संसद में आज वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया जाएगा, जो दोपहर 12 बजे से चर्चा के लिए लाया जाएगा। यह विधेयक बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में तय किए गए समय के अनुसार पेश किया जाएगा।
नई दिल्ली: संसद में आज, बुधवार को वक्फ संशोधन बिल पेश किया जाएगा। मंगलवार को हुई बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में इस बिल को लोकसभा में पेश करने का निर्णय लिया गया। यह बिल दोपहर 12 बजे लोकसभा में रखा जाएगा, और इस पर 6 से 8 घंटे तक चर्चा होने की संभावना है। बैठक में विपक्षी दलों के सदस्य भी शामिल हुए, जिन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह विपक्ष से जुड़े मुद्दों को लेकर गंभीर नहीं है। इस बिल को लेकर राजनीतिक हलकों में विवाद बढ़ता जा रहा है, और विपक्षी दलों ने इसे सरकार की मनमानी और संवैधानिक प्रक्रिया का उल्लंघन बताया है।
पक्ष-विपक्ष में तनातनी
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने सभी सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है, जिसमें उन्हें सदन में मौजूद रहने और विधेयक के पक्ष में मतदान करने का निर्देश दिया गया है। वहीं, विपक्षी दलों ने सरकार के इस रुख पर नाराजगी जताई है और आरोप लगाया है कि सरकार विपक्षी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार नहीं है।
बीजू जनता दल (BJD) के सांसद सस्मित पात्रा ने विधेयक की प्रतियां अभी तक वितरित न होने की शिकायत करते हुए कहा कि उनके दल को विधेयक की बारीकियों पर गहरी चिंताएं हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या विपक्ष की राय को विधेयक में उचित तरीके से समाहित किया गया है।
चंद्रशेखर आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के सांसद चंद्रशेखर ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि यदि सरकार तैयार है तो वे भी इसका विरोध करने के लिए तैयार हैं। उनका कहना था कि यह धार्मिक स्वतंत्रता का मामला है और संविधान के अनुच्छेद 25 का उल्लंघन कर सरकार इसे प्रभावित करना चाहती है।
बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक
बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक से विपक्षी दलों ने वॉकआउट किया और आरोप लगाया कि सरकार उनके मुद्दों को नजरअंदाज कर रही है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, "हमने बैठक से वॉकआउट किया क्योंकि सरकार विपक्ष की आवाज को सुनने के बजाय अपने एजेंडे को थोप रही है।" इस बीच, विपक्षी दलों ने वक्फ बिल, मणिपुर में राष्ट्रपति शासन और वोटर कार्ड को आधार से जोड़ने जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की मांग की, लेकिन सरकार ने इनमें से किसी पर भी चर्चा करने से इनकार कर दिया। विपक्ष का कहना है कि सरकार हाउस को अपनी मर्जी से चला रही है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं।