सचमुच स्वर कोकिला लता मंगेशकर के जाने से एक युग का अंत हो गया ,आइये उनके जीवन परिचय से आपको रूबरू कराते है |

सचमुच स्वर कोकिला लता मंगेशकर के जाने से एक युग का अंत हो गया ,आइये उनके जीवन परिचय से आपको रूबरू कराते है |
Last Updated: Sat, 18 Feb 2023

सचमुच स्वर कोकिला लता मंगेशकर के जाने से एक युग का अंत हो गया ,आइये उनके जीवन परिचय से आपको रूबरू कराते है sachamuch svar kokila lata mangeshakar ke jaane se ek yug ka ant ho gaya ,aaiye unake jeevan parichay se aapako roobaroo karaate hai 

 
 

लता मंगेशकर भारत की सबसे प्रिय और श्रद्धेय गायिका हैं, जिनका छह दशक लंबा करियर उपलब्धियों से भरा है। हालाँकि लता जी ने लगभग तीस भाषाओं में गाना गाया है, लेकिन उनकी पहचान एक पार्श्व गायिका के रूप में भारतीय सिनेमा से जुड़ी हुई है। फिल्म गायन में उनका अपनी बहन आशा भोसले के साथ सहयोग का सबसे महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

लता मंगेशकर का हर गाना अपने आप में एक उत्कृष्ट कृति है। उनकी आवाज़ में माधुर्य, लय और गीतात्मक अर्थ का सम्मिलन मिठास और आकर्षण का एक अनूठा मिश्रण पैदा करता है जो सुनते ही दिल की गहराइयों में गूंज उठता है। उनका गायन एक तरह से पवित्रता का प्रतीक है जो अपनी मधुर सुंदरता से हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देता है। भारतीय संगीत में विशिष्टता और लोकप्रियता की सीमाएं लांघने वाली लता जी की आवाज में सुकुमारता और मधुरता का दुर्लभ सामंजस्य झलकता है। उनके गायन में पवित्रता का झरना फूट पड़ता है, जो अपने मधुर आकर्षण से सबको मंत्रमुग्ध कर देता है। लता जी के गाने सुनकर संगीत की पूर्णता प्राप्त होती है। उन्हें न केवल 'दादा साहब फाल्के पुरस्कार,' 'पद्म श्री,' और 'भारत रत्न' जैसी उपाधियों से सम्मानित किया गया है, बल्कि उन्हें कई अन्य पुरस्कारों और प्रशंसाओं से भी सम्मानित किया गया है। हर भारतीय को उन पर गर्व है।'

 

लता मंगेशकर का जन्म और प्रारंभिक जीवन

ये भी पढ़ें:-

लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 को मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में हुआ था। उनके पिता, दीनानाथ मंगेशकर, एक मराठी थिएटर अभिनेता, संगीतकार और गायक थे। लता मंगेशकर की मां का नाम शेवंती मंगेशकर था। उनके भाई का नाम हृदयनाथ मंगेशकर है, जो एक संगीत निर्देशक हैं। लता मंगेशकर की बहनें उषा मंगेशकर, आशा भोसले और मीना खादीकर हैं, जो सभी पार्श्व गायिका हैं। लता मंगेशकर का नाम भूपेन हजारिका के साथ कई बार जुड़ा, लेकिन उन्होंने कभी शादी नहीं की।

 

लता मंगेशकर का करियर

लता मंगेशकर भारत के साथ-साथ दुनिया की सबसे प्रसिद्ध और सम्मानित पार्श्व गायिकाओं में से एक हैं। महान गायिका लता मंगेशकर ने एक हजार से अधिक हिंदी फिल्मों के लिए गाने रिकॉर्ड किए हैं। लता मंगेशकर की मखमली, मधुर और सुरीली आवाज उनकी लोकप्रियता का मुख्य कारण है। उन्होंने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपने पिता से प्राप्त की। जब लता पांच साल की थीं, तब उन्होंने अपने पिता के नाटकों में अभिनेत्री के रूप में काम करना शुरू कर दिया था। लता मंगेशकर ने अपने करियर की शुरुआत 13 साल की उम्र में 1942 में की थी। उन्होंने अपना पहला गाना मराठी फिल्म "किटी हसल" के लिए रिकॉर्ड किया था। लता मंगेशकर ने विभिन्न भारतीय भाषाओं में 30,000 से अधिक गाने गाए हैं। उन्हें भारतीय सिनेमा की सबसे महान गायिकाओं में से एक माना जाता है और उन्हें 2001 में भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

