INS Mangrol: भारतीय नौसेना को मिला नया युद्धपोत, पनडुब्बियों का लगाएगा पता

NS Mangrol: भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए नया युद्धपोत INS मंगरोल शामिल किया गया है। यह आधुनिक पोत दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और समुद्री सुरक्षा

भारतीय नौसेना की ताकत में एक और इजाफा हुआ है। उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बियों का पता लगाने और उनसे निपटने में सक्षम युद्धपोत ‘मंगरोल’ को नौसेना में शामिल कर लिया गया है।

नई दिल्ली: भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में युद्धपोत INS मंगरोल को महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। यह पोत विशेष रूप से उथले समुद्री क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और पानी के भीतर मौजूद संभावित खतरों से निपटने के लिए तैयार किया गया है। आधुनिक सेंसर, सोनार और हथियार प्रणालियों से लैस यह युद्धपोत भारत के तटीय समुद्री क्षेत्रों की निगरानी में अहम भूमिका निभा सकता है।

इस पोत का निर्माण कोच्चि स्थित कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने किया है। इसके नौसेना में शामिल होने के अवसर पर पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वत्सायन मौजूद थे।

दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने में कैसे मदद करेगा?

INS मंगरोल को एंटी-सबमैरिन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) श्रेणी के तीसरे पोत के रूप में बताया गया है। इस श्रेणी के युद्धपोत कम गहराई वाले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बियों का पता लगाने और उनसे मुकाबला करने के लिए बनाए जाते हैं। तटीय इलाकों में समुद्र की कम गहराई और पानी के भीतर बदलती परिस्थितियों के कारण पनडुब्बियों का पता लगाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में विशेष सोनार प्रणालियों से लैस छोटे और अधिक गतिशील युद्धपोत नौसेना को निगरानी तथा प्रतिक्रिया देने में मदद करते हैं।

INS मंगरोल अन्य युद्धपोतों, समुद्री गश्ती विमानों और हेलीकॉप्टरों के साथ मिलकर भी काम कर सकता है। इससे समुद्र में संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और संभावित खतरों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई की क्षमता बढ़ सकती है।

आधुनिक सोनार, टॉरपीडो और डिकॉय सिस्टम से लैस

इस युद्धपोत की प्रमुख विशेषताओं में पानी के भीतर मौजूद वस्तुओं और संभावित खतरों का पता लगाने वाली सोनार प्रणाली शामिल है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इसमें 'अभय' हल-माउंटेड सोनार लगाया गया है। यह पानी के भीतर ध्वनि तरंगों के माध्यम से आसपास की गतिविधियों का पता लगाने में मदद करता है। इसके अलावा, पोत में हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी पनडुब्बी रोधी रॉकेट लॉन्चर और 'मारीच' उन्नत टॉरपीडो डिकॉय सिस्टम शामिल होने की जानकारी दी गई है।

टॉरपीडो पनडुब्बियों के खिलाफ इस्तेमाल किए जाने वाले प्रमुख हथियारों में शामिल हैं। वहीं, डिकॉय सिस्टम दुश्मन के टॉरपीडो को भ्रमित करने और युद्धपोत की सुरक्षा बढ़ाने में सहायता कर सकता है। इन प्रणालियों का उद्देश्य समुद्री खतरों का पता लगाने, उनसे निपटने और पोत की सुरक्षा को बेहतर बनाना है।

वॉटरजेट प्रणोदन से मिलेगा बेहतर संचालन

INS मंगरोल में तीन डीजल इंजनों और वॉटरजेट प्रणोदन प्रणाली का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी दी गई है। वॉटरजेट तकनीक में पानी को तेज गति से पीछे की ओर निकाला जाता है, जिससे पोत आगे बढ़ता है और उसे दिशा बदलने में मदद मिलती है। यह व्यवस्था उथले समुद्री क्षेत्रों में संचालन के लिए उपयोगी हो सकती है, जहां बड़े युद्धपोतों की आवाजाही सीमित हो सकती है। पोत को समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी अभियानों के अलावा कुछ अन्य समुद्री सुरक्षा अभियानों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल

नौसेना के अनुसार, INS मंगरोल के निर्माण में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। यह भारत में युद्धपोतों के डिजाइन, निर्माण और आधुनिक प्रणालियों को एकीकृत करने की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है। स्वदेशी निर्माण से देश के रक्षा औद्योगिक क्षेत्र को प्रोत्साहन मिलता है। साथ ही, घरेलू शिपयार्ड और रक्षा उपकरण बनाने वाली कंपनियों की भूमिका भी मजबूत होती है।

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