12वीं के बाद पायलट कैसे बनें: पढ़ाई, ट्रेनिंग और खर्च की पूरी जानकारी

12वीं के बाद पायलट कैसे बनें: पढ़ाई, ट्रेनिंग और खर्च की पूरी जानकारी

12वीं के बाद पायलट बनना अब लाखों छात्रों का सपना है। इसके लिए साइंस स्ट्रीम में फिजिक्स और मैथ्स होना अनिवार्य है, साथ ही DGCA मेडिकल टेस्ट पास करना जरूरी है। पायलट ट्रेनिंग में 35 लाख से 1 करोड़ रुपये तक का खर्च आता है, लेकिन सैलरी फर्स्ट ऑफिसर से लेकर कैप्टन पायलट तक लाखों में होती है।

How To Become a Pilot After 12th: अगर आप 12वीं पास कर चुके हैं और पायलट बनने का सपना देखते हैं, तो इसके लिए सबसे पहले साइंस स्ट्रीम में फिजिक्स और मैथ्स के विषय जरूरी हैं। इसके बाद DGCA मेडिकल टेस्ट और फ्लाइंग ट्रेनिंग पूरी करनी होगी। पायलट बनने की ट्रेनिंग में खर्च 35 लाख से 1 करोड़ रुपये तक आता है। चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा, हैंड-आई कोऑर्डिनेशन टेस्ट, मल्टीटास्किंग और इंटरव्यू शामिल हैं। पायलट बनने के बाद शुरुआती सैलरी 3 लाख प्रति माह और अनुभवी कैप्टन की सैलरी 10–15 लाख रुपये तक हो सकती है।

पायलट बनने की योग्यता

पायलट की नौकरी न सिर्फ सम्मानजनक होती है, बल्कि इसमें अच्छी सैलरी भी मिलती है। अगर आप 12वीं पास हैं और पायलट बनने का सपना देखते हैं, तो सबसे पहले शैक्षणिक योग्यता पूरी करना जरूरी है। इसके लिए 12वीं साइंस स्ट्रीम से पास होना आवश्यक है, जिसमें फिजिक्स और मैथ्स विषय शामिल हों। फिजिक्स और मैथ्स में कम से कम 50 प्रतिशत अंक होना चाहिए। अगर आपने 12वीं में मैथ्स नहीं लिया है, तो आप ओपन बोर्ड से इसे कर सकते हैं और पायलट बनने की तैयारी आगे बढ़ा सकते हैं।

पायलट बनने से पहले DGCA (Directorate General of Civil Aviation) द्वारा निर्धारित मेडिकल टेस्ट जरूरी है। इसमें आपकी आंखों की रोशनी, ब्लड प्रेशर, हृदय की स्थिति, सुनने की क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य की जांच होती है। पहला क्लास-2 मेडिकल टेस्ट पास करने के बाद क्लास-1 मेडिकल टेस्ट होता है, जो तय करता है कि आप कमर्शियल पायलट बनने के लिए पूरी तरह फिट हैं या नहीं।

12वीं के बाद पायलट बनने का रास्ता

12वीं के बाद पायलट बनने के लिए मुख्य रूप से दो रास्ते हैं। पहला, फ्लाइंग स्कूल जॉइन करना, जिसमें ग्राउंड क्लास, फ्लाइंग ट्रेनिंग और DGCA एग्जाम एक साथ पूरा होता है। यह तरीका आसान माना जाता है क्योंकि इसमें ट्रेनिंग और एग्जाम का समन्वय स्कूल के अंतर्गत ही होता है।

दूसरा तरीका है पहले DGCA लिखित एग्जाम क्लियर करना और बाद में फ्लाइंग स्कूल जॉइन करके उड़ान के घंटे पूरे करना। इसके लिए अलग से कोचिंग इंस्टीट्यूट भी जॉइन किया जा सकता है। यह तरीका छात्रों को पहले सैद्धांतिक ज्ञान और बाद में व्यावहारिक अनुभव प्रदान करता है।

पायलट ट्रेनिंग का खर्च और सैलरी

पायलट बनने में खर्चा काफी अधिक होता है। ट्रेनिंग का कुल खर्च लगभग 35 लाख से 1 करोड़ रुपये तक आता है। इसमें फ्लाइंग स्कूल की फीस, विमान, देश और ट्रेनिंग के तरीके के अनुसार लागत शामिल होती है। कुछ छात्र भारत में ट्रेनिंग करते हैं, जबकि कुछ विदेश में जाकर अनुभव हासिल करते हैं।

पायलट की नौकरी में चयन सिर्फ इंटरव्यू तक सीमित नहीं है। इसमें 12वीं स्तर की फिजिक्स और मैथ्स की लिखित परीक्षा, हैंड-आई कोऑर्डिनेशन टेस्ट, मल्टीटास्किंग और प्रॉब्लम सॉल्विंग टेस्ट शामिल हैं। इसके बाद फेस-टू-फेस इंटरव्यू होता है। फर्स्ट ऑफिसर (Co-Pilot) की सैलरी लगभग 3 लाख प्रति माह, कैप्टन पायलट की 8 से 10 लाख प्रति माह और अनुभवी पायलट की 10 से 15 लाख प्रति माह तक हो सकती है।

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