मध्य प्रदेश बजट सत्र 2026: राज्यपाल के अभिभाषण पर घमासान, सीएम मोहन यादव ने विपक्ष को घेरा

मध्य प्रदेश के बजट सत्र 2026 में राज्यपाल के अभिभाषण को लेकर जोरदार घमासान देखने को मिला। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। जानें सदन में क्या

मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत होते ही प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। सत्र के पहले दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

भोपाल: Madhya Pradesh विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत के साथ ही राज्य की राजनीति में तीखा टकराव देखने को मिला। सत्र के पहले दिन राज्यपाल के अभिभाषण को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस छिड़ गई। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने विपक्ष, खासकर Indian National Congress, पर लोकतांत्रिक मर्यादाएं लांघने का आरोप लगाते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी।

राज्यपाल के अभिभाषण पर विवाद क्यों?

विधानसभा के बजट सत्र की परंपरा के अनुसार राज्यपाल का अभिभाषण सरकार की नीतियों, उपलब्धियों और आगामी योजनाओं का खाका प्रस्तुत करता है। इसे संसदीय लोकतंत्र की महत्वपूर्ण प्रक्रिया माना जाता है। हालांकि, अभिभाषण के दौरान विपक्ष ने सरकार की नीतियों का विरोध किया, जिस पर मुख्यमंत्री ने कड़ा एतराज जताया। उनका कहना था कि अभिभाषण पर असहमति व्यक्त करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन सदन की गरिमा और संवैधानिक मर्यादाओं का पालन अनिवार्य है।

सीएम ने कहा कि यदि विपक्ष को किसी नीति से असहमति है तो उसे तथ्यों और तर्कों के साथ सामने रखना चाहिए। बिना प्रमाण के विरोध या व्यवधान लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करता है।

मर्यादा लांघने से विश्वसनीयता घटती है

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि बार-बार हंगामा और असंसदीय व्यवहार से जनता के बीच उनकी विश्वसनीयता कम हो रही है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि विपक्ष को आत्ममंथन करना चाहिए और रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए। उनका कहना था कि लोकतंत्र में स्वस्थ बहस आवश्यक है, लेकिन व्यक्तिगत आरोपों या अनावश्यक विरोध से जनहित के मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष के सवालों का जवाब देने से पीछे नहीं हटेगी।

सीएम ने कहा कि यह बजट सत्र राज्य के विकास के लिए अहम है। सरकार बुनियादी ढांचे, रोजगार, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में नई योजनाएं लाने की तैयारी में है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वे सार्थक सुझाव दें ताकि नीतियों को और बेहतर बनाया जा सके। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी बजट सत्र में आर्थिक विकास, निवेश, ग्रामीण योजनाओं और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों पर विशेष जोर रहने की संभावना है। ऐसे में सत्ता और विपक्ष के बीच संवाद राज्य की नीतिगत दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

‘वंदे मातरम’ पर मुख्यमंत्री का बयान

सत्र की शुरुआत में ‘वंदे मातरम’ के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने इसे राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह गीत देश की स्वतंत्रता संग्राम की विरासत से जुड़ा है और इसका सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय प्रतीकों और भावनाओं को राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, ऐसे विषयों पर सर्वसम्मति और सम्मानजनक व्यवहार लोकतांत्रिक संस्कृति को मजबूत बनाता है।

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