मुजफ्फरपुर में 82 केंद्रों पर मैट्रिक परीक्षा: जूता-मोजा उतरवाकर सख्त जांच, बुर्का हटाकर पहचान सत्यापन; आदर्श सेंटर पर छात्राओं पर बरसाए फूल

मुजफ्फरपुर में 82 केंद्रों पर मैट्रिक परीक्षा कड़ी सुरक्षा में। जूता-मोजा उतरवाकर जांच, बुर्का हटाकर पहचान सत्यापन; आदर्श केंद्र पर छात्राओं पर फूल बरसाए गए।
मुजफ्फरपुर में 82 केंद्रों पर मैट्रिक परीक्षा: जूता-मोजा उतरवाकर सख्त जांच, बुर्का हटाकर पहचान सत्यापन; आदर्श सेंटर पर छात्राओं पर बरसाए फूल
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मुजफ्फरपुर में मैट्रिक (10वीं) की परीक्षा इस बार अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजामों के बीच शुरू हुई। जिले में कुल 82 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां हजारों परीक्षार्थी शामिल हुए। परीक्षा के पहले दिन कई केंद्रों पर सख्त जांच व्यवस्था लागू की गई—कुछ स्थानों पर छात्रों से जूता-मोजा उतरवाकर तलाशी ली गई, वहीं पहचान सत्यापन के लिए बुर्का हटाकर चेकिंग की गई। दूसरी ओर, एक आदर्श परीक्षा केंद्र पर छात्राओं का फूल बरसाकर स्वागत किया गया, जिससे सख्ती के बीच सकारात्मक माहौल भी दिखा।

सुबह से ही परीक्षा केंद्रों के बाहर छात्रों और अभिभावकों की भीड़ जुटने लगी थी। निर्धारित समय से पहले पहुंचने की अपील के बावजूद कई छात्र अंतिम समय में पहुंचे, जिसके कारण गेट पर लंबी कतारें लग गईं। केंद्रों के मुख्य द्वार पर एडमिट कार्ड और फोटो पहचान पत्र का मिलान किया गया। इसके बाद मेटल डिटेक्टर से जांच और संदिग्ध वस्तुओं की तलाशी ली गई। मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, कैलकुलेटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूरी तरह प्रतिबंध रहा।

कई केंद्रों पर वीक्षकों ने जूते-मोजे उतरवाकर तलाशी ली, ताकि किसी भी प्रकार की पर्ची या इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस अंदर न ले जाई जा सके। अधिकारियों का कहना है कि पिछले वर्षों में नकल के नए-नए तरीके सामने आए थे, इसलिए इस बार किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जा रही है।

महिला परीक्षार्थियों की जांच के लिए अलग से महिला कर्मियों की तैनाती की गई थी। पहचान सत्यापन के दौरान कुछ छात्राओं से चेहरा दिखाने के लिए बुर्का हटाने को कहा गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया पूरी तरह महिला स्टाफ की निगरानी में और गरिमा बनाए रखते हुए की गई। अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सभी परीक्षार्थियों की पहचान की पुष्टि अनिवार्य है।

जिले के संवेदनशील केंद्रों पर अतिरिक्त पुलिस बल और दंडाधिकारी तैनात किए गए। कई केंद्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी निगरानी कंट्रोल रूम से की जा रही है। उड़नदस्ता टीमों ने भी अलग-अलग केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। शिक्षा विभाग के निर्देश पर प्रश्नपत्र वितरण और उत्तरपुस्तिका संग्रहण की प्रक्रिया को भी कड़ी निगरानी में रखा गया।

सख्ती के बीच एक सकारात्मक तस्वीर भी सामने आई। जिले के एक आदर्श परीक्षा केंद्र पर छात्राओं का फूल बरसाकर स्वागत किया गया। केंद्र परिसर को सजाया गया था और प्रवेश द्वार पर शिक्षकों ने परीक्षार्थियों का उत्साहवर्धन किया। छात्राओं के चेहरे पर मुस्कान दिखी और कई अभिभावकों ने इस पहल की सराहना की। अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा को तनावमुक्त और सकारात्मक वातावरण में संपन्न कराना भी उतना ही जरूरी है जितना सुरक्षा व्यवस्था।

दिव्यांग परीक्षार्थियों के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। व्हीलचेयर, रैंप और सहायक कर्मियों की सुविधा उपलब्ध कराई गई। कुछ केंद्रों पर पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा की भी व्यवस्था की गई थी।

पहली पाली की परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। हालांकि सख्त जांच के कारण कुछ स्थानों पर हल्की देरी जरूर हुई, लेकिन प्रशासन ने समय प्रबंधन के जरिए स्थिति संभाल ली। जिला प्रशासन ने कहा है कि आगामी सभी पालियों में भी यही सख्त व्यवस्था लागू रहेगी।

मैट्रिक परीक्षा हजारों छात्रों के भविष्य से जुड़ी है, इसलिए प्रशासन किसी भी तरह की अनियमितता से बचने के लिए हर संभव कदम उठा रहा है। सख्ती और संवेदनशीलता के संतुलन के साथ मुजफ्फरपुर में परीक्षा का पहला दिन मिला-जुला लेकिन नियंत्रित माहौल में संपन्न हुआ।

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