Patna City: पीके का इंतजार, जन सुराज में सन्नाटा

Patna City: पीके का इंतजार, जन सुराज में सन्नाटा

बिहार की राजनीति में इन दिनों रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर को लेकर चर्चाएं तेज हैं। पटना सिटी के राजनीतिक गलियारों में यह सवाल बार-बार उठ रहा है कि क्या पीके किसी बड़े सियासी संकेत का इंतजार कर रहे हैं। उनकी अगुवाई में बनी जन सुराज पार्टी (जसुपा) के आंगन में फिलहाल गहरा सन्नाटा पसरा हुआ है, जिससे समर्थकों और राजनीतिक विश्लेषकों की बेचैनी बढ़ती जा रही है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि प्रशांत किशोर अभी किसी निर्णायक मोड़ से पहले हालात का आकलन कर रहे हैं। “सूर्य के रुख” से आशय उस बड़े राजनीतिक माहौल या सत्ता संतुलन से लगाया जा रहा है, जो आने वाले समय में बिहार की राजनीति की दिशा तय कर सकता है। फिलहाल न तो कोई बड़ा आंदोलन दिख रहा है और न ही संगठन स्तर पर वैसी हलचल, जिसकी उम्मीद पीके समर्थक कर रहे थे।

जसुपा से जुड़े कई कार्यकर्ताओं का मानना है कि संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूती देने की जरूरत है। गांव-गांव तक पहुंच, बूथ स्तर की सक्रियता और कार्यकर्ताओं में जोश भरना अब सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। इसी संदर्भ में “10 हजारी” को लेकर चर्चाएं तेज हैं। राजनीतिक हलकों में कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि बड़ी संख्या में समर्थक और कार्यकर्ता खुलकर मैदान में उतरते हैं, तो यही 10 हजारी जन सुराज के लिए संजीवनी साबित हो सकते हैं।

हालांकि, आलोचकों का कहना है कि केवल रणनीति और प्रतीकात्मक अभियानों से बात नहीं बनेगी। उन्हें लगता है कि पीके को अब साफ राजनीतिक स्टैंड और आक्रामक रुख अपनाना होगा। जब तक स्पष्ट संदेश और ठोस एक्शन सामने नहीं आएगा, तब तक जसुपा का सन्नाटा टूटना मुश्किल है।

दूसरी ओर, प्रशांत किशोर के करीबी मानते हैं कि यह सन्नाटा अस्थायी है और यह “तूफान से पहले की शांति” भी हो सकता है। उनका तर्क है कि पीके बिना पूरी तैयारी के कोई बड़ा कदम नहीं उठाते और सही समय आने पर संगठन को नई दिशा देने से पीछे नहीं हटेंगे।

कुल मिलाकर, पटना सिटी से लेकर पूरे बिहार में निगाहें इसी सवाल पर टिकी हैं कि क्या प्रशांत किशोर को 10 हजारी का सहारा मिलेगा और क्या इससे जन सुराज पार्टी को नई ऊर्जा मिल पाएगी। या फिर यह सन्नाटा लंबा खिंचेगा और सियासी मैदान में पीके की राह और कठिन हो जाएगी—इसका जवाब आने वाला वक्त ही देगा।

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