अभिषेक बनर्जी को 3 FIR में हाईकोर्ट से राहत हिरासत में लेकर पूछताछ जरूरी नहीं', 30 नवंबर तक कार्रवाई पर रोक

कलकत्ता हाईकोर्ट ने TMC सांसद अभिषेक बनर्जी को तीन FIR में राहत दी। कोर्ट ने हिरासत में पूछताछ जरूरी नहीं मानी और 30 नवंबर तक कार्रवाई पर रोक लगाई।
अभिषेक बनर्जी को 3 FIR में हाईकोर्ट से राहत हिरासत में लेकर पूछताछ जरूरी नहीं', 30 नवंबर तक कार्रवाई पर रोक
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कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से तीन आपराधिक मामलों में बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने कहा कि फिलहाल अभिषेक बनर्जी को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही पुलिस को तीनों FIR के संबंध में उनके खिलाफ 30 नवंबर 2026 तक कोई जबरन कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया गया है।

जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने स्पष्ट किया कि अभिषेक बनर्जी को जांच में सहयोग करना होगा और पुलिस की ओर से जारी किए जाने वाले नोटिस का पालन करना होगा। यदि उन्हें पूछताछ या किसी अन्य जांच प्रक्रिया के लिए बुलाया जाता है तो कम से कम 48 घंटे का नोटिस दिया जाना होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर अभिषेक जांच में सहयोग नहीं करते हैं तो राज्य पुलिस अदालत का रुख कर सकती है।

यह आदेश उन तीन FIR से संबंधित है, जिनका विवरण अभिषेक बनर्जी की याचिका में विशेष रूप से दिया गया था। इनमें भवानीपुर थाने की FIR नंबर 121, 27 मई 2026, कालिकाता अशुति थाने की FIR नंबर 140, 16 जून 2026 और विष्णुपुर थाने की FIR नंबर 668, 2026 शामिल हैं। कोर्ट ने साफ किया कि मौजूदा आदेश सिर्फ इन्हीं तीन मामलों पर लागू होगा।

अभिषेक बनर्जी ने अपनी याचिका में कई FIR को चुनौती देते हुए आरोप लगाया था कि उनके खिलाफ दर्ज मामले राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं। सुनवाई के दौरान उनके वकील ने अदालत से इन मामलों में राहत की मांग की। वहीं राज्य सरकार की ओर से इसका विरोध किया गया और जांच जारी रखने की जरूरत बताई गई।

राज्य की ओर से दलील दी गई कि यदि FIR में संज्ञेय अपराध का खुलासा होता है तो शुरुआती स्तर पर आपराधिक कार्रवाई को खत्म नहीं किया जा सकता। अभियोजन पक्ष ने यह भी कहा कि जांच एजेंसी को मामले की पूरी जांच करने का अवसर मिलना चाहिए। इसके बावजूद कोर्ट ने मौजूदा चरण में हिरासत में पूछताछ को आवश्यक नहीं माना और अभिषेक बनर्जी को अंतरिम सुरक्षा दे दी।

कोर्ट ने हालांकि यह नहीं कहा है कि तीनों FIR खत्म कर दी गई हैं। यानी मामलों की जांच जारी रहेगी। अभिषेक बनर्जी को जांच में सहयोग करने की शर्त पर सुरक्षा मिली है। पुलिस को भी जांच की प्रगति पर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है। अदालत इन मामलों की अगली सुनवाई के दौरान जांच की स्थिति की समीक्षा करेगी।

अदालत ने पुलिस से तीनों मामलों की जांच में हुई प्रगति की रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी। वहीं मौजूदा अंतरिम सुरक्षा 30 नवंबर तक या अदालत के अगले आदेश तक लागू रहेगी, जो भी पहले हो।

अभिषेक बनर्जी के लिए यह राहत ऐसे समय में आई है, जब उनके खिलाफ पश्चिम बंगाल में कई FIR दर्ज होने का मामला राजनीतिक और कानूनी चर्चा का विषय बना हुआ है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि अभिषेक ने कुल 16 FIR को लेकर राहत की मांग की थी। हालांकि अदालत ने कहा कि जिन तीन FIR की पूरी जानकारी याचिका में उपलब्ध कराई गई है, फिलहाल आदेश उन्हीं तक सीमित रहेगा।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि एक ही याचिका में कई FIR को चुनौती देना अपने आप में गलत नहीं है। अदालत ने कहा कि हर FIR के लिए अलग-अलग याचिका दाखिल करने से मुकदमों की संख्या अनावश्यक रूप से बढ़ सकती है। हालांकि इस मामले में जिन FIR का पूरा विवरण उपलब्ध था, अदालत ने फिलहाल उन्हीं पर आदेश दिया।

अभिषेक बनर्जी को विदेश जाने के मामले में भी अदालत ने स्थिति स्पष्ट की है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस आदेश से सुप्रीम कोर्ट द्वारा उन्हें चिकित्सा उपचार के लिए तीन सप्ताह विदेश जाने की दी गई अनुमति प्रभावित नहीं होगी। हालांकि सामान्य तौर पर विदेश यात्रा के लिए हाईकोर्ट की अनुमति की शर्त लागू रहेगी।

इससे पहले भी अभिषेक बनर्जी को अलग-अलग FIR में अंतरिम राहत मिल चुकी है। 21 अगस्त को कलकत्ता हाईकोर्ट ने तीन अन्य मामलों में भी उन्हें अंतरिम सुरक्षा दी थी। इनमें से दो मामले सेबाश्रय स्वास्थ्य शिविरों से जुड़े थे। उस समय कोर्ट की ओर से यह टिप्पणी भी सामने आई थी कि एक ही व्यक्ति के खिलाफ लगातार कई FIR दर्ज होने की स्थिति में सुरक्षा के सवाल पर अदालत को विचार करना होगा।

अब मंगलवार के आदेश के बाद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दर्ज तीन मामलों में तत्काल गिरफ्तारी या अन्य जबरन पुलिस कार्रवाई का खतरा टल गया है। हालांकि उन्हें जांच में शामिल होना और पुलिस के नोटिस का जवाब देना होगा। इस वजह से यह राहत पूर्ण रूप से जांच से छूट नहीं है, बल्कि अंतरिम सुरक्षा है।

कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश का सीधा मतलब है कि तीनों FIR की जांच चलती रहेगी, लेकिन 30 नवंबर तक अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कोई coercive action नहीं लिया जा सकेगा। अदालत अब पुलिस की जांच प्रगति रिपोर्ट और आगे की दलीलों के आधार पर मामले पर विचार करेगी। अंतिम फैसला अभी बाकी है।

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