मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के राजनीति में प्रवेश को लेकर चल रही चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। यह चर्चा जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा के बयान के बाद और मजबूत हुई है।
पटना: बिहार की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव के संकेत दे रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर चल रही चर्चाएं अब नए मोड़ पर पहुंच गई हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या अब निशांत कुमार की राजनीति में ग्रैंड एंट्री होने वाली है? क्या उन्हें सीधे डिप्टी मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है? और क्या यह नीतीश कुमार के रिटायरमेंट प्लान का हिस्सा है? हाल के दिनों में जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा के एक बयान के बाद इन अटकलों ने और तेज़ी पकड़ ली है।
संजय झा के बयान से बढ़ी सियासी हलचल
दिल्ली से पटना लौटते समय संजय झा और निशांत कुमार एक ही फ्लाइट में सवार थे। इसी दौरान संजय झा ने मीडिया से कहा कि,
'जेडीयू के हर कार्यकर्ता और नेता की इच्छा है कि निशांत कुमार अब सक्रिय राजनीति में आएं। फैसला उन्हें ही करना है कि वे कब कदम रखेंगे।'
यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि संजय झा जेडीयू के शीर्ष नेतृत्व में गिने जाते हैं। उनके इस संकेत को राजनीतिक गलियारों में नीतीश कुमार के एग्जिट प्लान से जोड़कर देखा जा रहा है।
जनवरी से ही सियासी चर्चा में हैं निशांत कुमार
निशांत कुमार का नाम इस साल जनवरी 2025 से ही लगातार चर्चा में बना हुआ है। पहली बार उन्होंने अपने पैतृक गांव कल्याण बिगहा में आयोजित एक पारिवारिक कार्यक्रम में राजनीतिक बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि, मेरे पिता ने बिहार के लिए बहुत काम किया है और आगे भी उन्हें मुख्यमंत्री बने रहना चाहिए।
इसके बाद जब बीजेपी द्वारा नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाने की अफवाहें उड़ीं, तब भी निशांत ने खुलकर कहा था कि उन्हें एनडीए पर पूरा भरोसा है और नीतीश कुमार को ही अगला मुख्यमंत्री घोषित किया जाना चाहिए।
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क्या सीधे सरकार में मिलेगी एंट्री?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर निशांत कुमार राजनीति में आते हैं तो उनकी भूमिका क्या होगी? राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक तीन संभावनाएं हैं:
- उन्हें जेडीयू संगठन में अहम पद मिल सकता है
- विधान परिषद के जरिए उन्हें सदन में लाया जा सकता है
- सीधे सरकार में शामिल कर डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है
हालांकि, इन सभी संभावनाओं पर अंतिम फैसला नीतीश कुमार को ही लेना है और उन्होंने अब तक इस मुद्दे पर पूरी चुप्पी साध रखी है।
नीतीश कुमार हमेशा से परिवारवाद के खिलाफ मुखर रहे हैं। वे कई बार लालू प्रसाद यादव को इसी मुद्दे पर निशाना बनाते रहे हैं। यही वजह है कि जेडीयू के भीतर भी इसे लेकर दुविधा बनी हुई है कि क्या नीतीश अपने ही बेटे को सत्ता की राजनीति में उतारेंगे। नीतीश कुमार की कार्यशैली को देखते हुए यह भी कहा जाता है कि उनके करीबी सहयोगियों को भी कई बार उनके फैसलों की जानकारी आखिरी वक्त पर ही मिलती है।