 

हार्डिकर से मंगेशकर तक

पंडित दीनानाथ का उपनाम हार्डिकर था, जिसे उन्होंने बदलकर मंगेशकर कर लिया। वे गोवा के मंगेशी में रहते थे, जिससे उनका नया उपनाम प्रेरित हुआ। जन्म के समय लता का नाम हेमा था, जिसे बदलकर लता कर दिया गया। दीनानाथ को यह नाम उनके नाटक 'भावबंधन' की पात्र लतिका ने सुझाया था। लता के बाद मीना, आशा, उषा और हृदयनाथ का जन्म हुआ।

मधुर सौंदर्य की लहरों में डूबी लताजी की गायकी इतनी जादुई है कि हर कोई अपने कानों में पड़ते ही गीत के संपूर्ण सार को उसकी संपूर्ण भावनाओं के साथ अनुभव कर लेता है। गणतंत्र दिवस पर जब लता ने प्रधान मंत्री नेहरू के सामने भावनाओं से भरा देशभक्ति गीत "ऐ मेरे वतन के लोगों" गाया, तो वह अपने आँसू नहीं रोक सकीं। चाहे वह प्यार हो, अलगाव हो, पुनर्मिलन हो, भक्ति हो, देशभक्ति हो, या जीवन की कोई अन्य भावना हो, लताजी ने सभी के साथ न्याय किया है।

 

सम्मान और पुरस्कार

लता मंगेशकर को कई पुरस्कार और सम्मान मिले। 1970 के बाद उन्होंने जितना स्वीकार किया उससे कहीं अधिक उन्होंने अस्वीकार कर दिया। उन्होंने सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका का पुरस्कार यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि इसके बजाय यह नए गायकों को दिया जाना चाहिए। लता मंगेशकर को मिले कुछ प्रमुख पुरस्कार और सम्मान इस प्रकार हैं:

 

भारत सरकार पुरस्कार

1969 - पद्म भूषण

1989 - दादा साहब फाल्के पुरस्कार

1999 - पद्म विभूषण

2001 - भारत रत्न

राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार

1972 - फ़िल्म "परिचय" के गीतों के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका का राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार।

1974 - फ़िल्म "कोरा कागज़" के गीतों के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका का राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार।

1990 - फिल्म "लेकिन" के गानों के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार।

 

फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार

1959 - "आजा रे परदेसी" (मधुमती)

1963 - "काहे दिया परदेस" (अनपढ़)

1966 - "तुम मेरे मंदिर तुम मेरी पूजा" (खानदान)

1970 - "आप मुझे अच्छे लगने लगे" (जीने की राह)

1993 - फ़िल्मफ़ेयर लाइफ़टाइम अचीवमेंट पुरस्कार

1994 - गीत "दीदी तेरा देवर दीवाना" (हम आपके हैं कौन..!) के लिए विशेष पुरस्कार।

2004 - फ़िल्मफ़ेयर विशेष पुरस्कार: फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कारों के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक स्वर्णिम ट्रॉफी प्रदान की गई।

 

लता मंगेशकर की लव स्टोरी

लता जी आजीवन अविवाहित रहीं, लेकिन कहा जाता है कि डूंगरपुर के राजशाही राज सिंह से उनकी गहरी मित्रता थी। वे दोनों एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे, लेकिन राजा होने के कारण राज सिंह अपने परिवार के वचन से बंधे थे कि वह किसी साधारण लड़की से शादी नहीं करेंगे, जिसे उन्होंने ईमानदारी से निभाया और दोनों आजीवन अविवाहित रहे।

मुहम्मद रफी साहब द्वारा गाय गया कालगीत,

‘तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे….!

हाँ तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे…!

जब कभी भी सुनोगे गीत मेरे…..!

संग संग तुम भी गुनगुनाओगे….!

हाँ तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे…

हो तुम मुझे यूँ …..

अश्रुपूरित विनम्र श्रद्धांजलि ।

Leave a comment

ट्रेंडिंग