महेंद्र सिंह धोनी की जीवनी

महेंद्र सिंह धोनी की जीवनी
Last Updated: Mon, 20 Feb 2023

महेंद्र सिंह धोनी या एम एस धोनी सबसे लोकप्रिय भारतीय क्रिकेटरों में से एक हैं और आज ये एक कामयाब खिलाड़ी हैं। लेकिन क्रिकेटर बनने की राह धोनी के लिए इतनी आसान नहीं थी और एक साधारण इंसान से महान क्रिकेटर बनने के लिए इन्हें अपने जीवन में काफी संघर्ष करना पड़ा था। धोनी ने क्रिकेट खेलने की शुरुआत अपने स्कूलों के दिनों से ही कर दी थी, लेकिन इंडियन टीम का हिस्सा बनने में इनको कई साल लग गए । लेकिन जैसे ही धोनी को हमारे देश की ओर से खेलने का मौका मिला, तो इन्होंने इस मौके का बखूबी उपयोग किया और धीरे-धीरे अपने आपको को क्रिकेट की दुनिया में स्थापित कर लिया। 

जन्म और शुरुआती जीवन

महेंद्र सिंह धोनी का जन्म रांची, झारखण्ड (तब बिहार) में 7 जुलाई 1981 को हुआ था। महेंद्र सिंह धोनी के पिता का नाम पान सिंह धोनी एवं इनकी माता का नाम देवकी धोनी है। एम.एस. धोनी का एक बड़ा भाई और एक बहन भी है। धोनी के भाई का नाम नरेन्द्र सिंह धोनी तथा बहन का नाम जयंती है। धोनी एक मध्यमवर्गी परिवार से थे। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा रांची के जवाहर विद्या मंदिर स्कूल से पूर्ण की। धोनी के पिता एक स्टील बनाने वाली कंपनी में काम करते थे। 

धोनी को बचपन से ही क्रिकेट के बजाए फुटबॉल पसंद था पर, इनके कोच ठाकुर दिग्विजय सिंह ने इन्हें क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित किया। धोनी को फुटबॉल टीम में एक गोलकीपर के तौर पर खेलते थे। यही देखकर कोच ने उन्हें क्रिकेट में एक विकेट कीपर के तौर पर खेलने को कहा गया। धोनी ने अपने माता पिता की सहमती लेकर क्रिकेट खेलना शुरू किया। 2001-2003 में धोनी पहली बार कमांडो क्रिकेट क्लब की ओर से खेले वहां पर उनकी विकेट कीपिंग को देखकर सभी ने उनकी सराहना की। 2003 में धोनी ने खड़कपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन टिकट चेकर के तौर पर भी काम किया। 

महेंद्र सिंह धोनी का करियर

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1998 में भारत के महान किक्रेटर सिर्फ स्कूल और क्लब स्तर क्रिकेट में ही खेल रहे थे तभी उन्हें केन्द्रीय कोयला फील्ड लिमिटेड टीम में खेलने के लिए चुना गया। इस दौरान उन्होनें बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के पूर्व राष्ट्रपति देवल सहाय को अपनी सच्चे दृढ़संकल्प, मेहनत और अपने बेहतरीन प्रदर्शन से बेहद प्रभावित किया। जिसके बाद उन्होनें प्रथम श्रेणी क्रिक्रेट में खेलने के मौके दिए।

1998-99 सीज़न के दौरान, वह इसे पूर्वी जोन यू -19 टीम या बाकी भारतीय टीम बनाने में नाकाम रहे, लेकिन अगले सीजन में उन्हें सीके नायडू ट्रॉफी के लिए पूर्वी जोन यू -19 टीम के लिए चुना गया था। दुर्भाग्य से इस बार धोनी की टीम ने अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई इस लिए  उनकी टीम नीचले स्तर पर आ गई।

