आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने छात्रों के पढ़ने, सीखने और करियर की तैयारी के तरीके को बदलना शुरू कर दिया है। इसी बीच Google X के पूर्व चीफ बिजनेस ऑफिसर मो गौदत ने शिक्षा के भविष्य को लेकर बड़ा दावा किया है।
टेक न्यूज़: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव ने शिक्षा और रोजगार की दुनिया को बदलना शुरू कर दिया है। इसी बीच Google X के पूर्व चीफ बिजनेस ऑफिसर मो गौदत ने उच्च शिक्षा के भविष्य को लेकर एक बड़ा दावा किया है। उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में AI पारंपरिक कॉलेज शिक्षा की जरूरत को काफी हद तक बदल सकता है। उन्होंने यहां तक कहा कि अगले 10 वर्षों में मौजूदा कॉलेज मॉडल शायद ही पहले जैसा रह पाएगा।
हालांकि, गौदत ने AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ एक गंभीर चेतावनी भी दी। उनके अनुसार, यदि छात्र और आम लोग हर समस्या का समाधान AI से कराने लगेंगे और खुद सोचने की आदत छोड़ देंगे, तो यह तकनीक उनकी निर्णय लेने और समस्या सुलझाने की क्षमता को कमजोर कर सकती है।
‘10 साल में कॉलेजों का मॉडल बदल जाएगा’
मो गौदत ने हाल ही में ‘Silicon Valley Girl’ पॉडकास्ट में शिक्षा और AI के भविष्य पर अपने विचार साझा किए। उनसे पूछा गया कि क्या माता-पिता को अपने बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज भेजने की योजना बनानी चाहिए। गौदत ने पारंपरिक कॉलेज मॉडल के भविष्य पर बेहद मजबूत राय रखते हुए कहा कि अगले एक दशक में शिक्षा व्यवस्था में इतना बड़ा बदलाव आ सकता है कि आज जिस तरह से कॉलेजों को देखा जाता है, वह मॉडल खत्म या पूरी तरह बदल सकता है।
उनकी टिप्पणी को शिक्षा जगत में AI के संभावित प्रभाव को लेकर एक भविष्यवाणी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह उनका व्यक्तिगत आकलन है, न कि किसी आधिकारिक अध्ययन या नीति का निष्कर्ष।
कैलकुलेटर से की AI की तुलना

AI के प्रभाव को समझाने के लिए गौदत ने इसकी तुलना कैलकुलेटर से की। उन्होंने बताया कि कैलकुलेटर आने के बाद छात्रों को कई जटिल गणनाएं हाथ से करने की जरूरत नहीं रही। इससे उनका समय दूसरे महत्वपूर्ण कार्यों और अवधारणाओं को समझने में लगाया जा सका। उनके अनुसार, AI भी शिक्षा में इसी तरह का बदलाव ला सकता है, लेकिन इसका प्रभाव कहीं ज्यादा व्यापक हो सकता है। AI छात्रों को जानकारी खोजने, डेटा का विश्लेषण करने, विषयों को समझने और व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार सीखने में मदद कर सकता है।
इससे शिक्षा का पारंपरिक मॉडल, जिसमें शिक्षक और संस्थान ज्ञान के प्रमुख स्रोत होते हैं, धीरे-धीरे बदल सकता है। AI आधारित ट्यूटर और पर्सनलाइज्ड लर्निंग सिस्टम छात्रों को उनकी गति और क्षमता के अनुसार सीखने में मदद कर सकते हैं।
AI पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता से सावधान
मो गौदत ने AI के फायदों के साथ उसके संभावित नुकसान पर भी जोर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति हर समस्या का समाधान AI से कराने लगे और खुद सोचने या विश्लेषण करने की प्रक्रिया को छोड़ दे, तो उसकी बौद्धिक क्षमता प्रभावित हो सकती है। उनका सुझाव है कि AI का इस्तेमाल ऐसे कामों में अधिक किया जाना चाहिए, जिनमें मशीनें इंसानों की तुलना में तेजी और बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।
उदाहरण के तौर पर बड़े स्तर पर डेटा का विश्लेषण करना, बड़ी संख्या में सूचनाओं की तुलना करना और विभिन्न स्रोतों से जानकारी जुटाना जैसे कार्य AI तेजी से कर सकता है। लेकिन किसी समस्या को समझना, सही सवाल पूछना, निर्णय लेना और उसके परिणामों की जिम्मेदारी लेना अभी भी इंसानों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
छात्रों के लिए बदलेंगी जरूरी स्किल्स
AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ छात्रों के लिए केवल पारंपरिक डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं हो सकता। भविष्य में AI literacy, critical thinking, creativity, communication और problem-solving जैसी क्षमताओं की मांग बढ़ने की संभावना है। गौदत के अनुसार, छात्रों को AI से डरने के बजाय उसे एक सहयोगी टूल की तरह इस्तेमाल करना सीखना चाहिए। इसका अर्थ यह नहीं है कि विद्यार्थी हर काम AI को सौंप दें, बल्कि उन्हें यह समझना होगा कि तकनीक का सही इस्तेमाल कब और कैसे किया जाए।










