1,149 कॉलेज छात्रों पर हुई Study में पाया गया कि रोजाना औसतन 19 मिनट ज्यादा सोने से academic performance में मामूली लेकिन measurable सुधार हुआ। इसका असर intervention खत्म होने के बाद भी अगले semester में देखा गया।
Sleep and Academic Performance: कॉलेज छात्रों की नींद और पढ़ाई के प्रदर्शन के बीच संबंध को लेकर हुई नई Study में अहम निष्कर्ष सामने आया है। 1,149 छात्रों पर किए गए प्रयोग में जिन विद्यार्थियों को कम से कम सात घंटे सोने के लिए प्रोत्साहित किया गया, उनकी नींद औसतन 19 मिनट बढ़ी और semester के दौरान उनके course performance में भी सुधार दर्ज किया गया।
19 मिनट ज्यादा नींद से दिखा Academic Performance पर असर
कॉलेज छात्रों में नींद की कमी आम समस्या है। नई Study में शोधकर्ताओं ने यह जानने की कोशिश की कि अगर छात्रों की नींद बढ़ाई जाए, तो क्या इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई और academic performance पर पड़ सकता है।

Journal of Political Economy में प्रकाशित इस शोध में कुल 1,149 कॉलेज छात्रों को शामिल किया गया। Study की शुरुआत में छात्र औसतन 6.6 घंटे प्रति रात सो रहे थे। करीब 29 प्रतिशत weeknights में उनकी नींद छह घंटे से भी कम रहती थी।
शोधकर्ताओं ने छात्रों को Fitbit wearable devices दिए, ताकि उनकी नींद की अवधि और पैटर्न को रिकॉर्ड किया जा सके। इसके बाद प्रतिभागियों को अलग-अलग समूहों में बांटा गया और एक समूह को नींद बढ़ाने के लिए विशेष intervention दिया गया।
छात्रों को 7 घंटे सोने के लिए किया गया प्रोत्साहित
Intervention वाले समूह के छात्रों को weeknights में कम से कम सात घंटे सोने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसके लिए उन्हें personalized bedtime reminders भेजे गए।
इसके अलावा चार सप्ताह तक हर उस रात के लिए 4.75 डॉलर का financial incentive दिया गया, जिस रात उन्होंने निर्धारित sleep target पूरा किया। दूसरे यानी control group के छात्रों ने भी Fitbit पहना, लेकिन उन्हें नींद बढ़ाने के लिए कोई खास निर्देश या आर्थिक प्रोत्साहन नहीं दिया गया।
इस प्रक्रिया के बाद intervention group में सात घंटे की नींद पूरी करने वाली रातों की संख्या में 26 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। कुल sleep duration भी औसतन 19 मिनट प्रति रात बढ़ गई।
Intervention खत्म होने के बाद भी जारी रहा असर
Study की एक खास बात यह रही कि reminders और financial incentives खत्म होने के बाद भी छात्रों की नींद पहले के मुकाबले कुछ ज्यादा रही। हालांकि प्रभाव पहले की तुलना में कम हो गया, फिर भी छात्र औसतन करीब 8 मिनट ज्यादा सो रहे थे।
शोधकर्ताओं ने इसके बाद छात्रों की sleep data की तुलना उनके official university transcripts से की। इस तुलना में ज्यादा नींद लेने वाले छात्रों के academic performance में भी सुधार दिखाई दिया।
Intervention पाने वाले छात्रों के average course performance में उस semester के दौरान 0.075 से 0.089 grade points तक सुधार दर्ज किया गया। अगले semester में भी इसी तरह का सुधार देखने को मिला। इससे संकेत मिला कि नींद बढ़ाने से मिले academic benefits intervention समाप्त होने के बाद भी कुछ समय तक बने रह सकते हैं।
Study ने Sleep और Grades के बीच Causal Link पर डाला प्रकाश
शोधकर्ताओं के मुताबिक, पहले के कई अध्ययनों में पर्याप्त नींद और बेहतर academic performance के बीच correlation देखा गया था। लेकिन correlation से यह साबित नहीं होता कि ज्यादा नींद लेने से सीधे grades बेहतर होते हैं।
नई Study को इस लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें controlled intervention के जरिए sleep duration बढ़ाने की कोशिश की गई और उसके बाद academic outcomes को मापा गया।
हालांकि शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि academic improvement अपेक्षाकृत छोटा था और इन निष्कर्षों की पुष्टि के लिए अलग-अलग परिस्थितियों में आगे और Studies की जरूरत होगी।
आसान Intervention से मिल सकता है फायदा
शोध से यह संकेत मिलता है कि छात्रों की sleep habits सुधारने के लिए बहुत जटिल उपाय जरूरी नहीं हैं। Bedtime reminders जैसे सरल उपाय और सीमित financial incentives भी छात्रों को ज्यादा सोने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
University campuses में sleep education, बेहतर scheduling और छात्रों की lifestyle needs को ध्यान में रखकर किए गए interventions academic performance को support कर सकते हैं। हालांकि, इस Study के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि हर छात्र में 19 मिनट अतिरिक्त नींद से grades में समान सुधार होगा।
कुल मिलाकर, शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि छात्रों के लिए पर्याप्त नींद केवल स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरत नहीं है, बल्कि पढ़ाई के प्रदर्शन से भी इसका महत्वपूर्ण संबंध हो सकता है।












