दीदी जहां, हम भी वहां बागी गुट छोड़ ममता के खेमे में लौटे TMC MLA कासिम सिद्दीकी

TMC विधायक कासिम सिद्दीकी ने ऋतब्रत बनर्जी के बागी गुट से दूरी बना ली और ममता बनर्जी के खेमे में लौट आए। बोले- सक्रिय राजनीति तक दीदी के साथ रहूंगा।
दीदी जहां, हम भी वहां बागी गुट छोड़ ममता के खेमे में लौटे TMC MLA कासिम सिद्दीकी
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कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान के बीच ममता बनर्जी को राहत देने वाली खबर सामने आई है। आमडांगा से TMC विधायक मोहम्मद कासिम सिद्दीकी ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट से दूरी बनाने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने दो टूक कहा कि वह अब ममता बनर्जी के साथ हैं और जब तक सक्रिय राजनीति में रहेंगे, 'दीदी' का साथ नहीं छोड़ेंगे।

कासिम सिद्दीकी ने दावा किया कि उन्हें और दूसरे विधायकों को यह बताया गया था कि जिस गुट के साथ वे जा रहे हैं, वह ममता बनर्जी के मार्गदर्शन में ही काम कर रहा है। इसी भरोसे के कारण उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी के साथ जाना स्वीकार किया। बाद में उन्हें पता चला कि यह गुट ममता बनर्जी और TMC के शीर्ष नेतृत्व से अलग दिशा में काम कर रहा है। इसके बाद उन्होंने बागी खेमे से खुद को अलग कर लिया।

कासिम ने कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि ऋतब्रत बनर्जी अलग राजनीतिक धड़ा बना रहे हैं। उनका कहना है कि शुरुआत में उन्हें यही बताया गया था कि सभी विधायक 'दीदी' के साथ हैं। लेकिन जब बैठकों और गतिविधियों में ममता बनर्जी की भूमिका दिखाई नहीं दी तो उन्हें स्थिति का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले मूल TMC खेमे के साथ रहने का फैसला किया।

विधायक ने अपने राजनीतिक सफर और चुनाव जीतने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने जनता के बीच जाकर ममता बनर्जी के चेहरे और उनके काम के नाम पर वोट मांगे थे। उनके मुताबिक मतदाताओं ने भी ममता के नेतृत्व पर भरोसा जताकर उन्हें विधानसभा तक पहुंचाया। इसलिए वह अपने राजनीतिक जीवन के आखिरी समय तक ममता बनर्जी के साथ रहेंगे।

कासिम सिद्दीकी की वापसी ऐसे समय हुई है जब पश्चिम बंगाल में TMC के भीतर गुटबाजी चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में एक बागी धड़ा सामने आया था, जिसमें बड़ी संख्या में विधायक शामिल हुए थे। ऐसे में इस गुट से एक विधायक का वापस ममता के साथ आना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

कासिम के बयान से यह भी संकेत मिलता है कि बागी गुट के भीतर सभी विधायक एक राय में नहीं हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि उन्हें गुट की वास्तविक राजनीतिक दिशा के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी। उनका दावा है कि जब उन्हें पता चला कि गुट ममता बनर्जी के मार्गदर्शन में काम नहीं कर रहा है तो उन्होंने इससे दूरी बना ली।

हालांकि कासिम सिद्दीकी की वापसी के बाद विवाद खत्म होने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। ऋतब्रत बनर्जी ने कासिम के आरोपों पर पलटवार किया है। उन्होंने कासिम को आमडांगा जाकर जनता का सामना करने की चुनौती दी और उनके आरोपों को लेकर सवाल उठाए। ऋतब्रत ने कहा कि पहले कासिम अपने विधानसभा क्षेत्र जाएं और वहां के लोगों से मिलें, उसके बाद उनके आरोपों का जवाब दिया जाएगा।

इससे साफ है कि कासिम की वापसी केवल एक विधायक के पाला बदलने तक सीमित नहीं है। इससे TMC के दोनों धड़ों के बीच चल रही राजनीतिक लड़ाई को भी नया मोड़ मिला है। एक तरफ ममता बनर्जी के लिए यह संदेश है कि उनके साथ गए कुछ विधायक वापस लौट सकते हैं, वहीं दूसरी तरफ ऋतब्रत खेमे के सामने अपने विधायकों को साथ बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो सकती है।

कासिम सिद्दीकी की राजनीतिक पहचान भी महत्वपूर्ण है। 2026 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के मुताबिक वह आमडांगा विधानसभा सीट से AITC उम्मीदवार के रूप में विजयी हुए थे। चुनावी रिकॉर्ड में उनका नाम मोहम्मद कासिम सिद्दीकी दर्ज है।

ममता बनर्जी के लिए यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम है क्योंकि बागी विधायकों की संख्या और विधानसभा में उनके धड़े की स्थिति को लेकर पिछले कुछ महीनों से राजनीतिक समीकरण तेजी से बदले हैं। ऐसे में किसी विधायक का सार्वजनिक रूप से ममता के साथ खड़े होने का ऐलान करना उनके नेतृत्व के समर्थन में एक राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

कासिम ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि उनका ममता बनर्जी से राजनीतिक संबंध केवल मौजूदा परिस्थिति तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक वह सक्रिय राजनीति में रहेंगे, ममता बनर्जी के साथ रहेंगे। उनका यह बयान आने वाले समय में भी उनके राजनीतिक रुख को स्पष्ट करता है।

दूसरी ओर, ऋतब्रत बनर्जी का पलटवार बताता है कि बागी गुट भी इस घटनाक्रम को हल्के में नहीं ले रहा है। आमडांगा जाकर जनता का सामना करने की चुनौती देकर उन्होंने कासिम के दावे पर सवाल उठाया है। अब दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की संभावना है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस घटनाक्रम का असर आगे विधानसभा के भीतर भी दिखाई दे सकता है। यदि आने वाले दिनों में और विधायक बागी गुट से दूरी बनाकर ममता बनर्जी के साथ लौटते हैं तो इससे दोनों खेमों की ताकत का संतुलन बदल सकता है। वहीं अगर ऋतब्रत बनर्जी अपने गुट को एकजुट रखने में सफल रहते हैं तो TMC के भीतर यह खींचतान और लंबी चल सकती है।

फिलहाल कासिम सिद्दीकी ने अपना रुख साफ कर दिया है। उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी के बागी गुट से नाता तोड़ते हुए ममता बनर्जी के प्रति अपनी राजनीतिक निष्ठा दोहराई है। उनका कहना है कि वह ममता के चेहरे और उनके काम के आधार पर चुनाव जीते हैं और अब सक्रिय राजनीति के अंतिम दौर तक उनके साथ रहेंगे।

इस घटनाक्रम से ममता बनर्जी को राजनीतिक तौर पर एक राहत जरूर मिली है, लेकिन TMC की अंदरूनी गुटबाजी का अंतिम समाधान अभी दिखाई नहीं देता। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि क्या कासिम सिद्दीकी की वापसी के बाद बागी गुट के और विधायक भी ममता के खेमे में लौटते हैं या ऋतब्रत बनर्जी अपने गुट को मजबूती से बनाए रखते हैं।

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