महायुति पार्षद चुनावमाथि मनसेको उजुरी

महायुति पार्षद चुनावमाथि मनसेको उजुरी
अन्तिम अपडेट: 05-01-2026

महायुति का ६६ पार्षद निर्विरोध निर्वाचित हुए। MNS ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की, आरोप लगाया कि जीत धन और दबाव के बल पर हुई। कोर्ट आज इस याचिका की सुनवाई करेगी।

मुम्बई: महाराष्ट्र के नगर निगम चुनाव में महायुति के ६६ पार्षदों की निर्विरोध जीत अब कानूनी विवादों में फंस सकती है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने इस संबंध में बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर करने का फैसला किया है। मनसे नेता अविनाश जाधव ने आरोप लगाया कि यह जीत धन के बल पर हासिल की गई और कई उम्मीदवारों को विरोधियों के नामांकन वापस लेने के लिए करोड़ों रुपये की पेशकश की गई।

६६ पार्षदों की जीत पर मनसे का आरोप

मनसे नेता अविनाश जाधव ने कहा कि महानगरपालिका चुनाव में जो ६६ पार्षद निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं, उनकी जीत में धन का बड़ा हाथ है। उन्होंने बताया कि ५ से ८ करोड़ रुपये देकर विरोधी उम्मीदवारों को नामांकन वापस लेने के लिए कहा गया। जाधव के अनुसार, कुछ उम्मीदवारों पर दबाव भी बनाया गया और उनके पास इस संदर्भ में सबूत भी मौजूद हैं।

जाधव ने यह भी कहा कि यदि कोर्ट मामले की सुनवाई करे, तो यह साबित हो सकता है कि महायुति के पार्षदों की निर्विरोध जीत निष्पक्ष नहीं थी। उनका कहना है कि जनता और लोकतंत्र की भावना के साथ खिलवाड़ हुआ है और ऐसे मामलों को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

महायुति के निर्विरोध उम्मीदवारों का आंकड़ा

महानगरपालिका चुनाव में महायुति के कुल ६८ उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। इसमें बीजेपी के ४४, शिंदे सेना के २२ और एनसीपी (अजित पवार गुट) के २ उम्मीदवार शामिल हैं। यह निर्विरोध जीत महाराष्ट्र की राजनीति में महायुति की साख और शक्ति को दर्शाती है, लेकिन मनसे का आरोप इसे विवादास्पद बना रहा है।

बीएमसी चुनाव में ठाकरे बंधुओं की चुनौती

वहीं, मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव में महायुति को चुनौती ठाकरे बंधुओं की जोड़ी दे रही है। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने एक मंच पर आकर महायुति को सीधे टक्कर दी है। इस बार चुनाव में ८७ ऐसी सीटें हैं, जहां शिंदे सेना और ठाकरे बंधुओं के उम्मीदवार आमने-सामने हैं। इन सीटों में अधिकांश मराठी बहुल इलाके शामिल हैं, जो राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

मुंबई की कुल २२७ सीटों पर लगभग १,७०० उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। चुनाव में मुख्य मुद्दे 'प्रॉपर्टी टैक्स माफी', 'लाडली बहना' जैसी योजनाएं और स्थानीय विकास संबंधी वादे हैं। इन मुद्दों के आधार पर मतदाता अपने निर्णय करेंगे कि शहर में किस पार्टी का वर्चस्व बना रहेगा।

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