Bhopal Master Plan 2047: ड्राफ्ट पर 800 से ज्यादा आपत्तियां, भूमि उपयोग और सड़क मार्गों पर उठे सवाल

भोपाल मास्टर प्लान 2047 पर 800 से ज्यादा सुझाव और आपत्तियां मिलीं। भूमि उपयोग, सड़क अलाइनमेंट, ग्रीन बेल्ट और बाघों के कॉरिडोर पर उठे सवाल।

भोपाल के ड्राफ्ट डेवलपमेंट प्लान 2047 पर 800 से अधिक सुझाव और आपत्तियां दर्ज हुई हैं। 25 अक्टूबर की समय सीमा से पहले नागरिकों और पर्यावरणविदों ने भूमि उपयोग, ग्रीन बेल्ट, सड़क मार्गों और वन्यजीवों की आवाजाही वाले क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे उठाए हैं।

Bhopal Master Plan 2047: भोपाल के प्रस्तावित डेवलपमेंट प्लान 2047 को लेकर नागरिकों और पर्यावरणविदों ने कई सवाल उठाए हैं। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग को अब तक लगभग 800 सुझाव और आपत्तियां मिल चुकी हैं। इनमें जमीन के उपयोग का वर्गीकरण, ग्रीन बेल्ट में बदलाव, प्रस्तावित सड़कों के अलाइनमेंट और बाघों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में निर्माण से जुड़ी चिंताएं शामिल हैं। सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख 25 अक्टूबर 2026 है।

भोपाल मास्टर प्लान 2047 पर 800 से ज्यादा सुझाव और आपत्तियां

भोपाल के भविष्य के विकास की रूपरेखा तय करने वाले ड्राफ्ट डेवलपमेंट प्लान 2047 पर चर्चा तेज हो गई है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP) विभाग को योजना के संबंध में लगभग 800 सुझाव और आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। 25 अक्टूबर 2026 तक नागरिकों और विभिन्न संगठनों को अपनी राय और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया गया है।

प्रस्तावित योजना में भूमि उपयोग के वर्गीकरण, आवासीय क्षेत्रों के भविष्य और सड़क नेटवर्क से संबंधित प्रावधानों पर सवाल उठाए गए हैं। नागरिक चाहते हैं कि उनकी जरूरतों और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए योजना की समीक्षा की जाए। विभाग प्राप्त सुझावों और आपत्तियों की जांच करेगा, जिसके बाद मास्टर प्लान को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

जमीन के इस्तेमाल और सड़क अलाइनमेंट में बदलाव की मांग

ड्राफ्ट प्लान पर दर्ज आपत्तियों में BIZ-2 लैंड-यूज कैटेगरी को हटाने की मांग प्रमुख है। संबंधित पक्षों का मानना है कि इससे कुछ क्षेत्रों में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर स्पष्टता मिल सकती है। इसके अलावा, ग्रीन बेल्ट और कृषि भूमि के वर्गीकरण में बदलाव कर कुछ हिस्सों को आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित करने की मांग भी उठी है।

प्रस्तावित 18 मीटर चौड़ी सड़कों के अलाइनमेंट को लेकर भी आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। कुछ लोगों ने सड़क मार्गों में बदलाव की जरूरत बताई है, जबकि कुछ क्षेत्रों को इको-सेंसिटिव जोन से बाहर करने की मांग सामने आई है। इन प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय विभाग की समीक्षा और संबंधित नियमों के आधार पर लिया जाएगा।

बावड़िया कलां, बाघमुगलिया और लाहरपुर को लेकर चिंताएं

भोपाल के बावड़िया कलां और बाघमुगलिया जैसे इलाकों के निवासियों ने प्रस्तावित वेस्टर्न बायपास से कनेक्टिविटी को लेकर सवाल उठाए हैं। स्थानीय लोगों की चिंताओं में सड़क संपर्क और आसपास के क्षेत्रों के विकास पर पड़ने वाला संभावित प्रभाव शामिल है।

लाहरपुर में लगभग 643 एकड़ कृषि भूमि को लेकर भी आपत्ति सामने आई है। संबंधित पक्षों ने इस जमीन को निर्धारित सबमर्जेंस यानी डूब क्षेत्र से बाहर करने की मांग की है। उनका दावा है कि इस क्षेत्र में पिछले करीब 30 वर्षों से खेती हो रही है। हालांकि, इस मांग पर अंतिम स्थिति विभागीय जांच और आधिकारिक निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।

पर्यावरण से जुड़ी आपत्तियों में बाघों की आवाजाही वाले क्षेत्रों से गुजरने वाली प्रस्तावित सड़कों को लेकर चिंता जताई गई है। ऐसे इलाकों में सड़क निर्माण और विकास योजनाओं के संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पर्यावरणविदों की चिंताओं और स्थानीय निवासियों के सुझावों को ध्यान में रखते हुए विभाग के सामने विकास, कनेक्टिविटी और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी।

अब सभी की नजर 25 अक्टूबर की समय सीमा के बाद होने वाली समीक्षा पर है। प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर विचार करने के बाद ही भोपाल के डेवलपमेंट प्लान 2047 के अंतिम स्वरूप को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।

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