देहरादून में अनोखा सफाई अभियान डस्टबिन की पोशाक पहन बाजारों में उतरे निगमकर्मी, लोगों को दिया स्वच्छता का संदेश

देहरादून में नगर निगम ने स्वच्छता के लिए अनोखी पहल की। निगमकर्मी डस्टबिन की पोशाक पहन बाजारों में पहुंचे और लोगों को कूड़ा डस्टबिन में डालने का संदेश दिया।
देहरादून में अनोखा सफाई अभियान डस्टबिन की पोशाक पहन बाजारों में उतरे निगमकर्मी, लोगों को दिया स्वच्छता का संदेश
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देहरादून: राजधानी देहरादून को साफ-सुथरा बनाने के लिए नगर निगम ने लोगों को जागरूक करने का अनोखा तरीका अपनाया है। नगर निगम के कर्मचारी डस्टबिन जैसी पोशाक पहनकर बाजारों में पहुंचे और लोगों को सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा न फेंकने का संदेश दिया। यह अभियान राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत चलाए जा रहे जनजागरूकता प्रयासों का हिस्सा है। अभियान का उद्देश्य केवल सड़कों और बाजारों की सफाई करना नहीं, बल्कि लोगों की आदत में बदलाव लाना और उन्हें कूड़ा सीधे डस्टबिन में डालने के लिए प्रेरित करना है।

डस्टबिन की पोशाक पहने निगमकर्मियों को बाजारों में देखकर लोगों का ध्यान तुरंत उनकी ओर गया। कर्मचारी लोगों के बीच जाकर स्वच्छता का संदेश दे रहे थे और समझा रहे थे कि बाजार, सड़क, फुटपाथ या सार्वजनिक स्थान पर कूड़ा फेंकने से शहर की सुंदरता खराब होने के साथ-साथ प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ती हैं।

नगर निगम की यह पहल इसलिए भी अलग है क्योंकि आमतौर पर सफाई अभियानों में पोस्टर, बैनर, रैली और नारे के जरिए लोगों को जागरूक किया जाता है। इस बार निगम ने डस्टबिन को ही जागरूकता का माध्यम बना दिया। कर्मचारियों की पोशाक लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी और इसके जरिए कूड़ा डस्टबिन में डालने का संदेश सीधे लोगों तक पहुंचाया गया।

नगर निगम देहरादून पहले से ही शहर में स्वच्छता और पर्यावरण जागरूकता से जुड़े कई अभियान चला रहा है। जुलाई में भी निगम की ओर से स्कूलों में स्वच्छता प्रतियोगिता दिवस आयोजित किया गया था, जिसमें विद्यार्थियों को स्वच्छता, कचरा पृथक्करण, प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली और वेस्ट टू बेस्ट जैसे विषयों से जोड़ा गया।

नगर निगम की ओर से बाजारों और दुकानदारों को भी कूड़ा प्रबंधन के लिए डस्टबिन रखने की अपील की जाती रही है। निगम की आधिकारिक वेबसाइट पर स्ट्रीट वेंडर्स और दुकानदारों के लिए पर्याप्त क्षमता वाला डस्टबिन रखने और उसमें ही कूड़ा डालने से संबंधित सार्वजनिक सूचना भी उपलब्ध है।

इस अभियान के पीछे एक बड़ी चुनौती खुले में कूड़ा फेंकने की आदत है। बाजारों में खरीदारी के दौरान लोग अक्सर प्लास्टिक, पैकेट, बोतल, कागज और खाने-पीने की चीजों का कचरा सड़क किनारे छोड़ देते हैं। थोड़ी देर में यही कचरा सड़क, नाली और फुटपाथ पर जमा होने लगता है। बारिश के दौरान यह कचरा नालियों में पहुंचकर जलनिकासी व्यवस्था को भी प्रभावित कर सकता है।

देहरादून नगर निगम ने इस साल शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर करने के लिए बड़े स्तर पर अभियान भी चलाया है। मानसून से पहले प्रमुख नालों और कचरा जमा होने वाले स्थानों की सफाई की गई थी। मई में सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, मार्च से चलाए गए अभियान के दौरान नगर निगम ने करीब 8 हजार मीट्रिक टन कचरा हटाया था।

इसके बाद जून में भी रिस्पना और बिंदाल नदी क्षेत्रों में व्यापक सफाई अभियान चलाया गया। प्रशासन और नगर निगम ने मानसून से पहले नदी क्षेत्रों की सफाई पर जोर दिया, ताकि जल निकासी व्यवस्था बेहतर रहे और नदियों में कचरा जाने से रोका जा सके।

डस्टबिन की पोशाक पहनकर बाजार में पहुंचने वाले कर्मचारी इसी व्यापक स्वच्छता अभियान को जनभागीदारी से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। निगम का संदेश है कि केवल सफाई कर्मचारियों के भरोसे शहर को स्वच्छ नहीं रखा जा सकता। जब तक आम लोग अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे और कूड़ा निर्धारित स्थान पर नहीं डालेंगे, तब तक सफाई अभियान का स्थायी असर नहीं होगा।

नगर निगम की कोशिश है कि लोगों में यह भावना विकसित हो कि सड़क और बाजार भी उतने ही अपने हैं जितना घर। घर में लोग कूड़ा डस्टबिन में रखते हैं, उसी तरह सार्वजनिक स्थानों पर भी कूड़ा निर्धारित डस्टबिन में ही डालना चाहिए।

अभियान में स्वच्छता के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जा रहा है। खुले में कचरा डालने से प्लास्टिक और दूसरे अपशिष्ट नालियों के रास्ते नदियों तक पहुंच सकते हैं। देहरादून में रिस्पना और बिंदाल जैसी नदियों की सफाई को लेकर प्रशासन पहले ही बड़े अभियान चला चुका है। ऐसे में स्रोत पर ही कचरा रोकना शहर के लिए महत्वपूर्ण है।

नगर निगम की इस पहल को सोशल मीडिया और बाजारों में भी चर्चा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि डस्टबिन की पोशाक सामान्य जागरूकता अभियानों से अलग दिखाई देती है। इसका मकसद लोगों का ध्यान खींचकर कुछ सेकंड के भीतर स्वच्छता का संदेश पहुंचाना है।

हालांकि किसी भी जागरूकता अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि लोग इसके बाद अपने व्यवहार में कितना बदलाव करते हैं। यदि बाजारों में लोग कूड़ा खुले में फेंकने के बजाय डस्टबिन का इस्तेमाल करने लगते हैं तो इस तरह के अभियान का वास्तविक असर दिखाई देगा।

देहरादून नगर निगम की वेबसाइट पर भी डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रह, ठोस कचरा प्रबंधन और स्वच्छता से संबंधित विभिन्न सेवाओं और सूचनाओं को उपलब्ध कराया गया है। निगम खुले में कूड़ा फेंकने और स्वच्छता नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान भी रखता है।

फिलहाल डस्टबिन की पोशाक पहनकर बाजारों में उतरे निगमकर्मी लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इस अनूठे तरीके से नगर निगम देहरादून ने साफ संदेश दिया है कि शहर को साफ रखने की जिम्मेदारी सिर्फ सफाई कर्मचारियों की नहीं, बल्कि हर नागरिक की है। अगर लोग कूड़ा सड़क पर फेंकने के बजाय डस्टबिन में डालने की आदत अपना लें तो देहरादून को स्वच्छ और सुंदर बनाने की मुहिम को काफी मजबूती मिल सकती है।

 

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