रणजी ट्रॉफी की शुरुआत 

महेंद्र सिंह धोनी ने 1999 -2000 सीज़न के दौरान उन्हें रणजी ट्रॉफी में खेलने का अवसर मिला। यह रणजी ट्रॉफी मैच बिहार की तरफ से असम क्रिक्रेट टीम के खिलाफ खेला गया था। इस मैच की दूसरी पारी ने महेंद्र सिंह धोनी ने नाबाद 68 रन बनाया। उन्होनें अगली सीजन में बंगाल के खिलाफ मैच खेला था। जिसमें उन्होनें शतक मारा था लेकिन फिर भी उनकी टीम ये मैच हार गई थी। इस ट्रॉफी के इस सत्र में इन्होनें कुल 5 मैचों में 283 रन बनाए थे। इस ट्रॉफी के बाद धोनी ने अन्य और घरेलू मैच भी खेले थे।

धोनी के बेहतरीन प्रदर्शन के बाबजूद भी  इनका चयन ईस्ट जॉन सेलेक्टर की तरफ से नहीं किया गया था जिसकी वजह से धोनी ने खेल से दूरी बना ली और नौकरी करने का फैसला लिया। 20 साल की उम्र में, उन्हें खेल कोटा के माध्यम से खड़गपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेवलिंग टिकट परीक्षक (टीटीई) के पद पर नौकरी मिल गई और वे पश्चिम बंगाल के मिदनापुर चले गए। उन्होंने 2001 से 2003 तक रेलवे कर्मचारी के रूप में काम किया। क्योंकि धोनी का मन तो बचपन से ही खेलों में था इसलिए वे ज्यादा दिन तक नौकरी नहीं कर सके।

दिलीप ट्रॉफी खेलने के लिए चयन हुआ।

संन 2001 में  महेंद्र सिंह धोनी का पूर्वी क्षेत्र के लिए दिलीप ट्रॉफी खेलने के लिए चयन हुआ। लेकिन इसकी जानकारी बिहार क्रिकेट एसोसिएशन धोनी को समय पर नहीं दे सका क्योंकि वह उस समय पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में थे। धोनी को इस मैच की जानकारी तब हुई जब उनकी टीम अगरताला पहुंची चुकी थी ये मैच अगरताला में ही खेला जाना था। हालांकि महेंद्र सिंह धोनी के एक दोस्त ने कोलकाता एयरपोर्ट से फ्लाइट पकड़ने के लिए एक कार का इंतजाम करवाया लेकिन आधे रास्तें में ही कार खराब हो जाने के कारण धोनी कोलकाता एयरपोर्ट देर से पहुंचे जिसके कारण धोनी के फ्लाइट मिस हो गया और ये नहीं जा पाए। 

महेंद्र सिंह धोनी देवधर ट्रॉफी टूर्नामेंट

साल 2002-03 के सत्र के दौरान, महेंद्र सिंह धोनी ने रणजी ट्रॉफी और देवधर ट्रॉफी में अच्छा प्रदर्शन करना जारी रखा, जिससे उन्हें क्रिकेट के क्षेत्र में पहचान मिली। 2003 में जमशेदपुर में प्रतिभा संसाधन विकास विंग के हुए मैच में खेलते हुए महेंद्र सिंह धोनी को पूर्व कप्तान प्रकाश पोद्दार ने देखा था जिसके बाद उन्होनें धोनी के खेल की जानकारी राष्ट्रीय किक्रेट अकादमी को दी और इस तरह धोनी का चयन बिहार अंडर-19 टीम में हो गया था। पूर्वी जोन टीम  से, उन्होंने 2003-2004 सीजन में देवधर ट्रॉफी में धोनी पूर्वी जोन की तरफ खेलते हुए अच्छा प्रदर्शन किया और ये मैच जीता और देवधर ट्रॉफी अपने नाम की। इस मैच में उन्होंने एक और शतक बनाया। इस सीजन में धोनी ने कुल 4 मैच खेले थे जिसमें उन्होनें 244 रन बनाए थे।

