प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 साल बाद इजरायल दौरे पर जा सकते हैं। यह उनके तीसरे कार्यकाल की पहली यात्रा होगी। रक्षा, तकनीक और मुक्त व्यापार समझौते पर चर्चा की संभावना है, जिससे रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा मिल सकती है।
PM Modi Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 साल बाद इजरायल की यात्रा पर जाने वाले हैं। यह दौरा दिल्ली में 16 से 20 फरवरी तक आयोजित होने वाले एआई समिट (AI Summit) के बाद संभव माना जा रहा है। पीएम मोदी की यह यात्रा उनके तीसरे कार्यकाल की पहली इजरायल विजिट होगी, जिसे भारत और इजरायल के बीच तेजी से मजबूत हो रहे रणनीतिक संबंधों के संदर्भ में बेहद अहम माना जा रहा है। इससे पहले पीएम मोदी जुलाई 2017 में इजरायल गए थे। उस समय वे इजरायल का दौरा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने थे। उस ऐतिहासिक यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों को एक नई दिशा दी थी।
2017 की ऐतिहासिक यात्रा की याद
जुलाई 2017 की यात्रा भारत-इजरायल संबंधों में एक मील का पत्थर साबित हुई थी। उस दौरान इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू लगभग पूरे समय पीएम मोदी के साथ रहे थे। यह दृश्य दोनों देशों की बढ़ती नजदीकी का प्रतीक माना गया था। उस दौरे में रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन और तकनीक जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग को मजबूती मिली थी।
इजरायल लंबे समय से भारत का एक अहम डिफेंस सप्लायर रहा है। मिसाइल सिस्टम, ड्रोन, निगरानी तकनीक और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ा है। रक्षा क्षेत्र में विश्वास और पारदर्शिता ने इस साझेदारी को और गहरा बनाया है।
रक्षा और तकनीक सहयोग पर रहेगा फोकस
आगामी दौरे में रक्षा, सुरक्षा और हाई-टेक सहयोग मुख्य एजेंडा में शामिल हो सकते हैं। माना जा रहा है कि ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत जॉइंट प्रॉडक्शन और टेक्नॉलजी ट्रांसफर पर चर्चा आगे बढ़ सकती है। दोनों देश उन्नत तकनीक के सह-विकास और सह-उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहे हैं।
नवंबर में भारत और इजरायल के बीच रक्षा, औद्योगिक और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते के तहत एडवांस टेक्नॉलजी साझा करने और को-डेवलपमेंट को बढ़ावा देने की बात शामिल है। ऐसे में पीएम मोदी का यह दौरा इन प्रयासों को नई गति दे सकता है।
कूटनीतिक रणनीति का अहम हिस्सा

यह यात्रा केवल रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि कूटनीतिक लिहाज से भी काफी अहम मानी जा रही है। भारत की दीर्घकालिक रणनीति में सुरक्षा, तकनीक, ऊर्जा और कूटनीतिक संतुलन सभी को साथ लेकर चलने की सोच शामिल है। इजरायल के साथ बढ़ते रिश्ते इसी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।
इजरायल की ओर से भी इस यात्रा को लेकर सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय संवाद लगातार जारी है, जिससे स्पष्ट होता है कि यह संबंध केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं है, बल्कि रणनीतिक साझेदारी के रूप में विकसित हो चुका है।
मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में प्रगति
भारत और इजरायल मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर आगे बढ़ रहे हैं। स्मोट्रिच की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद नवंबर में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की इजरायल यात्रा के दौरान एफटीए के लिए ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ पर सहमति बनी।
दिसंबर में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी इजरायल का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नेतन्याहू, राष्ट्रपति आइजैक हर्ज़ोग, विदेश मंत्री गिदोन सार और बरकत से मुलाकात की थी। इन लगातार दौरों से यह संकेत मिलता है कि दोनों देश आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को व्यापक रूप देने के लिए गंभीर हैं।
तीसरे कार्यकाल में नई शुरुआत
प्रधानमंत्री मोदी के तीसरे कार्यकाल में यह पहली इजरायल यात्रा होगी। 9 साल के अंतराल के बाद हो रही यह विजिट कई मायनों में नई शुरुआत का संकेत देती है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत अपनी विदेश नीति को संतुलित और व्यावहारिक दिशा में आगे बढ़ा रहा है। ऐसे समय में इजरायल जैसे तकनीकी और रक्षा क्षेत्र में मजबूत देश के साथ संबंधों को और गहरा करना भारत की रणनीतिक प्राथमिकता का हिस्सा माना जा रहा है।
इस दौरे के दौरान ड्रोन तकनीक, साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में सहयोग को विस्तार मिलने की उम्मीद है। इससे न केवल दोनों देशों के बीच आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, बल्कि भारत की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को भी मजबूती मिल सकती है।
क्यों अहम है यह दौरा
भारत और इजरायल के संबंध पिछले एक दशक में तेजी से मजबूत हुए हैं। रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम जैसे क्षेत्रों में दोनों देश साथ काम कर रहे हैं। पीएम मोदी का यह संभावित दौरा इन संबंधों को एक नए स्तर पर ले जा सकता है।









