकर प्रश्नपत्र प्रेस से बाहर ले जाए गए। रिपोर्टों के अनुसार दो कर्मचारियों ने प्रश्नपत्र बाहर निकाले, जबकि एक पूर्व कर्मचारी की भूमिका भी सामने आई है।
चार्जशीट में पेपर लीक नेटवर्क को आगरा से बिहार तक जुड़ा बताया गया है। पुलिस के अनुसार प्रेस से निकाले गए प्रश्नपत्र पहले बिहार में सोनू सिंह तक पहुंचे और इसके बाद कथित तौर पर मुख्य आरोपी बिजेंद्र गुप्ता तक पहुंचाए गए। जांच के दौरान बिहार में गुप्ता के एक रिश्तेदार के घर से मूल प्रश्नपत्र बरामद होने की बात भी सामने आई है। पुलिस ने इस बरामदगी को मामले की कड़ी जोड़ने वाले साक्ष्यों में शामिल किया है।
पुलिस ने बिजेंद्र गुप्ता को नेटवर्क का कथित मुख्य आरोपी बताया है। रिपोर्टों के मुताबिक गुप्ता पहले कोचिंग संस्थान में शिक्षक रह चुका है और जांच में उसका नाम दूसरे परीक्षा पेपर लीक मामले में भी सामने आने की बात कही गई है। हालांकि इन आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के बाद होगा। पुलिस ने गुप्ता समेत 18 लोगों को आरोपी बनाया है। इनमें से अधिकांश की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि दो आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं।
जांच में पुलिस ने आरोपियों के बयानों के साथ आर्थिक लेनदेन और तकनीकी साक्ष्यों को भी शामिल किया है। चार्जशीट में प्रश्नपत्रों की आवाजाही, आरोपियों के बीच संपर्क और पैसों के लेनदेन से संबंधित जानकारी शामिल किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार कर्मचारियों को शुरुआत में आठ हजार रुपये दिए गए थे। इसके अलावा प्रश्नपत्रों को आगे बेचकर होने वाली कमाई में हिस्सेदारी और जमीन खरीदने के लिए रकम देने का लालच दिए जाने का आरोप है।
रिपोर्ट के मुताबिक प्रेस में काम करने वाले कर्मचारियों की मासिक आय लगभग 12 से 15 हजार रुपये के बीच थी। जांच में आरोप है कि प्रश्नपत्र चोरी के बदले तत्काल मिलने वाली रकम और भविष्य में जमीन या बड़ी कमाई का लालच उन्हें नेटवर्क में शामिल करने के लिए इस्तेमाल किया गया।
महाराष्ट्र TET के प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए अलग-अलग सेट तैयार किए गए थे। रिपोर्टों के अनुसार दो प्रश्नपत्रों के लिए कुल चार सेट बनाए गए थे, ताकि परीक्षा के दिन निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनमें से सेट का चयन किया जा सके। जांच एजेंसी का आरोप है कि पेपर लीक करने वालों ने इन सभी सेटों तक पहुंच बनाई और उन्हें प्रेस से बाहर निकाल लिया।
पेपर लीक की जानकारी सामने आने के बाद ठाणे पुलिस ने आरोपियों तक पहुंचने के लिए कार्रवाई शुरू की। पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ लोग परीक्षा के प्रश्नपत्र बेचने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने कथित खरीदार बनकर कार्रवाई की। एक रिपोर्ट के अनुसार भिवंडी इलाके में डिकॉय ऑपरेशन के दौरान चार सेट प्रश्नपत्र बरामद किए गए थे। बाद में महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद के अधिकारियों से उनका मिलान कराया गया और उन्हें वास्तविक प्रश्नपत्र से संबंधित बताया गया।
जांच आगे बढ़ने पर मामले के तार आगरा से बिहार तक जुड़े पाए गए। आगरा में प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारियों से पूछताछ की गई और उनके बयानों के आधार पर प्रश्नपत्र की आगे की सप्लाई चेन की जांच की गई। बिहार में प्रश्नपत्र की बरामदगी के बाद पुलिस ने नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की।
इस मामले में पुलिस ने आगरा की प्रिंटिंग प्रेस से जुड़े नरेश कुमार, बाबूलाल कुशवाह और पूर्व कर्मचारी संजय शर्मा को गिरफ्तार किया था। जांच रिपोर्टों के अनुसार प्रेस से बाहर निकाला गया प्रश्नपत्र बिहार में सोनू सिंह तक पहुंचा और वहां से कथित तौर पर बिजेंद्र गुप्ता तक गया। पुलिस ने इस पूरी कड़ी को चार्जशीट में शामिल किया है। हालांकि किस व्यक्ति की किस स्तर पर क्या भूमिका थी, इसका अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों के आधार पर होगा।
जांच के दौरान पुलिस को यह आशंका भी मिली कि आरोपी आगे एक और परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक करने की तैयारी में थे। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक जांच में महाराष्ट्र की स्टेट एलिजिबिलिटी टेस्ट (SET) परीक्षा के प्रश्नपत्र को भी निशाना बनाने की बात सामने आई है। यह परीक्षा 27 सितंबर 2026 को प्रस्तावित है। इस पहलू की पुलिस आगे जांच कर रही है और यह देखा जा रहा है कि आरोपियों की योजना किस स्तर तक पहुंची थी।
ठाणे पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक 18 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी जांच पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। दो आरोपी अभी फरार बताए गए हैं और उनकी तलाश जारी है। पुलिस ने आगे की जांच के आधार पर पूरक चार्जशीट दाखिल करने की संभावना भी जताई है। जांच के दौरान सामने आने वाले नए साक्ष्यों, नए आरोपियों या नेटवर्क की अतिरिक्त कड़ियों को बाद की कार्रवाई में शामिल किया जा सकता है।
इस मामले में आरोप है कि प्रश्नपत्रों की छपाई के दौरान रिजेक्ट पन्नों के निस्तारण और कर्मचारियों की तलाशी में मौजूद कमियों का फायदा उठाया गया। जूतों के इनसोल की तलाशी नहीं होने को भी प्रश्नपत्र बाहर निकालने के लिए इस्तेमाल की गई सुरक्षा कमी के तौर पर बताया गया है।
करीब 3,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामले में न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। चार्जशीट में दर्ज आरोप, बरामद प्रश्नपत्र, आर्थिक लेनदेन, तकनीकी साक्ष्य और आरोपियों के बयानों की अदालत में जांच होगी। पुलिस द्वारा आरोपी बनाए गए लोगों के खिलाफ आरोप अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं और उन्हें दोषी तभी माना जाएगा जब अदालत में आरोप साबित हों। जांच एजेंसी का दावा है कि उसके पास पेपर लीक की कड़ी को आगरा की प्रिंटिंग प्रेस से बिहार और आगे प्रश्नपत्र की बिक्री तक जोड़ने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं।