2003-04 सीजन के दौरान उन्हें जिम्बाब्वे और केन्या के दौरे के लिए ‘इंडिया ए टीम’ के लिए चुना गया था। इंडिया ए टीम’ की तरफ से धोनी ने पहला मैच जिम्बाब्वे इलेवन के खिलाफ विकेट कीपर के तौर पर पर खेला और मैच के दौरान 7 कैच लगाए और स्टंपिंग की। महेन्द्र सिंह धोनी ने अपनी टीम की ‘पाकिस्तान ए’ टीम बैक टू बैक हराने में भी मद्द की। जिसमें धोनी ने अर्धशतक बनाया। इस तरह महेंद्र सिंह धोनी ने तीन देशों के साथ खेले गए मैच में अपना बेहतरीन प्रदर्शन किया जिनकी प्रतिभा को भारतीय राष्ट्रीय टीम के कप्तान सौरव गांगुली ने भी नोटिस किया।

महेंद्र सिंह धोनी का वनडे मैच में करियर

लगातार अपने बेहतरीन प्रदर्शन से प्रभावित करने के बाद साल 2004-2005 में महेंद्र सिंह धोनी का चयन राष्ट्रीय वन डे मैच में हुआ। 

महेंद्र सिंह धोनी ने अपना पहला वनडे मैच बांग्लादेश टीम के खिलाफ खेला था। लेकिन अपने पहले मैच में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सके और महज जीरो पर ही आउट हो गए।

लेकिन खराब प्रदर्शन के बाबजूद भी इनका चयन पाकिस्तान के साथ खेले जाने वाले वनडे मैच सीरीज के लिए कर लिया गया।

इस बार धोनी ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से निराश नहीं होने दिया और इस मैच ने उन्होनें पूरे जोश और जज्बे के साथ पाकिस्तान के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया। इसके साथ ही वे इस मैच में 148 रन बनाकर पहले भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज भी बन गए। इस तरह उन्होनें अपनी बल्लेबाजी से अच्छे विकेटकीपर बल्लेबाज का रिकॉर्ड बनाया।

इसके बाद धोनी ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा अगले सीरीज में श्रीलंका के विरुद्ध खेलते हुए धोनी ने 183 रन बनाए। इसी के साथ उन्होनें इस सीरीज के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए और उनके जोरदार प्रदर्शन के लिए उन्हें मैन ऑफ द सीरीज भी बनाया गया।

सितंबर 2007 में धोनी को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वन जे सीरीज में भारतीय टीम के नेतृत्व करने की कप्तानी सौंपी गई।

2009 में धोनी कई महीनों के लिए आईसीसी ओडीआई बल्लेबाज रैंकिंग के शीर्ष पर भी रहे।

महेंद्र सिंह धोनी ने 2011 के विश्व कप में भारत की जीत का नेतृत्व किया। श्रीलंका के खिलाफ आखिरी मैच में, उन्होंने बल्लेबाजी क्रम में खुद को बढ़ावा दिया और 91 रन की पारी खेलते हुए भारत को 28 वर्षों के बाद विश्व कप जीतने में अहम किरदार निभाया। 

वनडे मैच में धोनी के प्रदर्शन 

धोनी द्वारा खेले गए वन डे मैच 318

कुल खेलीं गई इनिंग 272  

वन डे मैच में बनाए गए कुल रन 9967

वन डे मैच में लगाए गए कुल चौके 770  

वन डे मैच में लगाए गए छक्के 217

वन डे मैच में बनाए गए कुल शतक 10

वन डे मैच में बनाए गए कुल दोहरे शतक 0

वन डे मैच में बनाए गए कुल अर्ध शतक 67

महेंद्र सिंह धोनी का टेस्ट मैच करियर 

धोनी को भारतीय क्रिकेट टीम की ओर से फ़र्स्ट टेस्ट मैच खेलने का अवसर साल 2005 में मिला था और इन्होंने अपना प्रथम मैच श्रीलंका टीम के विरुद्ध खेला था। इस मैच की पहली इनिंग में धोनी ने कुल 30 रन अपने नाम किए थे। मगर बारिश के चलते ये मैच बीच में ही बंद करना पड़ा था। सन 2006 में पाकिस्तान के विरुद्ध खेलते हुए इन्होने अपनी पहली टेस्ट सेंच्युरी लगाए थे। इसी के कारण ही इस टेस्ट मैच में भारत को फॉलो-ऑन से बचने में मदद मिली थी। 

