आजकल 30–40 साल की उम्र में हड्डियों की कमजोरी और मसल पेन आम हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ विटामिन D लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके साथ कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा भी जरूरी है। दोनों के संतुलन के बिना हड्डियां कमजोर और पतली हो सकती हैं, जिससे फ्रैक्चर और ओस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है।
हड्डियों की कमजोरी और मसल पेन: आज 30–40 साल की उम्र में कई लोग पीठ, कंधे और घुटनों में दर्द की शिकायत कर रहे हैं। दिल्ली के आरएमएल हॉस्पिटल के आर्थोपेडिक एक्सपर्ट डॉ. संकल्प मेहता के अनुसार हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए सिर्फ विटामिन D लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शरीर में कैल्शियम की सही मात्रा होना भी जरूरी है। विटामिन D और कैल्शियम का संतुलन न होने पर हड्डियां कमजोर हो सकती हैं, जिससे फ्रैक्चर, मसल पेन और ओस्टियोपोरोसिस का जोखिम बढ़ जाता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि धूप लेना, संतुलित डाइट और नियमित एक्सरसाइज के साथ सप्लीमेंट लेने से हड्डियों को स्वस्थ रखा जा सकता है।
विटामिन D और कैल्शियम का महत्व
विटामिन D शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है। डॉ. मेहता के अनुसार, अगर शरीर में कैल्शियम पर्याप्त नहीं है तो विटामिन D लेने के बावजूद हड्डियां मजबूत नहीं बनती। इस संतुलन की कमी से मसल पेन, थकान और हड्डियों में दर्द जैसी समस्याएं भी बनी रहती हैं।
विशेष रूप से 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोग, जो धूप में कम निकलते हैं, लंबे समय तक ऑफिस में बैठे रहते हैं या जंक फूड ज्यादा खाते हैं, उन्हें हड्डियों की कमजोरी का अधिक खतरा होता है। महिलाओं में यह खतरा और भी अधिक होता है।

रोजाना कितना लेना जरूरी है
एक स्वस्थ वयस्क को रोजाना 600–800 IU विटामिन D और 800–1000 mg कैल्शियम की आवश्यकता होती है। डॉ. मेहता सलाह देते हैं कि सप्लीमेंट लेने से पहले अपनी बॉडी की टेस्टिंग कराना जरूरी है, ताकि सही मात्रा का सेवन सुनिश्चित किया जा सके।
संतुलित डाइट, धूप में समय बिताना और नियमित एक्सरसाइज हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करती हैं। विटामिन D और कैल्शियम की कमी को नजरअंदाज करने से कम उम्र में हड्डियों की समस्याएं गंभीर रूप ले सकती हैं।













