भारत में जल्द ही दुनिया का सबसे लंबा रोपवे बनने जा रहा है, जो शिमला को परवाणू से जोड़ेगा। इस रोपवे की कुल लंबाई 40.73 किलोमीटर होगी और यह परियोजना हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की जा रही है। रोपवे के शुरू होने के बाद हर घंटे लगभग 2,000 लोग यात्रा कर सकेंगे।
शिमला: हिमाचल प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने और ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात पाने के लिए राज्य सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। हिमाचल में दुनिया का सबसे लंबा रोपवे बनने की योजना है। यह रोपवे शिमला से परवाणू तक बनाया जाएगा। हर साल देश-विदेश से लाखों पर्यटक हिमाचल प्रदेश घूमने और मौज-मस्ती के लिए आते हैं, जिससे कई प्रमुख स्थानों पर ट्रैफिक जाम की समस्या हो जाती है। इस रोपवे परियोजना का मुख्य उद्देश्य पर्यटकों की आवाजाही को आसान और सुगम बनाना है।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
हिमाचल प्रदेश में हर साल लाखों पर्यटक आते हैं, जिनके कारण शिमला जाने वाले मुख्य राजमार्ग पर ट्रैफिक जाम की समस्या बनी रहती है। नए रोपवे के निर्माण से पर्यटकों को यात्रा में सहूलियत होगी और यात्रा का समय भी कम हो जाएगा। वर्तमान में परवाणू से शिमला तक सड़क मार्ग से यात्रा करने में 2 से 3 घंटे लगते हैं, जबकि रोपवे से यह यात्रा बेहद कम समय में पूरी की जा सकेगी।
रोपवे की विशेषताएँ और अनुमानित लागत
इस परियोजना को बनाने में लगभग 5,600 करोड़ रुपये का खर्च आएगा और इसे पूरा करने में पांच साल का समय लगेगा। इलेक्ट्रिक रोपवे का उपयोग पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाएगा। इस मार्ग में कुल 11 स्टेशन होंगे और प्रत्येक दिशा में प्रति घंटे 904 यात्री यात्रा कर सकेंगे। एक रोपवे केबिन में 8-10 लोग सफर कर पाएंगे।
परियोजना की जिम्मेदारी और संभावनाएँ
राज्य सरकार ने इस परियोजना का जिम्मा रोपवे और रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (RTDC) को सौंपा है। यह कॉरपोरेशन न केवल निर्माण और संचालन की जिम्मेदारी निभाएगा बल्कि टिकट बिक्री और स्टेशनों पर वाणिज्यिक स्थानों को पट्टे पर देकर आय भी उत्पन्न करेगा। इस रोपवे के शुरू होने से न केवल शिमला के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि आम नागरिकों और पर्यटकों को भी यात्रा में सहूलियत होगी।