आखिरी टेस्ट मैच

धोनी ने साल 2014 में अपना करियर का अंतिम टेस्ट मैच  ऑस्ट्रलिया टीम के विरुद्ध खेला था। अपने इस अंतिम टेस्ट मैच में इन्होंने  कुल 35 रन बनाए थे.। ये मैच खत्म होने के बाद धोनी ने टेस्ट मैच से सन्यास लेने की जानकारी मीडिया के साथ साझा की थी और इस तरह से ये धोनी के जीवन का आखिर टेस्ट मैच बन गया था। 

धोनी के टेस्ट मैच में प्रदर्शन 

धोनी द्वारा खेले गए कुल टेस्ट मैच 90

कुल खेलीं गई इंनिंग 144  

टेस्ट मैच में बनाए गए कुल रन 4876

टेस्ट मैच में लगाए गए कुल चौके 544  

टेस्ट मैच में लगाए गए छक्के 78

टेस्ट मैच में बनाई गई कुल शतक 6

टेस्ट मैच में बनाए गए कुल दोहरे शतक 1

टेस्ट मैच में बनाए गए कुल अर्ध शतक ३३

महेंद्र सिंह धोनी का टी-20 करियर 

धोनी ने अपना पहला टी- 20 मैच दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेला था और अपने पहले टी 20 मैच में धोनी का प्रदर्शन काफी निराशा जनक रहा था। क्योंकि इस मैच में धोनी ने केवल दो गेंदों का ही सामना किया था और शून्य पर आउट हो गए थे। हालांकि टीम इंडिया ने इस मैच को जीत लिया था। 

धोनी के टी 20 मैच में प्रदर्शन 

धोनी द्वारा खेले गए कुल टी 20 मैच 89

कुल रन 1444

कुल चौके 101  

कुल छक्के 46

कुल शतक 0

कुल अर्ध शतक 2

धोनी का आईपीएल करियर 

आईपीएल के पहले सीजन में धोनी को चेन्नई सुपर किंग्स ने 5 मिलियन अमरीकी डॉलर (10 करोड़) में खरीदा था।  इनकी कप्तानी के तहत इस टीम ने इस लीग के 3 सीजन जीते थे। इसके अलावा इन्होंने साल 2010 के ट्वेंटी 20 की चैंपियंस लीग में भी अपनी टीम को विजय बनाया था। 

चेन्नई सुपर किंग्स पर दो साल का बैन लगाने के बाद इन्हें आईपीएल की दूसरी टीम राइजिंग पुणे सुपरजायंट ने करीब 1.9 मिलियन अमरीकी डॉलर (करीब 12 कोरड़) में खरीद लिया था। जिसके बाद धोनी ने इस टीम की ओर से मैच खेले थे। 

सन 2018 में चेन्नई सुपर किंग पैर लगा बैन हट गया और धोनी फिर से चेन्नई सुपर किंग के साथ बतौर कप्तान जुड़ गए और एक बार फिर चेन्नई सुपर किंग धोनी की कप्तानी में विजयी बानी। 

धोनी द्वारा बनाए गए रिकॉर्ड

धोनी पहले ऐसे भारतीय विकेट कीपर हैं जिन्होंने टेस्ट मैचों में कुल 4,000 रन बनाए हुए हैं। इनसे पहले किसी भी भारतीय विकेट कीपर ने इतने रन नहीं बनाए थे।

भारतीय टीम ने धोनी की कप्तानी में रहते हुए कुल 27 टेस्ट मैच जीते हैं, जिसके साथ ही धोनी के नाम सबसे सफल भारतीय टेस्ट कप्तान होने का रिकॉर्ड है। 

धोनी दुनिया के एक मात्र ऐसे कप्तान हैं जिनके कप्तानी में भारतीय टीम तीन ICC टूर्नामेंट जीत चुकी है। जो कुछ इस प्रकार है।

आईसीसी टूर्नामेंट        किस वर्ष कप जीता 

टी-20 वर्ल्ड कप                      2007

ओडीआई वर्ल्डकप              2011

चैंपियंस ट्रॉफी                     2013

इन्होंने कप्तान के रूप में  कुल 332 इंटरनेशनल मैच खेले हैं और ये पहले ऐसे कप्तान हैं, जिन्होंने सबसे ज्यादा इंटरनेशनल मैच खेले हैं। इन्होने इंटरनेशनल मैचों में 204 छक्के मारे हैं जिसके साथ ही सबसे अधिक छक्के मारने वाले कप्तान का भी अपने नाम रिकॉर्ड किया हैं। कैप्टन के रूप में सबसे अधिक टी 20 मैचों जीतने का कीर्तिमान भी धोनी के नाम ही है। 

महेंद्र सिंह धोनी को मिले अवार्ड 

महेंद्र सिंह धोनी को साल 2007 में इंडिया गवर्नमेंट ने राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड दिया था जो कि खेल की दुनिया में दिया जाने वाला शीर्ष अवार्ड है। 

धोनी को साल 2009 में पदम् श्री अवार्ड और साल 2018 में पदम् भूषण से भी इंडिया की गवर्नमेंट द्वारा नवाजा गया है। 

साल 2011 में धोनी को डी मोंटफोर्ट विश्वविद्यालय द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि दी गई थी। इसके अलावा धोनी ने दो बार आईसीसी ओडीआई प्लेयर ऑफ दी ईयर, मैन ऑफ दी मैच और मैन ऑफ दी सीरीज अवॉर्ड भी जीत रखे हैं.

धोनी के जीवन पर बनी फिल्म

महेंद्र सिंह धोनी के जीवन पर हाल ही में एक फिल्म भी बनाई गई थी। जिसका नाम. ‘एम.एस धोनी: अंटोल्ड स्टोरी’ था और ये फिल्म साल 2016 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में धोनी की जिंदगी को दर्शाया गया था और इनकी भूमिका को एक्टर सुशांत सिंह राजूपत द्वारा निभाया गया था। 

धोनी और साक्षी की लव स्टोरी 

साल 2007 में धोनी कोलकता के एक होटल में अपने साथी खिलाडियों के साथ रुके हुए थे। उसी होटल में साक्षी बतौर एक इंटर्न कार्य कर रही थी और इसी दौरान ये दोनों काफी समय के बाद एक दूसरे से मिले थे। इस मुलाकात के बाद इन दोनों ने एक दूसरे को लंबे समय तक मिलते रहे और लगभग तीन साल तक डेटिंग की फिर इन दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया, साल 2010 में दोनों ने शादी कर ली।  उन दोनों की एक बेटी भी हैं और उसका नाम इन्होंने जीवा रखा। 

महेंद्र सिंह धोनी रिटायरमेंट 

महेंद्र सिंह धोनी ने लोगो को उस दिन चौंका दिया जिस दिन उन्होंने अपने अंतराष्ट्रीय क्रिकेटिंग करियर से संन्यास लेने की घोषणा की। वर्ष 2020.15 अगस्त के दिन था। इस महान खिलाड़ी और सर्वश्रेष्ठ कप्तान ने अंतराष्ट्रीय क्रिकेट से सन्यास की घोषणा कर दी। इस घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर उनके करोड़ो प्रशंसको ने अपना दुःख भी व्यक्त किया और कई बड़े-बड़े लोगो ने उन्हें आने वाले समय के लिए शुभकामनाएँ भी दी।

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